बस में आग लगी… पति बचाता रहा पत्नी को, लेकिन कुछ मिनटों बाद सामने आया दिल दहला देने वाला मंजर

दौसा (राजस्थान)। हरिद्वार से इंदौर लौट रही एक स्लीपर बस में आग लगने के बाद हुआ दर्दनाक हादसा कई परिवारों के लिए कभी न भूलने वाला जख्म बन गया। बस में आग लगने के बाद यात्रियों में अफरा-तफरी मच गई। कुछ लोग किसी तरह बस से बाहर निकलने में सफल रहे, लेकिन कई यात्री आग की चपेट में आ गए। इस हादसे में मध्यप्रदेश के छह लोगों सहित कुल आठ यात्रियों की मौत हो गई। आग इतनी भीषण थी कि मृतकों के कई शव पूरी तरह जल गए और उनकी पहचान के लिए डीएनए जांच करानी पड़ रही है।

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हादसे की सबसे मार्मिक तस्वीर उस समय सामने आई जब एक पति अपनी पत्नी को बचाने के लिए आखिरी सांस तक संघर्ष करता रहा, लेकिन आग की तेज लपटों के आगे उसकी हर कोशिश बेबस साबित हुई।

पत्नी सीट के नीचे फंसी रही, पति लगाता रहा मदद की गुहार

बस पूरी तरह जलकर खाक हो गई। हादसे में 8 की मौत।

बस हादसे के बाद परिजन का रो-रोकर बुरा हाल है।

हरिद्वार से लौटते वक्त बस हादसे में जान चली गई।

वन विभाग में कम्प्यूटर ऑपरेटर के पद पर कार्यरत जितेंद्र पांडे अपनी पत्नी प्रियंका पांडे और सात वर्षीय बेटे अभिनव के साथ हरिद्वार से इंदौर लौट रहे थे। उनकी सीट बस चालक के पीछे थी। जितेंद्र ने बताया कि रात में अचानक तेज आवाज और जोरदार झटके से उनकी नींद खुली। हादसे के बाद बस में भगदड़ मच गई। किसी तरह वह अपने बेटे के साथ बस से बाहर निकल आए, लेकिन उनकी पत्नी प्रियंका सीट के नीचे फंस गई थीं।

उन्होंने पहले बस के अंदर से पत्नी का हाथ पकड़कर बाहर निकालने की कोशिश की। काफी प्रयास करने के बावजूद जब वह बाहर नहीं निकल सकीं तो जितेंद्र बस से उतरकर खिड़की की ओर पहुंचे और वहां से भी उन्हें खींचने का प्रयास किया। इसी दौरान बस में आग लग गई और कुछ ही क्षणों में आग ने पूरी बस को अपनी चपेट में ले लिया।

जितेंद्र ने लोगों से लगातार मदद की अपील की, लेकिन अफरा-तफरी और आग की भयावह स्थिति के कारण कोई भी प्रियंका तक नहीं पहुंच पाया। आखिरकार उनकी आंखों के सामने उनकी पत्नी आग में घिर गई। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, हादसे के समय हर कोई अपनी जान बचाने की कोशिश में लगा था, जिससे बचाव कार्य बेहद कठिन हो गया।

धार्मिक यात्रा से लौट रहा था पूरा परिवार

इस दर्दनाक हादसे में बड़वाह निवासी होटल संचालक दीपक सिंह तंवर की भी मौत हो गई। परिजनों के अनुसार दीपक अपने परिवार के साथ 22 जून को वैष्णो देवी दर्शन के लिए निकले थे। वहां दर्शन करने के बाद परिवार अमृतसर और हरिद्वार भी गया था। यात्रा पूरी होने के बाद सभी लोग वापस अपने घर लौट रहे थे। बुधवार को उन्हें इंदौर पहुंचकर बड़वाह लौटना था, लेकिन रास्ते में हुए इस हादसे ने पूरे परिवार की जिंदगी बदल दी।

हादसे में दीपक सिंह तंवर की मौत हो गई, जबकि उनके परिवार के कई सदस्य घायल हो गए। घायलों में सन्नी तंवर, नेहा तंवर, दिव्या तंवर, यशिका, वंशराज और इंदौर निवासी हर्षद शामिल हैं। सभी का उपचार जारी है।

मौत से कुछ घंटे पहले सोशल मीडिया पर किया था पोस्ट

परिवार ने मौत से पहले स्टेटस पर लिखा था- ट्रिप खत्म, अब फिर काम पर लगेंगे।

दीपक सिंह तंवर ने हादसे से कुछ घंटे पहले सोशल मीडिया पर एक स्टेटस साझा किया था।

उन्होंने लिखा था—

“ट्रिप खत्म… अब फिर काम पर लगेंगे… ढल गया दिन… हो गई रात…”

स्टेटस के साथ उन्होंने यात्रा के दौरान ट्रेन में परिवार के साथ बिताए गए पल और वैष्णो देवी दर्शन के वीडियो भी साझा किए थे। किसी को अंदाजा नहीं था कि यह उनका आखिरी सोशल मीडिया पोस्ट साबित होगा।

घर में पसरा मातम, बहन का रो-रोकर बुरा हाल

बड़वाह स्थित दीपक सिंह तंवर के घर पर हादसे की खबर पहुंचते ही मातम छा गया। परिवार के अधिकांश सदस्य राजस्थान रवाना हो गए, जबकि घर पर मौजूद उनकी बहन कविता तंवर का रो-रोकर बुरा हाल है।

पड़ोसियों के अनुसार, भाई की मौत की खबर मिलने के बाद कविता बार-बार बेहोश हो रही हैं। उन्होंने बताया कि रात करीब ढाई बजे परिवार को फोन पर बस दुर्घटना की जानकारी मिली थी। शुरुआत में उम्मीद थी कि सभी सुरक्षित होंगे, लेकिन सुबह मौत की खबर आने से पूरा परिवार टूट गया।

कई शवों की पहचान डीएनए जांच से होगी

प्रशासनिक अधिकारियों के अनुसार, बस में आग इतनी भीषण थी कि कई शव पूरी तरह जल गए। सामान्य तरीके से उनकी पहचान संभव नहीं हो सकी। ऐसे में मृतकों की पहचान सुनिश्चित करने के लिए डीएनए जांच कराई जा रही है। जांच पूरी होने के बाद ही शव परिजनों को सौंपे जाएंगे। इसके बाद अंतिम संस्कार की प्रक्रिया पूरी होगी।


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