इंदौर मेडिकल कॉलेज में छात्र की मौत: रोंगटे खड़े कर देने वाली रैगिंग की दास्तां, पिता बोले- ‘न कुर्सी मिली, न चैन की नींद’
Reported by: News Desk | Edited by: आकाश शर्मा
05 फ़रवरी 2026, (अपडेटेड 05 फ़रवरी 2026, 2:56 अपराह्न IST)

इंदौर/ग्वालियर: मध्य प्रदेश के प्रतिष्ठित एमजीएम (MGM) मेडिकल कॉलेज से एक ऐसी हृदयविदारक खबर सामने आई है, जिसने मेडिकल छात्रों की सुरक्षा और हॉस्टल कल्चर पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। ग्वालियर के रहने वाले एमबीबीएस प्रथम वर्ष के छात्र अंतरिक्ष अग्रवाल ने 2 फरवरी की रात सुसाइड कर लिया। लेकिन यह केवल एक आत्महत्या नहीं, बल्कि व्यवस्था और प्रताड़ना के बीच दबी एक चीख है। अंतरिक्ष के पिता पंकज अग्रवाल ने अब जो खुलासे किए हैं, वे Ragging in Indore Medical College की उस कड़वी सच्चाई को बयां करते हैं, जिसे अक्सर दीवारों के पीछे दबा दिया जाता है।

कुर्सी पर बैठने की मनाही और ‘दरवाजा खुला रखो’ का फरमान

अंतरिक्ष के पिता ने नम आंखों से बताया कि उनका बेटा पिछले तीन महीनों से नर्क जैसी स्थिति से गुजर रहा था। कॉलेज में प्रवेश के बाद से ही उसे सीनियर्स द्वारा मानसिक और शारीरिक रूप से तोड़ा जा रहा था। पिता के मुताबिक, हॉस्टल की मेस में फर्स्ट ईयर के छात्रों के लिए नियम अलग थे।

  • अपमानजनक नियम: जूनियर छात्र मेस में बैठकर खाना नहीं खा सकते थे। अगर मेस में सीनियर्स मौजूद हैं, तो जुनियर्स को खड़े होकर ही खाना पड़ता था।

  • नींद पर पहरा: रात में कमरे का दरवाजा बंद करने की अनुमति नहीं थी। अंतरिक्ष को डर था कि कब कौन सीनियर आकर उसे परेशान करने लगे।

  • वर्दी का खौफ: दिन भर में यूनिफॉर्म बदलने तक की इजाजत नहीं थी। इन छोटी-छोटी लेकिन मानसिक रूप से प्रताड़ित करने वाली हरकतों ने अंतरिक्ष को डिप्रेशन की ओर धकेल दिया।

दो बार घर आकर रोया था अंतरिक्ष

परिजनों का कहना है कि अंतरिक्ष ने कई बार अपनी परेशानी साझा की थी। वह दो बार ग्वालियर अपने घर आया और दोनों ही बार वह फफक-फफक कर रो पड़ा। उसने बताया था कि सीनियर छात्र उसका मजाक उड़ाते हैं और उसे नीचा दिखाते हैं। हालांकि, डर इतना गहरा था कि उसने कभी किसी विशेष छात्र का नाम नहीं लिया, उसे डर था कि अगर नाम बताया तो प्रताड़ना और बढ़ जाएगी।

घटना से पहले का रहस्य: नया मोबाइल और सामान्य बातचीत

हैरान करने वाली बात यह है कि घटना से ठीक दो दिन पहले, यानी 31 जनवरी को अंतरिक्ष ने नया मोबाइल खरीदा था। 1 फरवरी को उसने अपने दोस्तों को पार्टी भी दी थी। 2 फरवरी की सुबह उसने अपने पिता से मेस की फीस के लिए 2,000 रुपये मंगवाए थे। पिता के अनुसार, तब उसकी आवाज बिल्कुल सामान्य थी। फिर अचानक ऐसा क्या हुआ कि उसी रात उसने फांसी लगा ली? यह सवाल अब पुलिस की जांच का केंद्र है।

कॉलेज प्रशासन का रुख और पुराना रिकॉर्ड

एमजीएम मेडिकल कॉलेज के डीन डॉ. अरविंद घनघोरिया का कहना है कि कॉलेज रिकॉर्ड में रैगिंग की कोई लिखित शिकायत नहीं मिली है। हालांकि, मामले की गंभीरता को देखते हुए Anti-Ragging Committee सहित दो जांच समितियां गठित की गई हैं।

गौरतलब है कि यह पहली बार नहीं है जब Ragging in Indore Medical College का मुद्दा उठा हो। दिसंबर 2024 में भी सोशल मीडिया और यूजीसी के माध्यम से यहां रैगिंग की गंभीर शिकायतें दर्ज कराई गई थीं, लेकिन लगता है कि उन शिकायतों पर की गई खानापूर्ति ने आज एक होनहार छात्र की जान ले ली।

पुलिस जांच: मोबाइल खोलेंगे राज?

एसीपी तुषार सिंह के नेतृत्व में पुलिस की टीम ने अंतरिक्ष के दो मोबाइल फोन जब्त किए हैं। सुसाइड नोट न मिलने के कारण अब सारा दारोमदार कॉल रिकॉर्ड्स, व्हाट्सएप चैट्स और सोशल मीडिया एक्टिविटी पर है। पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि 2 फरवरी की शाम अंतरिक्ष के साथ क्या हुआ था या उसे किसने फोन किया था।

यह घटना पूरे समाज और शिक्षा प्रणाली के लिए एक चेतावनी है। क्या डॉक्टर बनने का सपना देखने वाले छात्रों को इस तरह की प्रताड़ना से गुजरना ही होगा? Ragging in Indore Medical College का यह मामला अब न्याय की गुहार लगा रहा है।


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Aakash Sharma
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