फोन की घंटी और नोटिफिकेशन से मिलेगा छुटकारा? भारत के इन साइलेंट टूरिस्ट स्पॉट्स का जानिए राज
Reported by: अमित शर्मा | Edited by: आकाश शर्मा
02 सितम्बर 2026, (अपडेटेड 02 सितम्बर 2026, 2:59 अपराह्न IST)

ट्रैवल डेस्क | रील्स, लगातार आने वाले नोटिफिकेशन और फोन की स्क्रीन से कुछ समय के लिए दूरी बनाना चाहते हैं तो भारत के कुछ साइलेंट टूरिस्ट स्पॉट आपके लिए अलग तरह का ट्रैवल एक्सपीरियंस दे सकते हैं। इन जगहों पर कई इलाकों में मोबाइल कनेक्टिविटी सीमित बताई जाती है, जिससे यात्रा के दौरान फोन से दूरी बनाकर प्रकृति और आसपास के माहौल पर ध्यान देना आसान हो सकता है।

आज घूमने के लिए लोग केवल ऐसी जगहें नहीं तलाश रहे हैं जहां खूबसूरत नजारे और कम भीड़ हो। अब ऐसे पर्यटन स्थलों की तलाश भी बढ़ रही है जहां कुछ समय के लिए लगातार बजते फोन, स्क्रीन टाइम और सोशल मीडिया नोटिफिकेशन से ब्रेक लिया जा सके। इसी वजह से डिजिटल डिटॉक्स ट्रैवल का विचार चर्चा में है। भारत में हिमाचल प्रदेश से लेकर अरुणाचल प्रदेश और उत्तराखंड तक कई ऐसे इलाके हैं जहां प्राकृतिक वातावरण के साथ सीमित मोबाइल कनेक्टिविटी का अनुभव मिल सकता है। आइए जानते हैं ऐसे चार साइलेंट टूरिस्ट स्पॉट के बारे में।

तीर्थन वैली: पहाड़ों के बीच फोन से दूरी

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हिमाचल प्रदेश की तीर्थन वैली उन यात्रियों के लिए विकल्प हो सकती है जो शिमला और मनाली जैसे व्यस्त पर्यटन स्थलों से अलग शांत माहौल में समय बिताना चाहते हैं। यहां के गांवों में घूमने और प्राकृतिक वातावरण को करीब से देखने का अलग अनुभव मिलता है। तीर्थन वैली के कई हिस्सों में मोबाइल कनेक्टिविटी सीमित रहती है। ऐसे में यहां यात्रा के दौरान फोन का इस्तेमाल कम करके आसपास के गांवों, पहाड़ों और प्राकृतिक वातावरण पर ध्यान दिया जा सकता है।

तीर्थन वैली के लिए सितंबर से नवंबर का समय बेहतर बताया गया है। तीन दिन की यात्रा के लिए भी इसे एक विकल्प के तौर पर बताया गया है। यानी अगर आपका मकसद ऐसी जगह तलाशना है जहां लगातार नोटिफिकेशन के बजाय प्रकृति आपका ध्यान खींचे, तो तीर्थन वैली आपकी ट्रैवल लिस्ट में शामिल हो सकती है।

जीरो वैली: जहां गांव और प्रकृति बनेंगे आपका स्क्रीन टाइम

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अरुणाचल प्रदेश की जीरो वैली अपनी प्राकृतिक खूबसूरती और स्थानीय जीवनशैली के लिए जानी जाती है। यहां पहुंचने के बाद मोबाइल से दूरी बनाकर गांवों और आसपास के प्राकृतिक वातावरण को करीब से देखने का मौका मिल सकता है। जीरो वैली में धान के खेतों के बीच वॉक करना और स्थानीय जीवनशैली को देखना यात्रा का हिस्सा बनाया जा सकता है। उपलब्ध जानकारी में टैली वैली वाइल्डलाइफ सैंचुरी का भी उल्लेख किया गया है।

यहां आसपास के पहाड़ों का प्राकृतिक दृश्य भी आकर्षण का हिस्सा है। ऐसे यात्रियों के लिए यह जगह दिलचस्प हो सकती है जो ट्रिप के दौरान सोशल मीडिया स्क्रॉल करने के बजाय आसपास की दुनिया को देखने और महसूस करने पर ध्यान देना चाहते हैं।

