मध्य प्रदेश | मध्य प्रदेश लोक निर्माण विभाग (PWD) ने टेंडर प्रक्रिया में अधिकारियों की जवाबदेही तय करने के लिए नई व्यवस्था लागू की है। MP PWD टेंडर गड़बड़ी मिलने पर अब केवल संबंधित ठेकेदार के खिलाफ कार्रवाई तक मामला सीमित नहीं रहेगा, बल्कि तकनीकी और वित्तीय जांच करने वाली समितियों के अधिकारियों की भूमिका भी जांची जाएगी।
विभाग की नई व्यवस्था के तहत टेंडर प्रक्रिया को तकनीकी और वित्तीय स्तर पर जांचा जाएगा। किसी स्तर पर चूक या गड़बड़ी सामने आने पर संबंधित समिति और अधिकारियों की जिम्मेदारी तय की जा सकती है। बड़े टेंडर के लिए अतिरिक्त परीक्षण की व्यवस्था भी की गई है।
अब सिर्फ ठेकेदार की जिम्मेदारी नहीं
PWD से जुड़े सड़क और भवन निर्माण कार्यों में टेंडर प्रक्रिया महत्वपूर्ण चरण होती है। इसी प्रक्रिया के आधार पर निर्माण कार्य के लिए संबंधित फर्म या ठेकेदार का चयन किया जाता है।
नई व्यवस्था में विभाग ने टेंडर प्रक्रिया के अलग-अलग चरणों में जिम्मेदारी स्पष्ट करने पर जोर दिया है। इसका मतलब यह है कि यदि किसी टेंडर की तकनीकी या वित्तीय जांच के दौरान गंभीर चूक होती है और बाद में गड़बड़ी सामने आती है, तो संबंधित स्तर पर अधिकारियों की भूमिका की भी समीक्षा की जाएगी। इस बदलाव के बाद MP PWD टेंडर गड़बड़ी के मामलों में जिम्मेदारी तय करने का दायरा पहले की तुलना में व्यापक होगा।
दो स्तरों पर होगी टेंडर की जांच
विभाग की नई व्यवस्था में टेंडर की जांच मुख्य रूप से दो स्तरों पर होगी। पहला स्तर तकनीकी जांच का होगा, जिसमें टेंडर की शर्तों, दस्तावेजों और निर्धारित तकनीकी मापदंडों का परीक्षण किया जाएगा। दूसरा स्तर वित्तीय मूल्यांकन का होगा, जिसमें वित्तीय प्रस्ताव और दरों की जांच की जाएगी। इस व्यवस्था में दोनों स्तरों पर काम करने वाली समितियों की जिम्मेदारी अलग-अलग निर्धारित की गई है। यदि किसी स्तर पर जांच में चूक सामने आती है, तो संबंधित समिति की भूमिका की जांच की जा सकेगी।
तकनीकी समिति की होगी अहम भूमिका
टेंडर प्रक्रिया के पहले चरण में विभागीय तकनीकी समीक्षा समिति काम करेगी। यह समिति निविदा से जुड़े तकनीकी पहलुओं का परीक्षण करेगी। टेंडर में शामिल दस्तावेज, पात्रता और निर्धारित तकनीकी शर्तों की जांच इस स्तर पर की जाएगी। यदि किसी तकनीकी कमी की पहचान नहीं हो पाती और बाद में उसी से जुड़ी गड़बड़ी सामने आती है, तो यह देखा जाएगा कि जांच के दौरान संबंधित समिति ने निर्धारित प्रक्रिया का पालन किया था या नहीं।
इससे तकनीकी परीक्षण करने वाले अधिकारियों की जिम्मेदारी भी स्पष्ट होगी।
इसके बाद वित्तीय मूल्यांकन
तकनीकी परीक्षण पूरा होने के बाद पात्र टेंडर वित्तीय मूल्यांकन के चरण में जाएंगे। यहां संबंधित समिति वित्तीय प्रस्तावों और दरों का परीक्षण करेगी। वित्तीय मूल्यांकन में पारदर्शिता बनाए रखना इस चरण की प्रमुख जिम्मेदारी होगी। यदि MP PWD टेंडर गड़बड़ी किसी वित्तीय मूल्यांकन से जुड़ी पाई जाती है, तो संबंधित समिति और अधिकारियों की भूमिका भी जांच के दायरे में आ सकती है। इस व्यवस्था से तकनीकी और वित्तीय दोनों स्तरों पर जवाबदेही अलग-अलग तय होगी।
बड़े टेंडर में एक और जांच
बड़े टेंडर के मामले में विभाग ने अतिरिक्त परीक्षण की व्यवस्था भी रखी है। ऐसे टेंडर सीधे राज्य स्तरीय निविदा निरूपण समिति के पास नहीं भेजे जाएंगे। पहले विभागाध्यक्ष स्तर पर गठित परीक्षण समिति द्वारा फाइल की जांच की जाएगी। इस स्तर पर वित्तीय शुद्धता और उपलब्ध तथ्यों की पुष्टि की जाएगी। जांच और संतुष्टि की प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही फाइल अंतिम मंजूरी के लिए आगे भेजी जाएगी। इस अतिरिक्त जांच का उद्देश्य बड़े टेंडर में प्रक्रिया को और अधिक व्यवस्थित करना है।
किन अधिकारियों को दिए गए निर्देश?
