नीमच | कुछ ही मिनटों में सब कुछ बदल गया। खेत से घर लौट रही दो मासूम बच्चियां अचानक चीखने लगीं। गांव के लोगों ने देखा कि एक सफेद ईको कार तेजी से सड़क की ओर बढ़ रही है। आरोप है कि कार में सवार युवकों ने दोनों बच्चियों को जबरन वाहन में बैठा लिया था। इसके बाद जो हुआ, उसने पूरे इलाके को हिला दिया। ग्रामीणों ने बिना देर किए बाइक उठाई, फोन पर एक-दूसरे को सूचना दी और शुरू हुआ करीब 25 किलोमीटर लंबा पीछा, जिसने अंततः दोनों बच्चियों को सुरक्षित उनके परिवार तक पहुंचा दिया।
मध्यप्रदेश के नीमच जिले के रतनगढ़ थाना क्षेत्र की जाट चौकी अंतर्गत तुमड़िया गांव में शुक्रवार को सामने आए इस मामले ने पूरे क्षेत्र में दहशत के साथ-साथ ग्रामीणों की एकजुटता की मिसाल भी पेश की है। पुलिस मामले की जांच कर रही है और फरार तीसरे संदिग्ध की तलाश जारी है।
खेत से लौट रही थीं दोनों बच्चियां
पुलिस और ग्रामीणों से मिली जानकारी के अनुसार, 8 और 13 वर्ष की दो नाबालिग बच्चियां अपने खेत से पैदल घर लौट रही थीं। इसी दौरान एक सफेद ईको कार उनके पास आकर रुकी। आरोप है कि कार में बैठे युवकों ने दोनों बच्चियों को जबरन वाहन में बैठा लिया और वहां से भाग निकले। बच्चियों की चीख सुनते ही आसपास खेतों में काम कर रहे लोगों का ध्यान उनकी ओर गया। किसी को समझ नहीं आया कि आखिर कुछ ही सेकंड में क्या हो गया। लेकिन ग्रामीणों ने समय गंवाए बिना पीछा शुरू करने का फैसला किया।
सबसे पहले इन दो ग्रामीणों ने दिखाई हिम्मत
बताया गया कि भेरूलाल जटिया और प्रहलाद बैरागी सबसे पहले बाइक लेकर कार के पीछे निकले। करीब दो किलोमीटर तक लगातार पीछा करने के बाद उन्होंने कार को रोकने की कोशिश की, लेकिन आरोप है कि कार सवारों ने बचने के प्रयास में उनकी बाइक को टक्कर मार दी। टक्कर इतनी तेज थी कि बाइक काफी दूर तक घिसटती चली गई। इसके बावजूद दोनों ग्रामीण पीछे नहीं हटे। उन्होंने लगातार अन्य गांवों के लोगों को फोन कर कार की दिशा और लोकेशन की जानकारी देना जारी रखा।
यहीं से पूरे इलाके में एकजुटता की ऐसी श्रृंखला शुरू हुई, जिसने आरोपियों के भागने के रास्ते बंद करने शुरू कर दिए।
गांव-गांव से लोग सड़क पर उतर आए
घटना की सूचना मिलते ही आसपास के गांवों में तेजी से खबर फैल गई। ग्रामीणों ने अलग-अलग रास्तों पर निगरानी शुरू कर दी। आरोपियों की कार बिजेपुर, दौलतपुरा, पालछा और चडोल की ओर बढ़ रही थी। उधर, आगे मौजूद ग्रामीणों ने संभावित मार्ग का अनुमान लगाकर आटा सरोदा के पास सड़क पर ट्रैक्टर खड़ा कर दिया, ताकि कार आगे नहीं निकल सके। करीब 25 किलोमीटर तक चले पीछा के बाद आखिरकार ईको कार को रोक लिया गया।
दो संदिग्ध पकड़ाए, तीसरा भाग निकला
कार रुकते ही ग्रामीणों ने उसमें सवार दो संदिग्धों को पकड़ लिया, जबकि तीसरा व्यक्ति मौके का फायदा उठाकर फरार हो गया। इसके बाद दोनों बच्चियों को सुरक्षित कार से बाहर निकाला गया और उनके परिजनों को सौंप दिया गया। घटना के बाद पूरे क्षेत्र में बड़ी संख्या में ग्रामीण मौके पर पहुंच गए। बच्चियों के सुरक्षित मिलने पर परिवार ने राहत की सांस ली।
पुलिस के हवाले किए गए संदिग्ध
ग्रामीणों ने पकड़े गए दोनों संदिग्धों को पहले जाट पुलिस चौकी और बाद में रतनगढ़ थाने के सुपुर्द कर दिया। पुलिस के अनुसार शुरुआती जानकारी में दोनों पकड़े गए संदिग्ध भी नाबालिग बताए जा रहे हैं। इनमें एक सरवानिया मसानी तथा दूसरा खोर क्षेत्र का निवासी बताया गया है। हालांकि उनकी उम्र और पहचान का आधिकारिक सत्यापन किया जा रहा है। फिलहाल फरार संदिग्ध की तलाश जारी है।
ईको कार से मिले ऐसे सुराग, जांच कई एंगल पर
जांच के दौरान पुलिस को ईको कार के अंदर एक अन्य बच्ची की चप्पल और वाहन के कांच पर लगाने वाला गत्ता मिला है। इन वस्तुओं के मिलने के बाद पुलिस अब यह भी जांच कर रही है कि कहीं इस वाहन का उपयोग पहले किसी अन्य घटना में तो नहीं किया गया था। फिलहाल इस संबंध में कोई आधिकारिक निष्कर्ष सामने नहीं आया है और जांच जारी है।
क्या किसी बड़े गिरोह से जुड़ा है मामला?
पुलिस इस पहलू की भी जांच कर रही है कि यह केवल अपहरण के प्रयास का मामला था या इसके पीछे किसी बड़े नेटवर्क या गिरोह की भूमिका हो सकती है।अधिकारियों का कहना है कि पीड़ित परिवार के बयान दर्ज किए जा रहे हैं और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर अपहरण के प्रयास सहित अन्य संबंधित धाराओं में कार्रवाई की जा रही है।
ग्रामीणों की सतर्कता बनी सबसे बड़ी ताकत
पूरे घटनाक्रम में जिस बात की सबसे अधिक चर्चा हो रही है, वह ग्रामीणों की त्वरित प्रतिक्रिया है। यदि बच्चियों की आवाज सुनकर लोग तत्काल सक्रिय नहीं होते, अलग-अलग गांवों में सूचना नहीं पहुंचती और रास्ता रोकने की योजना नहीं बनाई जाती, तो आरोपियों को पकड़ना मुश्किल हो सकता था। ग्रामीणों ने प्रशासन से फरार संदिग्ध को जल्द गिरफ्तार करने और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है।
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