बलिदान को सम्मान दिलाने उतरा समाज: Kanchan Devi Meghwal के परिवार के लिए 1 करोड़ और सरकारी नौकरी की उठी मांग

Kanchan Devi Meghwal

Kanchan Devi Meghwal

नीमच (MP Neemuch News): मध्य प्रदेश के नीमच जिले में मानवता और वीरता की एक ऐसी मिसाल सामने आई, जिसने पूरे प्रदेश को भावुक कर दिया। लेकिन आज वही भावनाएं आक्रोश में बदल चुकी हैं। Kanchan Devi Meghwal, एक ऐसा नाम जिसने अपनी ड्यूटी निभाते हुए और मासूमों की जान बचाते हुए मौत को गले लगा लिया, आज उनके सम्मान और परिवार के हक के लिए पूरा मेघवाल समाज सड़कों पर है। शुक्रवार को नीमच कलेक्ट्रेट परिसर में हुआ प्रदर्शन महज एक भीड़ नहीं, बल्कि प्रशासनिक संवेदनहीनता के खिलाफ एक शंखनाद था।

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वीरता की वह खौफनाक दास्तां

घटना 2 फरवरी की है, जिसने रामपुरा क्षेत्र के आंगनवाड़ी केंद्र को हिलाकर रख दिया था। दोपहर का समय था, बच्चे खेल और पढ़ाई में व्यस्त थे, तभी अचानक कहीं से मधुमक्खियों का एक विशाल झुंड केंद्र पर हमलावर हो गया। चीख-पुकार के बीच, वहां तैनात आंगनवाड़ी कार्यकर्ता Kanchan Devi Meghwal ने एक पल की भी देरी नहीं की। उन्होंने अपनी सुरक्षा की चिंता किए बिना सभी 20 बच्चों को सुरक्षित कमरे के अंदर धकेला और दरवाजा बंद कर दिया।

इस प्रक्रिया में Kanchan Devi Meghwal खुद उन जहरीली मधुमक्खियों का शिकार बन गईं। सैकड़ों डंक सहने के बावजूद उन्होंने तब तक हिम्मत नहीं हारी जब तक कि आखिरी बच्चा सुरक्षित नहीं हो गया। गंभीर हालत में उन्हें अस्पताल भर्ती कराया गया, जहां संघर्ष करते हुए उन्होंने दम तोड़ दिया। Kanchan Devi Meghwal का यह बलिदान आज हर नीमच वासी की आंखों में आंसू और दिल में सम्मान पैदा कर रहा है।

कलेक्ट्रेट में हंगामे की इनसाइड स्टोरी

शुक्रवार को जब मेघवाल समाज के लोग कलेक्ट्रेट पहुंचे, तो उनकी आंखों में नमी और दिल में गुस्सा था। प्रदर्शनकारियों का नेतृत्व कर रहे प्रतिनिधियों ने आरोप लगाया कि Kanchan Devi Meghwal की मृत्यु के बाद प्रशासन ने केवल खोखले आश्वासन दिए हैं। जब ज्ञापन देने का समय आया, तो कलेक्टर की अनुपस्थिति ने आग में घी डालने का काम किया। अपर कलेक्टर और डिप्टी कलेक्टर जब ज्ञापन लेने आए, तो समाज ने उन्हें स्पष्ट शब्दों में मना कर दिया और कहा कि
जब दुख की घड़ी में जिले का मुखिया साथ नहीं खड़ा हो सकता, तो हम किसी और को अपनी बात क्यों कहें?”

करीब एक घंटे तक चले इस हंगामे ने प्रशासन की नींद उड़ा दी। नारेबाजी के बीच एक ही गूंज थी कि Kanchan Devi Meghwal के परिवार को वह दर्जा मिलना चाहिए, जो एक शहीद सैनिक के परिवार को मिलता है।

5 प्रमुख मांगें: जो सरकार के सामने रखी गईं

Kanchan Devi Meghwal के इस केस को लेकर समाज ने एक मांग पत्र तैयार किया है, जिसमें स्पष्ट किया गया है कि यदि ये मांगें पूरी नहीं हुईं, तो आंदोलन को उग्र किया जाएगा:

  1. आर्थिक संबल: पीड़ित परिवार को तत्काल 1 करोड़ रुपये की विशेष आर्थिक सहायता राशि प्रदान की जाए।

  2. सरकारी नौकरी: परिवार की आर्थिक स्थिति को देखते हुए, Kanchan Devi Meghwal के आश्रित को योग्यता के आधार पर तत्काल सरकारी सेवा में लिया जाए।

  3. वीरता पुरस्कार: मरणोपरांत उन्हें ‘राष्ट्रीय वीरता पुरस्कार’ के लिए भारत सरकार को प्रस्ताव भेजा जाए।

  4. दोषियों पर गाज: इस पूरी घटना में विभाग की क्या लापरवाही रही, इसकी जांच हो और महिला बाल विकास अधिकारी को तत्काल पद से हटाया जाए।

  5. पेंशन और स्वास्थ्य: Kanchan Devi Meghwal के पति, जो लकवे से पीड़ित हैं, उनके आजीवन मुफ्त इलाज और पेंशन की व्यवस्था सरकार करे।

टूटी कमर: परिवार का भविष्य अंधकार में

Kanchan Devi Meghwal के घर की स्थिति किसी का भी कलेजा चीर सकती है। उनके पति बिस्तर पर लाचार हैं और अब बच्चों के सामने न केवल ममता का साया छिन गया है, बल्कि रोटी का संकट भी खड़ा है। Kanchan Devi Meghwal ही उस घर की इकलौती स्तंभ थीं। समाज के लोगों का कहना है कि अगर ऐसी वीरांगना के परिवार को दर-दर की ठोकरें खानी पड़ीं, तो भविष्य में कोई भी कर्मचारी अपनी जान जोखिम में डालकर दूसरों की रक्षा नहीं करेगा।


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