नीमच। केंद्रीय नारकोटिक्स ब्यूरो, नीमच ने बुधवार को टाउन हॉल में अफीम फसल की उन्नत खेती एवं गुड एग्रीकल्चर प्रैक्टिसेस विषय पर प्रशिक्षण शिविर आयोजित किया। शिविर में नीमच, जावद और मनासा विकासखंड के चयनित अफीम किसानों ने हिस्सा लिया। प्रशिक्षण का मुख्य उद्देश्य किसानों को वैज्ञानिक खेती की तकनीकों से जोड़ना और फसल में बेहतर उत्पादन के साथ निर्धारित मानकों के अनुरूप मार्फिन प्रतिशत हासिल करने के लिए जरूरी कृषि संबंधी जानकारी देना था।
मिट्टी, बीज और पोषण प्रबंधन पर वैज्ञानिक जानकारी
प्रशिक्षण के दौरान कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिकों ने किसानों को खेती के विभिन्न चरणों से जुड़ी जानकारी दी। इसमें भूमि चयन एवं प्रबंधन, उन्नत बीज, संतुलित पोषण, उर्वरक उपयोग, सिंचाई एवं जल प्रबंधन जैसे विषय शामिल रहे। वैज्ञानिकों ने खरपतवार नियंत्रण के साथ-साथ रोग और कीट प्रबंधन के बारे में भी किसानों को जानकारी दी। किसानों को बताया गया कि फसल की जरूरत के अनुसार समय पर और संतुलित पोषक तत्वों का उपयोग तथा वैज्ञानिक तरीके से सिंचाई करने से उत्पादन और गुणवत्ता में सुधार किया जा सकता है।
फसल की गुणवत्ता और मार्फिन प्रतिशत पर जोर
शिविर में फसल की गाढ़ता और मार्फिन प्रतिशत को निर्धारित स्तर तक बनाए रखने पर विशेष ध्यान दिया गया। कृषि विज्ञान केंद्र नीमच के प्रधान वैज्ञानिक एवं प्रमुख डॉ. सीपी पचौरी ने बताया कि कई बार किसानों को अपेक्षित उत्पादन प्राप्त हो जाता है, लेकिन फसल की गुणवत्ता या मार्फिन प्रतिशत निर्धारित स्तर तक नहीं पहुंच पाता।
उनके अनुसार इसके पीछे पोषक प्रबंधन, जल प्रबंधन और कृषि रसायनों के अनुचित उपयोग जैसे कारण हो सकते हैं।
विशेषज्ञों की सलाह के अनुसार रसायनों का उपयोग
प्रशिक्षण के दौरान किसानों को फसल में किसी भी दवा या कृषि रसायन का उपयोग विशेषज्ञों की सलाह और निर्धारित दिशा-निर्देशों के अनुसार करने की सलाह दी गई। वैज्ञानिकों ने पोषक तत्वों का समय पर उपयोग और सिंचाई की वैज्ञानिक प्रक्रिया अपनाने पर भी जोर दिया। किसानों को यह भी बताया गया कि फसल के अलग-अलग चरणों में पानी की आवश्यकता अलग हो सकती है।
इसके साथ ही बिना विशेषज्ञ सलाह के कृषि रसायनों का इस्तेमाल फसल की गुणवत्ता को प्रभावित कर सकता है। प्रशिक्षण में फसल की देखभाल और संग्रहण से जुड़े वैज्ञानिक पहलुओं की जानकारी भी दी गई।
परंपरागत ज्ञान के साथ विज्ञान को जोड़ने पर जोर
डिप्टी नारकोटिक्स कमिश्नर निखिल गांधी ने कहा कि किसान अपने परंपरागत ज्ञान के साथ वैज्ञानिक शोध और तकनीकों को जोड़कर खेती करें तो उत्पादकता बढ़ाई जा सकती है। उन्होंने कहा कि उत्पादन बढ़ने से किसानों की आय में वृद्धि हो सकती है और अफीम से बनने वाली जीवनरक्षक दवाओं के लिए आवश्यक कच्चा माल भी उपलब्ध होगा। निखिल गांधी के अनुसार प्रशिक्षण का उद्देश्य किसानों को फसल की गुणवत्ता और निर्धारित मानकों के अनुरूप उत्पादन हासिल करने के लिए वैज्ञानिक जानकारी उपलब्ध कराना है।
किसानों ने वैज्ञानिकों से पूछे खेती से जुड़े सवाल
शिविर में किसानों ने खेती से जुड़ी विभिन्न समस्याओं और अपनी जिज्ञासाओं को लेकर वैज्ञानिकों से सवाल किए। किसानों ने इस तरह के प्रशिक्षण शिविर नियमित रूप से आयोजित किए जाने की आवश्यकता बताई। किसानों के अनुसार ऐसे कार्यक्रमों से किसान, वैज्ञानिक और विभागीय अधिकारियों के बीच बेहतर समन्वय बनाने में मदद मिल सकती है।
बेहतर उपज वाले किसानों का सम्मान
कार्यक्रम के दौरान पिछले वर्ष बेहतर उपज प्राप्त करने वाले किसानों को डिप्टी नारकोटिक्स कमिश्नर द्वारा सम्मानित किया गया। इसके अलावा कार्यक्रम में उपस्थित किसानों को नशामुक्ति की शपथ भी दिलाई गई। कार्यक्रम में डीओ लालाराम दिनकर, रविंद्र डोगरे, जेपी मीणा, कृषि विज्ञान केंद्र के डॉ. श्याम सिंह, कॉलेज ऑफ हॉर्टिकल्चर मंदसौर की डॉ. किरण सहित विभागीय अधिकारी, वैज्ञानिक और बड़ी संख्या में किसान मौजूद रहे।
आगे भी आयोजित किए जा सकते हैं प्रशिक्षण शिविर
अधिकारियों के अनुसार किसानों से प्रशिक्षण शिविर की उपयोगिता को लेकर फीडबैक लिया गया है। यदि किसानों को ऐसे प्रशिक्षण से लाभ मिलता है और इसकी आवश्यकता महसूस होती है, तो भविष्य में इस तरह के शिविर लगातार आयोजित किए जाएंगे।
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