नीमच। नीमच शहर के बघाना क्षेत्र में शनिवार को हुआ एक खौफनाक बिजली हादसा लोगों के रोंगटे खड़े कर गया। नाका नंबर-4 दरगाह के पास बिजली लाइन पर काम कर रहे एमपीईबी के लाइनमैन त्रिलोक प्रजापति अचानक करंट की चपेट में आ गए। तेज झटके के बाद उनका शरीर ऊंचे पोल पर बेकाबू हुआ और कुछ ही सेकंड में वे नीचे जमीन पर आ गिरे। हादसे के बाद पूरे इलाके में चीख-पुकार और अफरा-तफरी मच गई।
प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक बिजली हादसा इतना अचानक हुआ कि मौके पर मौजूद लोग कुछ समझ ही नहीं पाए। लाइन पर मरम्मत और रखरखाव का कार्य चल रहा था। इसी दौरान अचानक अर्थ रिटर्न होने की आशंका बनी और लाइन में करंट दौड़ गया। करंट लगते ही लाइनमैन पोल पर ही झटके खाने लगे और संतुलन बिगड़ने के बाद सीधे नीचे गिर पड़े।
हादसे के बाद मौके पर मौजूद लोगों ने दौड़कर घायल लाइनमैन को संभाला। कई लोगों ने तुरंत डायल-112 पर सूचना दी। स्थानीय नागरिकों की मदद से गंभीर रूप से घायल कर्मचारी को जिला अस्पताल पहुंचाया गया, जहां डॉक्टरों ने प्राथमिक उपचार शुरू किया। हालत ज्यादा गंभीर होने पर चिकित्सकों ने उन्हें उदयपुर रेफर कर दिया।


अस्पताल सूत्रों के अनुसार घायल कर्मचारी के सिर, कमर और शरीर के अन्य हिस्सों में गंभीर चोटें आई हैं। फिलहाल उदयपुर में उनका इलाज जारी है और हालत नाजुक बताई जा रही है। घायल की पहचान त्रिलोक प्रजापति पुत्र हुकुमचंद प्रजापति निवासी नीमच के रूप में हुई है, जो मध्यप्रदेश विद्युत मंडल में लाइनमैन के पद पर कार्यरत हैं।
बिजली हादसा के बाद परिजनों का दर्द छलका
इस बिजली हादसा के बाद परिवार का दर्द खुलकर सामने आया। परिजनों ने आरोप लगाया कि हादसे के बाद विभाग की ओर से कोई जिम्मेदार अधिकारी मौके या अस्पताल तक नहीं पहुंचा। परिवार का कहना है कि इलाज और रेफर की व्यवस्था उन्हें अपने स्तर पर करनी पड़ी।
परिजनों ने बताया कि लाइनमैन हर दिन जान जोखिम में डालकर बिजली व्यवस्था संभालते हैं, लेकिन हादसा होने पर विभाग कर्मचारियों को भगवान भरोसे छोड़ देता है। परिवार ने कहा कि यदि समय पर विभागीय मदद मिलती तो राहत मिल सकती थी।
“स्टाफ नहीं, सुरक्षा नहीं… फिर कैसे बचें जान?”
स्थानीय कर्मचारियों और नागरिकों का कहना है कि यह बिजली हादसा केवल एक दुर्घटना नहीं बल्कि विभागीय लापरवाही की चेतावनी है। कर्मचारियों के मुताबिक लंबे समय से स्टाफ की भारी कमी बनी हुई है। कई जगहों पर लाइनमैनों को अकेले ही हाई वोल्टेज लाइन पर काम करना पड़ता है।
कर्मचारियों का कहना है कि बिजली लाइन पर काम के दौरान बैकअप टीम, सुरक्षा बेल्ट, तकनीकी निगरानी और पर्याप्त सहयोगी स्टाफ बेहद जरूरी होता है। लेकिन जमीनी हकीकत में कई कर्मचारी सीमित संसाधनों के सहारे काम कर रहे हैं। कुछ कर्मचारियों ने बताया कि कई बार फील्ड में जोखिम भरे कार्यों के दौरान भी पर्याप्त सुरक्षा इंतजाम उपलब्ध नहीं होते। ऐसे में हर दिन ड्यूटी पर निकलना किसी खतरे से कम नहीं है।
हादसे के बाद लोगों में गुस्सा
इस बिजली हादसा के बाद क्षेत्र में लोगों के बीच भारी नाराजगी देखी गई। स्थानीय नागरिकों ने सवाल उठाया कि आखिर कब तक बिजली कर्मचारी अपनी जान जोखिम में डालकर काम करते रहेंगे? लोगों ने विभाग से मांग की है कि फील्ड कर्मचारियों की सुरक्षा को लेकर सख्त और स्थायी व्यवस्था बनाई जाए।
नागरिकों ने हादसे की निष्पक्ष जांच, जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय करने और घायल कर्मचारी के बेहतर इलाज की मांग की है।
जांच के बाद साफ होगी पूरी तस्वीर
फिलहाल बिजली हादसा के कारणों को लेकर विभाग की ओर से कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं हुआ है। प्रारंभिक जानकारी में अर्थ रिटर्न होने से करंट लगने की आशंका जताई जा रही है। विभागीय जांच के बाद ही स्पष्ट होगा कि हादसा तकनीकी खराबी के कारण हुआ या सुरक्षा में किसी स्तर पर चूक हुई।
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