Fodder Ban: चारा-भूसा जिले से बाहर भेजने पर रोक; ईंट भट्टों और उद्योगों में जलाने पर भी प्रतिबंध, 30 जून 2026 तक लागू

नीमच । मध्य प्रदेश के नीमच जिले में पशुओं के लिए चारे की संभावित कमी को देखते हुए जिला प्रशासन ने बड़ा और सख्त कदम उठाया है। कलेक्टर एवं जिला दंडाधिकारी हिमांशु चंद्रा के निर्देश पर जिले में चारा प्रतिबंध (Fodder Ban) लागू कर दिया गया है। यह आदेश तत्काल प्रभाव से लागू हो गया है और 30 जून 2026 तक प्रभावी रहेगा।
प्रशासन के इस फैसले के बाद अब जिले से चारा, भूसा, घास और ज्वार जैसे पशु आहार को बाहर भेजने पर पूरी तरह प्रतिबंध रहेगा। अधिकारियों का कहना है कि चारा प्रतिबंध (Fodder Ban) का मुख्य उद्देश्य जिले में पशुओं के लिए पर्याप्त मात्रा में चारा उपलब्ध कराना है ताकि भविष्य में किसी प्रकार की कमी की स्थिति पैदा न हो।
बिना अनुमति चारा बाहर भेजना होगा अपराध

जिला प्रशासन द्वारा जारी आदेश के अनुसार अब कोई भी किसान, व्यापारी, निर्यातक या व्यक्ति बिना अनुमति के जिले से बाहर चारा या भूसा नहीं भेज सकेगा। यह चारा प्रतिबंध (Fodder Ban) सभी प्रकार के परिवहन साधनों पर लागू होगा।
आदेश में स्पष्ट किया गया है कि मोटर ट्रक, ट्रैक्टर-ट्रॉली, बैलगाड़ी, रेलवे या अन्य किसी भी माध्यम से चारा जिले से बाहर ले जाने के लिए कार्यपालिक मजिस्ट्रेट की लिखित अनुमति लेना अनिवार्य होगा। यदि कोई व्यक्ति इस नियम का उल्लंघन करता है तो उसके खिलाफ मध्य प्रदेश पशु चारा (निर्यात नियंत्रण) आदेश 2000 के तहत कार्रवाई की जाएगी।
उद्योगों और ईंट भट्टों में जलाने पर भी रोक
प्रशासन ने सिर्फ निर्यात पर ही नहीं बल्कि चारे के उपयोग को लेकर भी सख्ती दिखाई है। आदेश के तहत भूसा, घास या ज्वार जैसे पशु आहार को ईंट भट्टों, फैक्ट्रियों या अन्य औद्योगिक गतिविधियों में जलाने पर भी रोक लगा दी गई है।
अधिकारियों का कहना है कि कई स्थानों पर भूसे और चारे का उपयोग ईंधन के रूप में किया जाता है, जिससे पशुओं के लिए उपलब्ध संसाधन कम हो जाते हैं। इसी वजह से चारा प्रतिबंध (Fodder Ban) के तहत इस तरह के उपयोग को भी प्रतिबंधित किया गया है।
पशु चिकित्सा विभाग और गौशालाओं ने जताई थी चिंता
इस फैसले के पीछे मुख्य कारण जिले में चारे की संभावित कमी की आशंका है। अतिरिक्त जिला दंडाधिकारी बी.एस. कलेश द्वारा 6 मार्च को जारी आदेश में बताया गया कि उपसंचालक पशु चिकित्सा विभाग, जिले की विभिन्न गौशालाओं के अध्यक्ष और सचिवों के साथ-साथ पशुपालक किसानों ने प्रशासन को इस संबंध में जानकारी दी थी।
इन सभी ने प्रशासन को बताया कि अगर जिले से लगातार चारा और भूसा बाहर भेजा जाता रहा तो आने वाले महीनों में पशुओं के लिए चारे की कमी हो सकती है। इसी चिंता को देखते हुए प्रशासन ने एहतियात के तौर पर चारा प्रतिबंध (Fodder Ban) लागू करने का निर्णय लिया।
जिले में चारे का भंडारण सुनिश्चित करने की तैयारी
प्रशासन का मानना है कि चारा प्रतिबंध (Fodder Ban) से जिले में उत्पादित चारा स्थानीय स्तर पर ही उपलब्ध रहेगा और उसका भंडारण भी आसानी से किया जा सकेगा। इससे गौशालाओं और पशुपालकों को पर्याप्त मात्रा में चारा मिल सकेगा।
नीमच जिले में बड़ी संख्या में किसान पशुपालन से जुड़े हुए हैं। इसके अलावा कई गौशालाएं भी संचालित हो रही हैं जहां हजारों की संख्या में गायों और अन्य पशुओं की देखभाल की जाती है। ऐसे में प्रशासन का यह कदम पशुपालकों के लिए राहत भरा माना जा रहा है।
प्रशासन की अपील
जिला प्रशासन ने किसानों, व्यापारियों और परिवहनकर्ताओं से अपील की है कि वे आदेश का पालन करें और बिना अनुमति चारा बाहर भेजने की कोशिश न करें। अधिकारियों का कहना है कि चारा प्रतिबंध (Fodder Ban) का उद्देश्य केवल यह सुनिश्चित करना है कि जिले में पशुओं के लिए पर्याप्त चारा उपलब्ध रहे।
प्रशासन ने यह भी संकेत दिया है कि यदि भविष्य में चारे की उपलब्धता सामान्य रहती है तो स्थिति की समीक्षा भी की जा सकती है। फिलहाल 30 जून 2026 तक चारा प्रतिबंध (Fodder Ban) प्रभावी रहेगा।
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