कलेक्टोरेट के एक कमरे में हुआ लेन-देन, कुछ ही मिनटों बाद पहुंच गई लोकायुक्त टीम

नीमच। गुरुवार को नीमच कलेक्टोरेट परिसर में अचानक ऐसा घटनाक्रम सामने आया, जिसने पूरे प्रशासनिक अमले को हैरान कर दिया। दोपहर तक सब कुछ सामान्य दिखाई दे रहा था, लेकिन कुछ ही देर बाद एक कार्रवाई ने पूरे परिसर में हलचल मचा दी। लोग यह जानने की कोशिश करते रहे कि आखिर ऐसा क्या हुआ कि अधिकारी, कर्मचारी और आम नागरिक एक ही घटना की चर्चा करने लगे।

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ताजा जानकारी के अनुसार, मामला आदिम जाति कल्याण विभाग से जुड़ा है, जहां एक शिकायत के आधार पर लोकायुक्त संगठन उज्जैन की टीम ने योजनाबद्ध कार्रवाई को अंजाम दिया।

एक शिकायत से शुरू हुई पूरी कहानी

जानकारी के मुताबिक जूनियर कन्या छात्रावास कुकड़ेश्वर की अधीक्षिका कुर्दुला एक्का ने लोकायुक्त उज्जैन से संपर्क किया था। शिकायत में विभागीय जांच और लंबे समय से रुके वेतन से जुड़ा मामला बताया गया।

शिकायतकर्ता का आरोप था कि जांच में सहयोग करने और वेतन जारी कराने के बदले बड़ी रकम की मांग की गई। शिकायत मिलने के बाद लोकायुक्त ने सीधे कार्रवाई करने के बजाय पहले पूरे मामले का सत्यापन किया। जब प्रारंभिक जांच में शिकायत सही पाई गई तो टीम ने अगला कदम उठाने की तैयारी शुरू कर दी।

गुरुवार का इंतजार क्यों कर रही थी टीम?

सूत्रों के अनुसार शिकायत की पुष्टि होने के बाद पूरी रणनीति तैयार की गई। संबंधित पक्षों की गतिविधियों पर नजर रखी गई और उस समय का इंतजार किया गया जब कथित लेन-देन होना था।

गुरुवार को जैसे ही तय प्रक्रिया आगे बढ़ी, लोकायुक्त की टीम पहले से ही सतर्क थी। बताया जाता है कि कुछ ही क्षणों में पूरा घटनाक्रम बदल गया और मौके पर मौजूद लोगों को समझ ही नहीं आया कि आखिर हुआ क्या है।

फिर अचानक सामने आई पूरी सच्चाई

लोकायुक्त टीम ने दबिश देकर आदिम जाति कल्याण विभाग के जिला संयोजक राकेश राठौर और उत्कृष्ट बालक छात्रावास नीमच के अधीक्षक हरीश चौहान को पकड़ लिया।

लोकायुक्त के अनुसार शिकायत में कुल 1 लाख 25 हजार रुपये की रिश्वत मांगने का आरोप लगाया गया था। कार्रवाई के दौरान 1 लाख रुपये की राशि बरामद की गई। अधिकारियों के मुताबिक यह राशि हरीश चौहान की पैंट की दाहिनी जेब से मिली।

कलेक्टोरेट परिसर में मच गया हड़कंप

जैसे ही कार्रवाई की खबर फैली, कलेक्टोरेट परिसर में अफरा-तफरी का माहौल बन गया। विभिन्न विभागों के कर्मचारी और वहां मौजूद लोग घटना की जानकारी लेने में जुट गए। दिनभर लोगों के बीच चर्चा का विषय यही रहा कि आखिर इतनी बड़ी कार्रवाई सीधे कलेक्टोरेट परिसर में कैसे हुई।

कार्रवाई से जुड़ी प्रमुख बातें

  • लोकायुक्त उज्जैन को शिकायत प्राप्त हुई थी।
  • शिकायत का पहले सत्यापन किया गया।
  • कथित रूप से 1 लाख 25 हजार रुपये की मांग का आरोप लगाया गया।
  • ट्रैप कार्रवाई के दौरान 1 लाख रुपये बरामद हुए।
  • दो अधिकारियों को मौके पर पकड़ा गया।
  • प्रकरण दर्ज कर आगे की कार्रवाई शुरू कर दी गई।

तबादले के बाद भी चर्चा में क्यों था यह नाम?

मामले में एक और तथ्य सामने आया है। जानकारी के अनुसार जिला संयोजक राकेश राठौर का हाल ही में तबादला हो चुका था, लेकिन वे अभी तक कार्यमुक्त नहीं हुए थे। सूत्रों के अनुसार वे तबादले के बाद भी विभागीय कार्यों का संचालन कर रहे थे। इसी दौरान लोकायुक्त की कार्रवाई हुई।

किन धाराओं में दर्ज हुआ मामला?

लोकायुक्त अधिकारियों के अनुसार आरोपियों के विरुद्ध भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 1988 (संशोधित अधिनियम 2018) की धारा-7 तथा भारतीय न्याय संहिता 2023 की धारा 61(2) के तहत प्रकरण दर्ज किया गया है। मामले में आगे की वैधानिक कार्रवाई जारी है।

वरिष्ठ अधिकारियों की निगरानी में हुई कार्रवाई

लोकायुक्त विभाग के अनुसार यह पूरी कार्रवाई लोकायुक्त महानिदेशक योगेश देशमुख के निर्देश एवं पुलिस अधीक्षक आनंद कुमार यादव के मार्गदर्शन में की गई। 

ट्रैप दल का नेतृत्व डीएसपी दिनेशचंद्र पटेल ने किया। लोकायुक्त एसपी आनंद कुमार यादव ने कार्रवाई की पुष्टि करते हुए बताया कि मामले में आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी है।


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