चोपता: नेटवर्क कम, लेकिन नजारे भरपूर

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उत्तराखंड का चोपता भी इस सूची में शामिल है। यह जगह प्राकृतिक सुंदरता के साथ तुंगनाथ मंदिर और चंद्रशिला ट्रेक के लिए जानी जाती है। बड़े शहरों की तरह यहां हर समय जाम, बाजार, मॉल और लगातार बजते मोबाइल फोन का माहौल नहीं मिलता।  चोपता के कुछ इलाकों में मोबाइल कनेक्टिविटी काफी कम रहती है।

यही वजह है कि चोपता को डिजिटल डिटॉक्स के लिए संभावित विकल्प माना जा सकता है। यहां यात्रा के दौरान मोबाइल स्क्रीन पर समय बिताने के बजाय पहाड़ी वातावरण, ट्रेक और आसपास के प्राकृतिक नजारों पर ध्यान दिया जा सकता है। हालांकि, मोबाइल नेटवर्क की उपलब्धता अलग-अलग स्थानों पर बदल सकती है। इसलिए यात्रा से पहले जरूरी संपर्क और अन्य महत्वपूर्ण जानकारी अपने पास ऑफलाइन रखना बेहतर रहेगा।

स्पीति वैली: ऊंचे पहाड़ों के बीच डिजिटल दुनिया से दूरी

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हिमाचल प्रदेश की स्पीति वैली अपनी अलग भौगोलिक और प्राकृतिक पहचान के लिए जानी जाती है। यह ऊंचाई पर मौजूद ठंडा रेगिस्तानी इलाका है, जहां पहाड़ों, गांवों, मोनेस्ट्रीज और प्राकृतिक नजारों का अनुभव मिलता है। स्पीति वैली को ऐसे पर्यटन स्थल के रूप में देखा जा सकता है जहां शहरों की भागदौड़ से काफी अलग वातावरण मिलता है। यात्रा के दौरान फोन और सोशल मीडिया से दूरी बनाकर आसपास के गांवों और पहाड़ी क्षेत्र को एक्सप्लोर किया जा सकता है।  स्पीति वैली की यात्रा के लिए सितंबर से नवंबर का समय बेहतर बताया गया है। ऐसे में सितंबर में ट्रैवल प्लान कर रहे लोगों के लिए यह जगह विकल्प हो सकती है।

क्यों खास बन रहे हैं साइलेंट टूरिस्ट स्पॉट?

ट्रैवल का मतलब अब केवल प्रसिद्ध पर्यटन स्थलों पर जाना नहीं रह गया है। कई लोग अब ऐसी जगहों की तलाश कर रहे हैं जहां कम भीड़, प्राकृतिक वातावरण और सीमित मोबाइल कनेक्टिविटी के बीच कुछ समय शांति से बिताया जा सके। साइलेंट टूरिस्ट स्पॉट इसी तरह के अनुभव का विकल्प देते हैं। यहां मोबाइल नेटवर्क सीमित होने की स्थिति में फोन का इस्तेमाल अपने आप कम हो सकता है और यात्री प्रकृति, स्थानीय जीवन और यात्रा के वास्तविक अनुभव पर ज्यादा ध्यान दे सकता है।

इसे एक तरह के डिजिटल ब्रेक के तौर पर देखा जा सकता है। हालांकि, यह किसी चिकित्सकीय उपचार का विकल्प नहीं है। यहां इस्तेमाल किया गया ‘ट्रैवल थेरेपी’ शब्द यात्रा के दौरान स्क्रीन और डिजिटल नोटिफिकेशन से ब्रेक लेने के संदर्भ में है।

यात्रा से पहले इन बातों का रखें ध्यान

अगर आप किसी साइलेंट टूरिस्ट स्पॉट की यात्रा का प्लान बना रहे हैं तो सीमित मोबाइल नेटवर्क को ध्यान में रखना जरूरी है। यात्रा से पहले होटल या ठहरने की जगह, जरूरी फोन नंबर, रूट और अन्य महत्वपूर्ण जानकारी ऑफलाइन सेव कर लेना उपयोगी हो सकता है। इसके अलावा, किसी भी स्थान पर वास्तविक नेटवर्क उपलब्धता मौसम, क्षेत्र और स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार अलग हो सकती है। इसलिए यात्रा से पहले स्थानीय स्तर पर वर्तमान स्थिति की पुष्टि करना बेहतर रहेगा।

