SIP vs Lumpsum: ₹10,000 की SIP या ₹2 लाख एकमुश्त निवेश, ₹1 करोड़ पहले कौन बनाएगा?
Reported by: News Desk | Edited by: आकाश शर्मा
29 जुलाई 2026, (अपडेटेड 29 जुलाई 2026, 11:41 पूर्वाह्न IST)

SIP vs Lumpsum: ₹1 करोड़ का फंड बनाने के लक्ष्य में ₹10,000 की मासिक SIP और ₹2 लाख के एकमुश्त निवेश के बीच बड़ा अंतर नजर आता है। दिए गए कैलकुलेशन के मुताबिक, 12% सालाना अनुमानित रिटर्न मानें तो ₹10,000 की SIP करीब 21 साल में ₹1 करोड़ से ज्यादा तक पहुंच सकती है, जबकि ₹2 लाख का Lumpsum निवेश लगभग 35 साल में इस स्तर तक पहुंचता है।

हालांकि, दोनों विकल्पों में निवेश की कुल रकम और निवेश का तरीका अलग है। SIP में निवेशक हर महीने पैसा लगाता रहता है, जबकि Lumpsum में शुरुआत में ही पूरी रकम निवेश कर दी जाती है। इसलिए सिर्फ अंतिम रकम देखकर दोनों की सीधी तुलना करना पर्याप्त नहीं है।

SIP vs Lumpsum में क्या है अंतर ?

म्यूचुअल फंड में निवेश के लिए SIP और Lumpsum दो अलग तरीके हैं। SIP यानी Systematic Investment Plan में हर महीने एक तय रकम निवेश की जाती है। इससे नियमित आय वाले निवेशक छोटी-छोटी रकम के जरिए लंबे समय में बड़ा फंड बनाने की दिशा में आगे बढ़ सकते हैं। दूसरी ओर, Lumpsum में पूरी उपलब्ध रकम एक बार में निवेश की जाती है। इसका मतलब है कि निवेश की पूरी रकम शुरुआत से ही बाजार में रहती है। हालांकि इसका वास्तविक रिटर्न बाजार के प्रदर्शन और निवेश किए गए म्यूचुअल फंड पर निर्भर करेगा।

₹1 करोड़ के लक्ष्य को समझने के लिए यहां 12% सालाना अनुमानित रिटर्न के आधार पर दोनों विकल्पों का कैलकुलेशन दिया गया है।

₹2 लाख का Lumpsum कब बनेगा ₹1 करोड़?

मान लीजिए किसी निवेशक के पास आज ₹2 लाख की एकमुश्त रकम है और वह इसे लंबे समय के लिए म्यूचुअल फंड में निवेश करता है।

निवेश की रकम: ₹2,00,000
निवेश अवधि: 35 साल
अनुमानित सालाना रिटर्न: 12%
35 साल बाद अनुमानित राशि: करीब ₹1.05 करोड़

दिए गए कैलकुलेशन के अनुसार, ₹2 लाख को एक बार निवेश कर करीब 35 साल तक बनाए रखने पर 12% सालाना अनुमानित रिटर्न की स्थिति में यह रकम ₹1 करोड़ के स्तर को पार कर सकती है। इस उदाहरण की खास बात यह है कि निवेशक शुरुआत में सिर्फ ₹2 लाख लगाता है और उसके बाद नई रकम जोड़ना जरूरी नहीं माना गया है। लंबी अवधि में कंपाउंडिंग के कारण शुरुआती निवेश बढ़ सकता है।

लेकिन यहां 12% की दर केवल कैलकुलेशन के लिए मानी गई है। इसे भविष्य में मिलने वाले निश्चित रिटर्न के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।

₹10,000 की SIP कितने साल में बनाएगी ₹1 करोड़?

