नीमच। मंगलवार को नीमच कलेक्टर कार्यालय में आयोजित जनसुनवाई के दौरान एक ऐसा मामला सामने आया, जिसने एक परिवार की आजीविका पर संकट खड़ा होने का दावा किया है। जावद तहसील के ग्राम समेल निवासी बिसननाथ कालबेलिया ने अपनी पट्टे की जमीन पर कथित कब्जे की शिकायत दर्ज कराते हुए प्रशासन से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की। उनका कहना है कि यदि समय रहते कार्रवाई नहीं हुई तो इस सीजन की बोवनी प्रभावित हो सकती है और परिवार की रोजी-रोटी पर सीधा असर पड़ेगा।
शिकायतकर्ता ने जनसुनवाई में दिए आवेदन में आरोप लगाया है कि उनकी पट्टे की जमीन पर महेंद्र बंजारा ने कथित रूप से कब्जा कर लिया है। उनका दावा है कि उन्हें अपनी कृषि भूमि पर खेती करने और बोवनी शुरू करने से रोका जा रहा है। आवेदन के अनुसार विरोध करने पर जान से मारने की धमकी दिए जाने का भी आरोप लगाया गया है।
खेती शुरू होने से पहले बढ़ी चिंता
आवेदन के मुताबिक, वर्तमान समय खेती और बोवनी के लिए महत्वपूर्ण है। ऐसे में यदि किसान अपनी जमीन पर समय पर फसल नहीं बो पाए तो पूरे सीजन की मेहनत और आय प्रभावित हो सकती है।
बिसननाथ कालबेलिया का कहना है कि उनकी पट्टे की जमीन पर कथित कब्जे के कारण वे खेती का कार्य शुरू नहीं कर पा रहे हैं। उनका कहना है कि परिवार की आजीविका मुख्य रूप से कृषि पर निर्भर है और यदि विवाद का जल्द समाधान नहीं हुआ तो आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है।
सीमांकन नहीं होने का भी लगाया आरोप
शिकायतकर्ता ने अपने आवेदन में संबंधित पटवारी पर भी आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि कई बार अनुरोध करने के बावजूद भूमि का सीमांकन नहीं कराया गया। आवेदन में यह भी आरोप लगाया गया है कि इस मामले में कथित मिलीभगत के कारण कार्रवाई लंबित है।
हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
जनसुनवाई में प्रशासन से रखीं ये मांगें
बिसननाथ कालबेलिया ने प्रशासन से मांग की है कि—
- पट्टे की जमीन का तत्काल सीमांकन कराया जाए।
- वास्तविक स्थिति स्पष्ट कर उन्हें कब्जा दिलाया जाए।
- शिकायत में लगाए गए आरोपों की निष्पक्ष जांच कराई जाए।
- संबंधित व्यक्ति के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाए।
- बोवनी शुरू होने से पहले विवाद का समाधान किया जाए ताकि परिवार की आजीविका सुरक्षित रह सके।
जनसुनवाई क्यों है महत्वपूर्ण?
जिला प्रशासन द्वारा प्रत्येक सप्ताह आयोजित जनसुनवाई का उद्देश्य नागरिकों की समस्याओं को सीधे सुनना और संबंधित विभागों को समाधान के निर्देश देना होता है। भूमि विवाद, सीमांकन, नामांतरण, राजस्व प्रकरण और अन्य प्रशासनिक शिकायतें बड़ी संख्या में जनसुनवाई में पहुंचती हैं।
ऐसे मामलों में प्रशासन संबंधित विभाग से रिपोर्ट लेकर आवश्यक जांच और नियमानुसार कार्रवाई करता है। यदि सीमांकन की आवश्यकता होती है तो राजस्व विभाग की प्रक्रिया के अनुसार उसका निर्धारण कराया जाता है।
अब प्रशासनिक कार्रवाई पर टिकी निगाहें
फिलहाल यह मामला प्रशासन के संज्ञान में पहुंच चुका है। शिकायतकर्ता को उम्मीद है कि संबंधित अधिकारियों द्वारा जल्द सीमांकन कराकर विवाद का समाधान कराया जाएगा, जिससे वे अपनी पट्टे की जमीन पर खेती शुरू कर सकें।
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