विभाग की ओर से प्रमुख अभियंताओं को नई व्यवस्था के संबंध में निर्देश जारी किए गए हैं। इसके साथ ही मध्य प्रदेश सड़क विकास निगम और मध्य प्रदेश भवन विकास निगम के अधिकारियों को भी निर्देश भेजे गए हैं। इन विभागों और निगमों को नई जवाबदेही व्यवस्था के अनुरूप टेंडर प्रक्रिया पूरी करनी होगी। संबंधित अधिकारियों को अपने-अपने स्तर पर निर्धारित जांच और परीक्षण की जिम्मेदारी निभानी होगी।
क्यों महत्वपूर्ण है यह बदलाव?
सरकारी सड़क और भवन निर्माण के कार्य सार्वजनिक धन से जुड़े होते हैं। ऐसे में टेंडर प्रक्रिया में तकनीकी और वित्तीय जांच की भूमिका महत्वपूर्ण होती है। यदि किसी स्तर पर आवश्यक जांच नहीं होती या प्रक्रिया में चूक रह जाती है, तो उसका असर आगे होने वाले सरकारी निर्माण कार्य पर पड़ सकता है। इसी वजह से MP PWD टेंडर गड़बड़ी से जुड़े मामलों में अब प्रक्रिया के प्रत्येक स्तर की जवाबदेही स्पष्ट करने की व्यवस्था की गई है।
नई व्यवस्था का अर्थ यह नहीं है कि किसी अधिकारी को केवल टेंडर प्रक्रिया से जुड़े होने के कारण दोषी माना जाएगा। किसी अधिकारी की जिम्मेदारी या लापरवाही जांच में सामने आने वाले तथ्यों और संबंधित प्रक्रिया के आधार पर ही तय होगी।
अब पूरी प्रक्रिया में किसकी क्या जिम्मेदारी?
नई व्यवस्था को आसान भाषा में इस तरह समझा जा सकता है—
- टेंडर प्राप्त होने के बाद तकनीकी जांच होगी।
- तकनीकी समिति दस्तावेज और निर्धारित मापदंडों का परीक्षण करेगी।
- तकनीकी रूप से पात्र टेंडर वित्तीय मूल्यांकन के लिए जाएंगे।
- वित्तीय समिति प्रस्ताव और दरों की जांच करेगी।
- बड़े टेंडर में विभागाध्यक्ष स्तर पर अतिरिक्त परीक्षण होगा।
- किसी स्तर पर चूक या गड़बड़ी मिलने पर संबंधित जिम्मेदारी की जांच होगी।
- आवश्यक परीक्षण पूरा होने के बाद फाइल अंतिम मंजूरी के लिए आगे बढ़ेगी।
ठेकेदार और अफसर दोनों की भूमिका पर जोर
MP PWD टेंडर गड़बड़ी को लेकर लागू की गई इस व्यवस्था में सबसे महत्वपूर्ण बदलाव जवाबदेही के स्तर को लेकर है। अब टेंडर प्रक्रिया में शामिल समितियों की भूमिका भी स्पष्ट रूप से दर्ज होगी। इसका उद्देश्य टेंडर प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी बनाना और यह सुनिश्चित करना है कि तकनीकी तथा वित्तीय परीक्षण केवल औपचारिक प्रक्रिया न रह जाए।
विभाग द्वारा जारी निर्देशों के अनुसार प्रत्येक स्तर पर संबंधित समिति को अपनी जिम्मेदारी के अनुरूप जांच करनी होगी। किसी मामले में वास्तविक गड़बड़ी या लापरवाही सामने आने पर उसी के आधार पर आगे की कार्रवाई तय की जाएगी।
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