अब दूसरे विकल्प में हर महीने ₹10,000 की SIP का उदाहरण लेते हैं। दिए गए कैलकुलेशन में 21 साल तक लगातार निवेश और 12% अनुमानित सालाना रिटर्न माना गया है।

मासिक SIP: ₹10,000
निवेश अवधि: 21 साल
कुल जमा रकम: ₹25,20,000
अनुमानित सालाना रिटर्न: 12%
अनुमानित फंड: करीब ₹1.04 करोड़

यानी इस कैलकुलेशन के आधार पर ₹10,000 की मासिक SIP लगभग 21 साल में ₹1 करोड़ से अधिक का फंड तैयार कर सकती है। यहां ध्यान देने वाली बात यह है कि निवेशक 21 वर्षों के दौरान कुल ₹25.20 लाख अपनी ओर से निवेश करेगा। इसलिए ₹2 लाख के Lumpsum और ₹10,000 की SIP के नतीजों की तुलना करते समय कुल निवेश को भी ध्यान में रखना जरूरी है।

SIP ने 21 साल में लक्ष्य पाया, फिर क्या वही बेहतर है?

ऊपर दिए कैलकुलेशन में ₹10,000 की SIP करीब 21 साल में ₹1 करोड़ के पार पहुंच रही है, जबकि ₹2 लाख के Lumpsum को लगभग 35 साल लग रहे हैं। पहली नजर में SIP लक्ष्य तक 14 साल पहले पहुंचती दिखाई देती है। लेकिन इसका अर्थ यह नहीं है कि SIP हर परिस्थिति में Lumpsum से बेहतर है। दोनों उदाहरणों में निवेश की गई मूल रकम समान नहीं है।

SIP वाले उदाहरण में 21 साल में निवेशक कुल ₹25.20 लाख लगाता है, जबकि Lumpsum उदाहरण में शुरुआती निवेश सिर्फ ₹2 लाख है। इसलिए यहां मुख्य अंतर केवल निवेश के तरीके का नहीं, बल्कि निवेश की कुल रकम का भी है।

Step-Up SIP से बदल सकता है कैलकुलेशन

नियमित आय बढ़ने के साथ यदि कोई निवेशक अपनी SIP की रकम भी बढ़ाता है, तो इसे आम तौर पर Step-Up SIP कहा जाता है। दिए गए उदाहरण के अनुसार, SIP की राशि बढ़ाने पर ₹1 करोड़ का लक्ष्य 21 साल से पहले हासिल हो सकता है।

हालांकि यह कितने साल पहले होगा, इसका सटीक समय SIP में की गई बढ़ोतरी और वास्तविक रिटर्न पर निर्भर करेगा। उपलब्ध जानकारी में Step-Up SIP की सालाना बढ़ोतरी की दर नहीं दी गई है, इसलिए इसका निश्चित कैलकुलेशन यहां नहीं किया गया है।

SIP या Lumpsum, किसे चुनें?

नियमित सैलरी या आय वाले व्यक्ति के लिए SIP निवेश को नियमित रखने का एक विकल्प हो सकता है। इसमें हर महीने तय रकम निवेश की जाती है, जिससे एकमुश्त बड़ी रकम की आवश्यकता नहीं होती। वहीं, जिनके पास बोनस, संपत्ति की बिक्री या किसी अन्य माध्यम से एकमुश्त रकम उपलब्ध है और वे उसे लंबी अवधि के लिए निवेश करना चाहते हैं, उनके लिए Lumpsum एक विकल्प हो सकता है।

किस विकल्प का चयन किया जाए, यह उपलब्ध रकम, निवेश अवधि, वित्तीय लक्ष्य और जोखिम सहने की क्षमता पर निर्भर करता है।

₹1 करोड़ के लक्ष्य में कौन निकला आगे?

