Neemuch Farmer Death: सिस्टम की ‘कातिल’ लापरवाही! 4 महीने चीखते रहे ग्रामीण, अंततः करंट ने ली दिव्यांग किसान की बलि
Reported by: News Desk | Edited by: आकाश शर्मा
15 दिसम्बर 2025, (अपडेटेड 15 दिसम्बर 2025, 10:46 अपराह्न IST)

[नीमच/मनासा, दिलीप बोराना]

अक्सर कहा जाता है कि सरकारी फाइलों में दर्ज शिकायतें तब तक रद्दी का टुकड़ा बनी रहती हैं, जब तक कोई बड़ी अनहोनी न हो जाए। मध्य प्रदेश के नीमच जिले की मनासा तहसील में रविवार को कुछ ऐसा ही हुआ। यहाँ बिजली विभाग की आपराधिक लापरवाही ने एक हंसते-खेलते परिवार को मातम में बदल दिया। Neemuch Farmer Death का यह मामला सिर्फ एक हादसा नहीं, बल्कि उस प्रशासनिक सुस्ती का परिणाम है, जिसने चेतावनियों के बावजूद अपनी आंखें मूंदे रखीं।

खेत में मौत का तांडव: कैसे हुआ हादसा?

Neemuch Farmer Death ग्राम मोकड़ी के रहने वाले 50 वर्षीय किसान धन सिंह राजपूत, जो स्वयं दिव्यांग थे, रविवार को अपने खेत में सिंचाई करने गए थे। उन्हें अंदाजा भी नहीं था कि खेत के ऊपर से गुजर रही बिजली की लाइन उनके लिए मौत का फंदा बन चुकी है। ग्रामीणों के अनुसार, बिजली के तार बुरी तरह जर्जर हो चुके थे और बेहद नीचे झूल रहे थे।

सिंचाई के दौरान जैसे ही धन सिंह का संपर्क इन नंगे तारों से हुआ, हाई-वोल्टेज करंट ने उन्हें अपनी चपेट में ले लिया। एक दिव्यांग व्यक्ति के लिए उस तेज झटके से खुद को छुड़ाना असंभव था। मौके पर ही तड़प-तड़प कर उनकी जान चली गई। त्रासदी यहीं नहीं रुकी; उनकी चीख-पुकार सुनकर जो दो अन्य लोग उन्हें बचाने दौड़े, वे भी करंट की चपेट में आ गए और बुरी तरह घायल हो गए।

त्रासदी का दूसरा पहलू: दिव्यांग परिवार का सहारा छिन गया

Neemuch Farmer Death घटना का सबसे दुखद पहलू यह है कि मृतक धन सिंह राजपूत का पूरा परिवार संघर्षों से घिरा हुआ है। मृतक खुद दिव्यांग थे, लेकिन अपनी मेहनत से घर चला रहे थे। उनकी पत्नी और बेटा भी दिव्यांग हैं। घर का एकमात्र कमाऊ सदस्य, जो अपनी शारीरिक सीमाओं को चुनौती देकर खेती कर रहा था, अब इस दुनिया में नहीं है। इस Neemuch Farmer Death ने पूरे गांव को झकझोर कर रख दिया है।

4 महीने से सो रहा था विभाग: ग्रामीणों का फूटा गुस्सा

ग्रामीणों का आक्रोश उस समय सातवें आसमान पर पहुंच गया जब यह बात सामने आई कि यह हादसा टाला जा सकता था। स्थानीय निवासियों का आरोप है कि मोकड़ी और आस-पास के क्षेत्र में बिजली के तार पिछले चार महीनों से खतरनाक स्थिति में झूल रहे थे।

ग्रामीणों ने बताया,

“हमने कनिष्ठ यंत्री से लेकर लाइनमैन तक, सबको कई बार सूचित किया। आवेदन दिए, मिन्नतें कीं कि कोई हादसा हो जाएगा, तार ठीक करवा दो। लेकिन किसी ने हमारी एक न सुनी।”

इस लापरवाही के परिणाम स्वरूप सोमवार सुबह आक्रोश का ज्वालामुखी फट पड़ा। पोस्टमार्टम के बाद शव को गांव ले जाने के बजाय, ग्रामीणों और परिजनों ने नीमच-झालावाड़ स्टेट हाईवे पर घोटा पिपलिया स्थित बालाजी मंदिर के सामने एंबुलेंस रोक दी और शव को सड़क पर रखकर चक्काजाम कर दिया।

सड़क पर संग्राम और प्रशासन की नींद टूटी

Neemuch Farmer Death नारेबाजी और प्रदर्शन के चलते नीमच-झालावाड़ मार्ग पर दोनों ओर वाहनों की लंबी कतारें लग गईं। लगभग एक घंटे तक यातायात पूरी तरह ठप रहा। मामले की गंभीरता को देखते हुए मनासा एसडीएम किरण आंजना, कुकड़ेश्वर, मनासा और रामपुरा थानों के पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचीं।

भीड़ को नियंत्रित करना आसान नहीं था। ब्लॉक कांग्रेस अध्यक्ष सुरेंद्र श्याम सोनी और जिला पंचायत सदस्य प्रतिनिधि मनीष बोरवाल ने भी ग्रामीणों के साथ मिलकर प्रशासन से जवाब मांगा। उनकी मांगें स्पष्ट थीं—दोषियों पर एफआईआर, परिवार को तत्काल मुआवजा और एक सदस्य को नौकरी।

समझौता और कार्रवाई का आश्वासन

Neemuch Farmer Death काफी देर तक चली गहमागहमी के बाद, प्रशासन को ग्रामीणों की मांगों के आगे झुकना पड़ा। एसडीएम किरण आंजना ने संवेदनशीलता दिखाते हुए पीड़ित परिवार को निम्नलिखित राहत देने की घोषणा की, जिसके बाद जाम खोला गया:

  1. आर्थिक सहायता: पीड़ित परिवार को बिजली वितरण कंपनी की तरफ से और मुख्यमंत्री संबल योजना के तहत कुल 4 लाख रुपये की आर्थिक सहायता राशि दी जाएगी।

  2. सरकारी नौकरी: मृतक के परिवार के एक स्नातक (Graduate) सदस्य को बिजली विभाग में आउटसोर्सिंग के माध्यम से नौकरी दी जाएगी।

  3. जांच और कार्रवाई: इस Neemuch Farmer Death के लिए जिम्मेदार लाइनमैन और संबंधित कर्मचारियों पर विभागीय जांच बैठाकर कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

  4. सुरक्षा ऑडिट: मोकड़ी सहित आस-पास के सभी गांवों में झूलते तारों और जर्जर पोल्स का सर्वे कर उन्हें तुरंत दुरुस्त किया जाएगा ताकि भविष्य में ऐसा हादसा न हो।

क्या अब सुधरेगा सिस्टम?

भले ही चक्काजाम समाप्त हो गया हो और प्रशासन ने मुआवजे का मरहम लगा दिया हो, लेकिन यह घटना कई सवाल छोड़ गई है। क्या किसी की जान जाने के बाद ही विभाग की नींद टूटना जरूरी है? धन सिंह राजपूत की मौत महज एक आंकड़ा नहीं, बल्कि सिस्टम की विफलता का प्रमाण है। अब देखना यह होगा कि प्रशासन अपने वादे के मुताबिक कब तक जर्जर लाइनों को बदलता है, या फिर Neemuch Farmer Death जैसी किसी और खबर का इंतजार किया जाएगा।


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Aakash Sharma
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