भोपाल। मध्य प्रदेश की राजनीति में आज का दिन बेहद अहम माना जा रहा है। मध्य प्रदेश विधानसभा का विशेष सत्र सोमवार को बुलाया गया है, जिसमें महिला आरक्षण के मुद्दे पर विस्तृत चर्चा होने जा रही है। यह सत्र “नारी शक्ति वंदन” विषय पर केंद्रित रहेगा और राज्य सरकार इसे महिलाओं के राजनीतिक सशक्तिकरण की दिशा में एक निर्णायक कदम के रूप में पेश कर रही है।
सरकार की ओर से संकेत मिले हैं कि इस विशेष सत्र में महिलाओं को 33% आरक्षण देने के समर्थन में संकल्प पारित किया जा सकता है। अगर ऐसा होता है, तो यह राज्य की राजनीति में एक बड़ा बदलाव माना जाएगा।
नारी शक्ति वंदन के जरिए महिला आरक्षण पर जोर
मुख्यमंत्री मोहन यादव इस सत्र में “नारी शक्ति वंदन अधिनियम” के अनुरूप महिलाओं को संसद और विधानसभाओं में 33% आरक्षण देने का प्रस्ताव रखेंगे। सरकार का मानना है कि महिला आरक्षण से महिलाओं की भागीदारी बढ़ेगी और नीति निर्माण में उनकी भूमिका मजबूत होगी।
सीएम ने विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि कांग्रेस ने लंबे समय तक महिलाओं के अधिकारों की अनदेखी की है। उन्होंने इंदिरा गांधी से लेकर राहुल गांधी तक के नेतृत्व पर सवाल उठाते हुए इसे महिलाओं के साथ अन्याय बताया।
भाजपा-कांग्रेस के बीच टकराव तेज
महिला आरक्षण को लेकर सियासी माहौल गरमाया हुआ है। मुख्यमंत्री ने नरेंद्र मोदी के फैसले की तारीफ करते हुए कहा कि केंद्र सरकार ने महिलाओं को 33% आरक्षण देकर ऐतिहासिक कार्य किया है।
वहीं विपक्षी दलों पर आरोप लगाते हुए उन्होंने कहा कि कई पार्टियों ने इस कानून को लागू होने से रोकने की कोशिश की। इसके जवाब में कांग्रेस ने सरकार की नीयत पर सवाल खड़े किए हैं।
कांग्रेस की अलग मांग: अभी लागू हो महिला आरक्षण
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने स्पष्ट कहा कि कांग्रेस महिला आरक्षण का समर्थन करती है, लेकिन इसे तुरंत लागू किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि मौजूदा सीटों पर ही आरक्षण लागू होना चाहिए, न कि परिसीमन के बाद।
विशेष सत्र से पहले कांग्रेस ने भोपाल में पैदल मार्च निकालकर इस मुद्दे को और तेज कर दिया। इससे साफ है कि यह मुद्दा अब राजनीतिक बहस का केंद्र बन चुका है।
महिला आरक्षण पर विवाद की पूरी कहानी
“नारी शक्ति वंदन अधिनियम” पहले संसद में पारित हो चुका था, लेकिन हाल में लोकसभा में इससे जुड़ा संविधान संशोधन विधेयक पारित नहीं हो सका। इसके बाद भाजपा ने विपक्ष को “महिला विरोधी” करार दिया।
दूसरी ओर, विपक्ष का कहना है कि सरकार केवल राजनीतिक लाभ के लिए इस मुद्दे को उठा रही है और वास्तविक क्रियान्वयन को लेकर गंभीर नहीं है। यही कारण है कि महिला आरक्षण अब एक संवेदनशील राजनीतिक मुद्दा बन गया है।
श्रद्धांजलि और अन्य कार्यवाही
इस विशेष सत्र के दौरान कई दिवंगत हस्तियों को श्रद्धांजलि दी जाएगी, जिनमें प्रसिद्ध गायिका आशा भोंसले का नाम भी शामिल है। इसके अलावा सदन की अन्य औपचारिक कार्यवाही भी पूरी की जाएगी।
क्या बदल जाएगा आज के फैसले से?
अगर इस सत्र में महिला आरक्षण को लेकर संकल्प पारित होता है, तो यह राज्य और देश की राजनीति में एक बड़ा संदेश देगा। हालांकि, असली सवाल इसके लागू होने की प्रक्रिया और समयसीमा को लेकर बना रहेगा।
फिलहाल, सभी की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि यह विशेष सत्र सिर्फ राजनीतिक बयानबाजी तक सीमित रहेगा या वास्तव में महिलाओं को राजनीतिक ताकत देने की दिशा में ठोस कदम उठाया जाएगा।
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