दमोह। मध्य प्रदेश के दमोह जिले के हटा क्षेत्र में स्कूल के लंच ब्रेक के दौरान दो बच्चों की पानी से भरे गड्ढे में डूबने से मौत हो गई। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, दोनों बच्चे खेलते हुए स्कूल के सामने बने करीब 15 फीट गहरे पानी से भरे गड्ढे के पास पहुंच गए थे। घटना के बाद ग्रामीणों में शोक के साथ गड्ढे के आसपास सुरक्षा इंतजाम को लेकर नाराजगी है।
दमोह स्कूल हादसा उस समय हुआ, जब बच्चे स्कूल में पढ़ने गए थे और लंच ब्रेक चल रहा था। हादसे में जान गंवाने वाले बच्चों की उम्र 10 और 11 वर्ष बताई गई है। इनमें एक बच्चा कक्षा पांचवीं और दूसरा कक्षा छठवीं में पढ़ता था। नाबालिग होने के कारण यहां दोनों बच्चों की पहचान सार्वजनिक नहीं की जा रही है। लंच ब्रेक में दोनों बच्चे खेलते-खेलते स्कूल के सामने स्थित पानी से भरे गड्ढे के पास पहुंच गए। इसी दौरान दोनों उसमें डूब गए। अन्य बच्चों ने घटना देखी तो शोर मचाया, जिसके बाद आसपास मौजूद ग्रामीण मौके पर पहुंचे।
ग्रामीणों ने निकाला बाहर, अस्पताल में मृत घोषित
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, घटना की जानकारी मिलते ही ग्रामीणों ने दोनों बच्चों को पानी से बाहर निकाला। इसके बाद उन्हें हटा सिविल अस्पताल ले जाया गया, लेकिन वहां डॉक्टरों ने दोनों को मृत घोषित कर दिया। अस्पताल में बच्चों के शव पहुंचने के बाद परिजनों में मातम छा गया। दोनों परिवारों के लिए स्कूल का सामान्य दिन ऐसी घटना में बदल गया, जिसकी उन्होंने कल्पना भी नहीं की थी। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, शाम को दोनों बच्चों का अंतिम संस्कार किया गया।
दमोह स्कूल हादसा सामने आने के बाद स्कूल के ठीक सामने बताए जा रहे गहरे गड्ढे और वहां मौजूद सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सवाल उठने लगे हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि गड्ढे के आसपास न बैरिकेडिंग थी और न ही खतरे से आगाह करने वाला कोई चेतावनी बोर्ड लगाया गया था।
करीब दो साल पुराने गड्ढे को लेकर ग्रामीणों का आरोप
ग्रामीणों का दावा है कि जिस पानी भरे गड्ढे में दोनों बच्चे डूबे, वह करीब दो वर्ष पहले पेट्रोल पंप निर्माण के लिए खोदा गया था। आरोप है कि निर्माण कार्य अधूरा छोड़ दिए जाने के कारण गड्ढा खुला पड़ा रहा और बरसात में उसमें पानी भर गया। ग्रामीणों के मुताबिक, गड्ढा करीब 15 फीट गहरा है। उनका आरोप है कि इतना गहरा गड्ढा होने और उसमें पानी भरने के बावजूद वहां बैरिकेडिंग नहीं की गई। साथ ही कोई चेतावनी बोर्ड भी नहीं लगाया गया, जिससे वहां पहुंचने वाले लोगों को खतरे का संकेत मिल सके।
स्कूल के सामने खतरा था तो सुरक्षा इंतजाम क्यों नहीं?
इस दमोह स्कूल हादसे के बाद सबसे अहम सवाल गड्ढे की जिम्मेदारी और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर है। ग्रामीणों के दावे के मुताबिक गड्ढा करीब दो साल से मौजूद था और स्कूल के सामने स्थित था। ऐसे में यह जांच का विषय है कि इसकी देखरेख और सुरक्षा की जिम्मेदारी किसकी थी।यह भी जांच के बाद ही स्पष्ट होगा कि गड्ढा किस जमीन पर स्थित है, पेट्रोल पंप निर्माण के लिए इसे किसके द्वारा खोदा गया था और निर्माण कार्य अधूरा रहने के बाद सुरक्षा के लिए क्या कदम उठाए गए थे।
ग्रामीणों की नाराजगी मुख्य रूप से इस बात को लेकर है कि पानी से भरा गहरा गड्ढा बच्चों की आवाजाही वाले क्षेत्र में मौजूद होने के बावजूद सुरक्षित क्यों नहीं किया गया। घटना के बाद यह सवाल अब पुलिस जांच के दायरे में भी महत्वपूर्ण हो सकता है।
पुलिस ने मर्ग कायम कर शुरू की जांच
पुलिस ने दोनों बच्चों की मौत के मामले में मर्ग कायम कर जांच शुरू कर दी है। जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि गड्ढे की जिम्मेदारी किसकी थी और सुरक्षा मानकों को लेकर किसी स्तर पर लापरवाही हुई थी या नहीं। परिजनों ने जिम्मेदार पाए जाने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है। इसके साथ ही भविष्य में इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए आवश्यक सुरक्षा इंतजाम किए जाने की मांग भी की गई है।
दमोह स्कूल हादसा दो परिवारों के लिए गहरा दुख लेकर आया है। वहीं, घटना ने स्कूल के आसपास मौजूद खुले और पानी से भरे गड्ढों जैसे संभावित खतरों की सुरक्षा को लेकर भी गंभीर सवाल खड़े किए हैं। फिलहाल पुलिस जांच जारी है और जिम्मेदारी को लेकर स्थिति जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।
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