15 दिन में रतनगढ़ पुल में दरारें: बड़ा भ्रष्टाचार उजागर

Ratangarh Bridge

जावद । जावद इलाके से एक बेहद चौंकाने वाली खबर सामने आई है। विकास के नाम पर सरकारी पैसे की कैसे खुलेआम बर्बादी की जाती है, इसकी जीती-जागती मिसाल जावद के रतनगढ़ से गुंजालिया मार्ग पर देखने को मिल रही है। यहां निर्माणाधीन रतनगढ़ पुल (Ratangarh Bridge) महज 15 दिनों में ही अपनी बदहाली की कहानी चीख-चीख कर बयां कर रहा है। करोड़ों की लागत वाले इस प्रोजेक्ट में भ्रष्टाचार की जड़ें इतनी गहरी हैं कि पहली बारिश से पहले ही नवनिर्मित पुलिया में चौड़ी दरारें आ गई हैं और अंदर इस्तेमाल हुआ सरिया बाहर झांकने लगा है।

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रिपेयरिंग का बहाना और घटिया निर्माण की हकीकत

पुलिया पर पहले लोहे के सरियों का जाल बिछाकर सीमेंट कंक्रीट किया गया।

स्थानीय ग्रामीणों का साफ तौर पर आरोप है कि जिम्मेदारों द्वारा “रिपेयरिंग” (मरम्मत) का चोला ओढ़ाकर पूरी तरह से नया निर्माण किया जा रहा है। इसका मकसद सिर्फ एक है—तकनीकी मानकों को दरकिनार कर अपनी जेबें भरना। रतनगढ़ पुल (Ratangarh Bridge)के निर्माण में जिस स्तर की घटिया सामग्री का इस्तेमाल हो रहा है, उसे देखकर कोई भी हैरान रह जाएगा। नियम-कानून ताक पर हैं और ठेकेदार अपनी मनमानी पर उतारू हैं। सड़क और पुलिया के नए बने हिस्से में अभी से गड्ढे स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहे हैं, जो सीधे तौर पर एक बड़े हादसे को न्योता है।

पाइप डालने के नाम पर जेसीबी से तोड़ा गया नया स्ट्रक्चर

पुलिया निर्माण में किस कदर घोर लापरवाही बरती गई है, इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि पहले ठेकेदार ने लोहे के सरियों का जाल बिछाकर धड़ल्ले से सीमेंट कंक्रीट (CC) कर दिया। जब कंक्रीट पूरी तरह सेट हो गया, तो अचानक याद आया कि नीचे से पानी निकासी के लिए दो अतिरिक्त पाइप भी डालने हैं। इसके बाद जो हुआ, वह इंजीनियरिंग के इतिहास का सबसे बड़ा मजाक है।

उसी नए नवेले रतनगढ़ पुल (Ratangarh Bridge) के एक हिस्से पर भारी-भरकम जेसीबी (JCB) मशीन चला दी गई। मशीन की खुदाई के कारण पूरे स्ट्रक्चर में तेज कंपन हुआ, जिससे नए बने हिस्से में गहरी दरारें पड़ गईं। कंक्रीट टूटकर बिखर गया और अंदर का सरिया बाहर निकल आया। स्थानीय लोगों का जायज गुस्सा इस बात पर है कि अगर पाइप डालना ही था, तो यह बुनियादी काम कंक्रीट बिछाने से पहले क्यों नहीं किया गया? यह सीधे तौर पर इंजीनियर और निर्माण एजेंसी की अनुभवहीनता को दर्शाता है।

तकनीकी मानकों की सरेआम उड़ी धज्जियां

सिविल इंजीनियरिंग के बुनियादी नियमों के मुताबिक, किसी भी पुलिया की मजबूती के लिए सरियों का जाल 15 से 20 सेंटीमीटर की निश्चित दूरी पर बिछाया जाना चाहिए। साथ ही, इसे जमीन से थोड़ा ऊपर रखने के लिए एंकरिंग बार (कवर ब्लॉक) का इस्तेमाल अनिवार्य है, ताकि कंक्रीट सरिये को चारो तरफ से अच्छी तरह जकड़ ले।

लेकिन इस रतनगढ़ पुल (Ratangarh Bridge) प्रोजेक्ट में ठेकेदार ने मुनाफा कमाने के चक्कर में सरियों की दूरी बढ़ाकर 40 से 45 सेंटीमीटर कर दी। इतना ही नहीं, बेहद पतले सरिये बिना किसी सपोर्ट के सीधे मिट्टी पर बिछा दिए गए। इसका सीधा नुकसान यह हुआ कि कंक्रीट की सरिये के साथ ग्रिप बिल्कुल नहीं बन पाई है।

सीमेंट और रेत के अनुपात में बड़ा झोल

भ्रष्टाचार की यह दास्तान सिर्फ सरिये तक ही सीमित नहीं है। पुलिया के ऊपर लगभग 30-45 सेंटीमीटर मोटाई का कंक्रीट डाला जा रहा है। नियम कहते हैं कि इसमें सीमेंट, बजरी और रेत का एक निश्चित मानक अनुपात होना चाहिए। लेकिन मौके पर मौजूद क्षेत्रवासियों का दावा है कि लागत बचाने के लिए सीमेंट की मात्रा बेहद कम रखी गई है और घटिया रेत का उपयोग धड़ल्ले से हो रहा है। यही वजह है कि स्ट्रक्चर अपनी मजबूती नहीं ले पा रहा है।

प्रशासन मौन, ग्रामीणों में भारी आक्रोश और कार्रवाई की मांग

यह पुलिया केवल दो गांवों को नहीं जोड़ती, बल्कि रोजाना सैकड़ों किसानों और स्कूली बच्चों के आवागमन का मुख्य साधन है। ऐसे में अगर कोई हादसा होता है, तो इसकी जिम्मेदारी कौन लेगा? स्थानीय लोगों का कहना है कि पिछले चार-पांच महीनों से नगर परिषद की एक भी बैठक आयोजित नहीं हुई है। इस प्रशासनिक शून्यता और अधिकारियों की अनदेखी का पूरा फायदा उठाकर गुणवत्ता से समझौता किया जा रहा है। मॉनिटरिंग व्यवस्था पूरी तरह से ठप है।

क्षेत्रवासियों का स्पष्ट मानना है कि अगर इस रतनगढ़ पुल (Ratangarh Bridge) से एक भारी डंपर भी गुजर गया या इलाके में एक तेज बारिश हो गई, तो यह ताश के पत्तों की तरह ढह जाएगा। ग्रामीणों का धैर्य अब जवाब दे चुका है। उन्होंने जिला प्रशासन से तत्काल प्रभाव से मौके पर पहुंचकर निष्पक्ष ‘तकनीकी जांच’ कराने की सख्त मांग की है। उनकी दो टूक चेतावनी है कि जांच में जो भी इंजीनियर या ठेकेदार दोषी पाया जाए, उसके खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाए, ताकि जनता की जान और सरकारी खजाने से इस तरह का खिलवाड़ दोबारा न हो सके।


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