दिए गए कैलकुलेशन में ₹10,000 की मासिक SIP करीब 21 साल में ₹1 करोड़ से ज्यादा, जबकि ₹2 लाख का Lumpsum करीब 35 साल में ₹1 करोड़ से ज्यादा का फंड तैयार करता दिखाई देता है।

लेकिन दोनों में कुल निवेश अलग-अलग है। SIP में 21 साल के दौरान ₹25.20 लाख लगाए जा रहे हैं, जबकि Lumpsum में केवल ₹2 लाख का शुरुआती निवेश है। इसलिए निवेश का फैसला केवल इस आधार पर नहीं किया जाना चाहिए कि ₹1 करोड़ पहले किस विकल्प में बन रहा है।

Disclaimer: यह कैलकुलेशन 12% सालाना अनुमानित रिटर्न के आधार पर केवल समझाने के उद्देश्य से है। म्यूचुअल फंड निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है और रिटर्न की कोई गारंटी नहीं होती। निवेश से पहले योजना से जुड़े दस्तावेजों को ध्यान से पढ़ें और आवश्यकता होने पर वित्तीय सलाहकार से सलाह लें।


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Aakash Sharma
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आकाश शर्मा मध्यप्रदेश के नीमच क्षेत्र में सक्रिय पत्रकार और द टाइम्स ऑफ MP के संपादक हैं। उन्हें प्रिंट मीडिया में 12 वर्षों का पत्रकारिता अनुभव है। लंबे समय से स्थानीय एवं जनसरोकार से जुड़े मुद्दों की रिपोर्टिंग, समाचार संपादन और समाचार प्रकाशन के क्षेत्र में सक्रिय रहते हुए उन्होंने स्थानीय पत्रकारिता में व्यापक अनुभव हासिल किया है।द टाइम्स ऑफ MP के माध्यम से आकाश शर्मा नीमच, मंदसौर और आसपास के क्षेत्रों से जुड़ी महत्वपूर्ण खबरों को पाठकों तक पहुंचाने का कार्य करते हैं। उनकी कवरेज में स्थानीय प्रशासन, पुलिस एवं कानून-व्यवस्था, जनसमस्याएं, नागरिक सुविधाएं, राजनीति, सामाजिक गतिविधियां, शिक्षा, कृषि, व्यापार और अन्य जनहित से जुड़े विषय शामिल हैं।उनकी संपादकीय कार्यशैली में तथ्यपरक रिपोर्टिंग, स्रोत-आधारित जानकारी, निष्पक्ष प्रस्तुति और जिम्मेदार पत्रकारिता को प्राथमिकता दी जाती है। संवेदनशील और अपराध से जुड़े मामलों की रिपोर्टिंग में आरोप और प्रमाणित तथ्य के बीच अंतर बनाए रखने तथा उपलब्ध आधिकारिक एवं विश्वसनीय स्रोतों के आधार पर खबर प्रस्तुत करने पर विशेष ध्यान दिया जाता है।पत्रकारिता के साथ आकाश शर्मा पिछले 4 वर्षों से पैरा लीगल वॉलंटियर (PLV) के रूप में भी कार्य कर रहे हैं। इस भूमिका में वे कानूनी जागरूकता और जनहित से जुड़े कार्यों से जुड़े रहे हैं। इसके साथ ही वे इंटरनेशनल ह्यूमन सिक्योरिटी ऑर्गनाइजेशन में जिला उपाध्यक्ष (District Vice President) के दायित्व का निर्वहन कर रहे हैं।अनुभव 12 वर्ष — प्रिंट मीडिया एवं पत्रकारिता का अनुभव 4 वर्ष — पैरा लीगल वॉलंटियर (PLV) के रूप में अनुभव संपादक — द टाइम्स ऑफ MP जिला उपाध्यक्ष — इंटरनेशनल ह्यूमन सिक्योरिटी ऑर्गनाइजेशनआकाश शर्मा का उद्देश्य स्थानीय स्तर की महत्वपूर्ण सूचनाओं को विश्वसनीय, स्पष्ट, तथ्यपरक और जिम्मेदार पत्रकारिता के माध्यम से पाठकों तक पहुंचाना तथा आम नागरिकों से जुड़े मुद्दों को प्रभावी मंच प्रदान करना है।विशेषज्ञता: स्थानीय पत्रकारिता | प्रिंट मीडिया | समाचार संपादन | डिजिटल पत्रकारिता | स्थानीय समाचार रिपोर्टिंग | जनहित के मुद्दे | कानूनी जागरूकता |

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