Leopard Attack: कुकड़ेश्वर के अमेरी गांव में भयंकर तेंदुए का हमला, 70 वर्षीय महिला गंभीर रूप से घायल, ग्रामीणों में आक्रोश

कुकड़ेश्वर न्यूज (दिलीप बोराना) : मध्य प्रदेश के नीमच जिले के कुकड़ेश्वर क्षेत्र से एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है। ग्राम पंचायत सुवासरा खुर्द के अंतर्गत आने वाले अमेरी गांव में शुक्रवार को दिनदहाड़े हुए एक खूंखार तेंदुए का हमला (Leopard Attack) ने पूरे इलाके में दहशत का माहौल पैदा कर दिया है। इस भयानक Leopard Attack में एक 70 वर्षीय बुजुर्ग महिला गंभीर रूप से घायल हो गई हैं। Leopard Attack के बाद से ही पूरे गांव में सन्नाटा और खौफ पसरा हुआ है, वहीं वन विभाग के लचर रवैये ने ग्रामीणों के गुस्से को भड़का दिया है।
खेत में काम करते वक्त मौत से सामना
शुक्रवार की दोपहर अमेरी गांव के निवासियों के लिए रोज़मर्रा की तरह ही थी। नानी बाई (उम्र 70 वर्ष) और उनके पति जयराम अपने खेत में काम कर रहे थे। उन्हें इस बात का बिल्कुल भी अंदाजा नहीं था कि पास ही की झाड़ियों में मौत घात लगाए बैठी है। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, अचानक एक तेंदुआ झाड़ियों से निकला और उसने नानी बाई पर झपट्टा मार दिया।
यह तेंदुए का हमला (Leopard Attack) इतना अप्रत्याशित और तेज़ था कि बुजुर्ग महिला को संभलने या बचाव करने का रत्ती भर भी मौका नहीं मिला। तेंदुए ने अपने नुकीले पंजों और दांतों से महिला के हाथ-पैरों पर गहरे घाव कर दिए। नानी बाई की दर्दनाक चीखें सुनकर आसपास खेतों में काम कर रहे लोग अपनी जान की परवाह किए बिना लाठी-डंडे लेकर दौड़े। ग्रामीणों की भारी भीड़ और शोर-शराबा सुनकर तेंदुआ घबरा गया और जंगल की ओर भाग निकला। खून से लथपथ नानी बाई को आनन-फानन में स्थानीय अस्पताल ले जाया गया, जहाँ उनका इलाज जारी है।
वन विभाग की देरी से भड़का ग्रामीणों का गुस्सा
इस घटना के तुरंत बाद ग्रामीणों ने वन विभाग के अधिकारियों को हमले की सूचना दी। लेकिन ग्रामीणों का आरोप है कि सूचना देने के घंटों बाद भी विभाग का कोई भी कर्मचारी मौके पर नहीं पहुंचा। एक ऐसे समय में जब गांव में एक और तेंदुए का हमला (Leopard Attack) का डर मंडरा रहा था, प्रशासन की इस घोर लापरवाही ने लोगों के सब्र का बांध तोड़ दिया।
इसी बीच, घटना की भनक लगते ही स्थानीय समाजसेवी धीरज नाहटा मौके पर पहुँच गए। उन्होंने दहशत में जी रहे ग्रामीणों को ढांढस बंधाया और वन विभाग के आला अधिकारियों को फोन पर स्थिति की गंभीरता से अवगत कराया। भारी दबाव पड़ने के बाद आखिरकार वन विभाग की टीम हरकत में आई और पिंजरा लेकर अमेरी गांव की ओर रवाना हुई।
आखिर क्यों बस्तियों का रुख कर रहे हैं जंगली जानवर?
अमेरी गांव के बुजुर्गों और पर्यावरण के जानकारों का मानना है कि यह तेंदुए का हमला (Leopard Attack) कोई इत्तेफाक नहीं है, बल्कि इंसानों द्वारा प्रकृति के साथ की जा रही छेड़छाड़ का सीधा नतीजा है। ग्रामीणों ने इस समस्या के पीछे कई गंभीर कारण गिनाए हैं:
जंगल में अतिक्रमण: वन भूमि पर लगातार हो रहे अवैध कब्जे ने वन्यजीवों का प्राकृतिक घर छीन लिया है।
अंधाधुंध पेड़ों की कटाई: पेड़ों की कटाई से जंगल सिकुड़ रहे हैं, जिससे जानवरों के छिपने की जगह खत्म हो रही है।
भोजन और पानी का अकाल: गर्मियों के आते ही जंगलों में पानी के स्रोत सूख जाते हैं। शिकार की कमी और प्यास बुझाने की जद्दोजहद में जंगली जानवर बस्तियों का रुख करने को मजबूर हैं।
प्रशासन से ठोस और स्थायी समाधान की मांग
ग्रामीणों ने प्रशासन के सामने स्पष्ट कर दिया है कि सिर्फ एक पिंजरा लगा देना इस समस्या का स्थायी समाधान नहीं है। वे भविष्य में किसी भी तेंदुए का हमला (Leopard Attack) से बचने के लिए ठोस कदम उठाने की मांग कर रहे हैं। उनकी प्रमुख मांगें इस प्रकार हैं:
जंगल की जमीनों को तुरंत अतिक्रमण मुक्त कराया जाए।
जंगलों के भीतर ही वन्यजीवों के लिए कृत्रिम तालाब और भोजन की व्यवस्था की जाए।
अवैध कटाई करने वाले माफियाओं पर सख्त कानूनी कार्रवाई हो।
घायल महिला के परिवार को उचित आर्थिक सहायता और मुफ्त चिकित्सा प्रदान की जाए।
फिलहाल, अमेरी गांव में खौफ का साया है। लोग अपने घरों से अकेले निकलने में कतरा रहे हैं। वन विभाग की टीम इलाके में गश्त कर रही है, लेकिन जब तक इस नरभक्षी तेंदुए को पकड़ नहीं लिया जाता, तब तक ग्रामीणों की रातों की नींद उड़ी रहेगी। अब देखना यह है कि प्रशासन इस गंभीर तेंदुए का हमला (Leopard Attack) के बाद कोई ठोस कदम उठाता है या फिर यह घटना भी फाइलों में दबकर रह जाएगी।
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