तीर्थन वैली, जीरो वैली, चोपता और स्पीति वैली—चारों जगहें अपने-अपने तरीके से प्रकृति और शांति का अनुभव देने वाले विकल्प हो सकती हैं। लेकिन इनकी सबसे खास बात यही है कि कुछ हिस्सों में मोबाइल कनेक्टिविटी सीमित होने के कारण यात्रियों को फोन से कुछ समय दूर रहने का मौका मिल सकता है।


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Aakash Sharma
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आकाश शर्मा मध्यप्रदेश के नीमच क्षेत्र में सक्रिय पत्रकार और द टाइम्स ऑफ MP के संपादक हैं। उन्हें प्रिंट मीडिया में 12 वर्षों का पत्रकारिता अनुभव है। लंबे समय से स्थानीय एवं जनसरोकार से जुड़े मुद्दों की रिपोर्टिंग, समाचार संपादन और समाचार प्रकाशन के क्षेत्र में सक्रिय रहते हुए उन्होंने स्थानीय पत्रकारिता में व्यापक अनुभव हासिल किया है।द टाइम्स ऑफ MP के माध्यम से आकाश शर्मा नीमच, मंदसौर और आसपास के क्षेत्रों से जुड़ी महत्वपूर्ण खबरों को पाठकों तक पहुंचाने का कार्य करते हैं। उनकी कवरेज में स्थानीय प्रशासन, पुलिस एवं कानून-व्यवस्था, जनसमस्याएं, नागरिक सुविधाएं, राजनीति, सामाजिक गतिविधियां, शिक्षा, कृषि, व्यापार और अन्य जनहित से जुड़े विषय शामिल हैं।उनकी संपादकीय कार्यशैली में तथ्यपरक रिपोर्टिंग, स्रोत-आधारित जानकारी, निष्पक्ष प्रस्तुति और जिम्मेदार पत्रकारिता को प्राथमिकता दी जाती है। संवेदनशील और अपराध से जुड़े मामलों की रिपोर्टिंग में आरोप और प्रमाणित तथ्य के बीच अंतर बनाए रखने तथा उपलब्ध आधिकारिक एवं विश्वसनीय स्रोतों के आधार पर खबर प्रस्तुत करने पर विशेष ध्यान दिया जाता है।पत्रकारिता के साथ आकाश शर्मा पिछले 4 वर्षों से पैरा लीगल वॉलंटियर (PLV) के रूप में भी कार्य कर रहे हैं। इस भूमिका में वे कानूनी जागरूकता और जनहित से जुड़े कार्यों से जुड़े रहे हैं। इसके साथ ही वे इंटरनेशनल ह्यूमन सिक्योरिटी ऑर्गनाइजेशन में जिला उपाध्यक्ष (District Vice President) के दायित्व का निर्वहन कर रहे हैं।अनुभव 12 वर्ष — प्रिंट मीडिया एवं पत्रकारिता का अनुभव 4 वर्ष — पैरा लीगल वॉलंटियर (PLV) के रूप में अनुभव संपादक — द टाइम्स ऑफ MP जिला उपाध्यक्ष — इंटरनेशनल ह्यूमन सिक्योरिटी ऑर्गनाइजेशनआकाश शर्मा का उद्देश्य स्थानीय स्तर की महत्वपूर्ण सूचनाओं को विश्वसनीय, स्पष्ट, तथ्यपरक और जिम्मेदार पत्रकारिता के माध्यम से पाठकों तक पहुंचाना तथा आम नागरिकों से जुड़े मुद्दों को प्रभावी मंच प्रदान करना है।विशेषज्ञता: स्थानीय पत्रकारिता | प्रिंट मीडिया | समाचार संपादन | डिजिटल पत्रकारिता | स्थानीय समाचार रिपोर्टिंग | जनहित के मुद्दे | कानूनी जागरूकता |

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