नीमच | नीमच जिले के सिंगोली क्षेत्र के कन्हैयालाल भील हत्याकांड में करीब पांच साल बाद विशेष अदालत ने फैसला सुनाया है। कोर्ट ने आरोपी छीतर गुर्जर, निवासी ग्राम पाटन, को हत्या का दोषी मानते हुए उम्रकैद और 1,000 रुपए जुर्माने की सजा सुनाई। वहीं, मामले के 7 अन्य आरोपियों को सबूतों की कमी के चलते बरी कर दिया गया।
मामला 26 अगस्त 2021 की सुबह का है। ग्राम बाणदा निवासी काना उर्फ कन्हैयालाल भील अपने साथी गोविंद के साथ बाइक से अपनी लापता पत्नी की तलाश में निकले थे। सिंगोली-नीमच रोड पर अथवाकलां फंटे के पास दोनों आने-जाने वाले वाहनों को रोककर पूछताछ कर रहे थे।
टक्कर के बाद शुरू हुआ पूरा घटनाक्रम
इसी दौरान आरोपी छीतर गुर्जर ने तेज रफ्तार बाइक से कन्हैयालाल को टक्कर मार दी। इससे कन्हैयालाल सड़क पर गिर गए और उनके सिर में गंभीर चोट आई। इसके बाद उनके साथ मारपीट किए जाने की बात सामने आई। घटना के दौरान कन्हैयालाल के साथ मौजूद गोविंद डर के कारण मौके से भाग गया। पुलिस जांच के अनुसार, इसके बाद कन्हैयालाल को रस्सी से बांधकर एक पिकअप वाहन के पीछे घसीटा गया। इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद मामले को लेकर काफी बवाल हुआ था।
वायरल वीडियो के बाद बढ़ी थी चर्चा
पुलिस जांच में सामने आए घटनाक्रम के मुताबिक, पिकअप के पीछे घसीटे जाने के बाद कन्हैयालाल को उपचार के लिए अस्पताल ले जाया गया। इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई।सरकार ने इस घटना को ‘जघन्य अपराध’ की श्रेणी में रखा था। इसके बाद पुलिस ने मामले की जांच करते हुए विभिन्न साक्ष्य जुटाए और उन्हें अदालत के सामने प्रस्तुत किया।
कन्हैयालाल भील हत्याकांड की सुनवाई के दौरान पिकअप वाहन, मोबाइल और चश्मदीदों के बयान को महत्वपूर्ण साक्ष्य के रूप में रखा गया। इसके साथ ही पुलिस की ओर से जुटाए गए फॉरेंसिक और डॉक्टरों से संबंधित साक्ष्य भी अदालत के सामने प्रस्तुत किए गए।
कोर्ट में इन सबूतों पर टिका फैसला
विशेष लोक अभियोजक कीर्ति शर्मा और अशोक कुमार सोनी ने मामले में पैरवी की। अभियोजन पक्ष ने पुलिस जांच में जुटाए गए साक्ष्यों के आधार पर अपना पक्ष रखा। विशेष न्यायाधीश आलोक कुमार सक्सेना की अदालत ने मामले में उपलब्ध साक्ष्यों पर विचार करने के बाद छीतर गुर्जर को हत्या का दोषी माना। कोर्ट ने उसे उम्रकैद और 1,000 रुपए जुर्माने की सजा सुनाई। वहीं, मामले में शामिल 7 अन्य आरोपियों के खिलाफ पर्याप्त सबूत नहीं मिलने के कारण अदालत ने उन्हें बरी कर दिया।
पांच साल बाद आया फैसला
26 अगस्त 2021 को हुई इस घटना के बाद मामला न्यायिक प्रक्रिया में था। अब करीब पांच साल बाद आए फैसले में एक आरोपी को उम्रकैद मिली है, जबकि सात अन्य आरोपी बरी हो गए। इस तरह कन्हैयालाल भील हत्याकांड में अदालत ने उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर मुख्य आरोपी छीतर गुर्जर को दोषी ठहराया है। वहीं, अन्य 7 आरोपियों को सबूतों के अभाव में बरी किया ।
मामले की मुख्य बातें
- घटना: 26 अगस्त 2021
- स्थान: अथवाकलां फंटे, सिंगोली-नीमच रोड
- मृतक: काना उर्फ कन्हैयालाल भील
- दोषी ठहराया गया आरोपी: छीतर गुर्जर
- सजा: उम्रकैद और 1,000 रुपए जुर्माना
- अन्य आरोपी: 7 बरी
- प्रमुख साक्ष्य: पिकअप, मोबाइल, चश्मदीदों के बयान, फॉरेंसिक और चिकित्सकीय साक्ष्य
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