Chemical Engineer Success Story: विदेश जाने का सपना टूटा, तो गांव की महिलाओं संग शुरू किया बिजनेस, अब सालाना टर्नओवर 24 लाख
Reported by: News Desk | Edited by: आकाश शर्मा
22 जनवरी 2026, (अपडेटेड 22 जनवरी 2026, 10:49 पूर्वाह्न IST)

पुणे/नीमच:- Chemical Engineer Success Story अक्सर हम सुनते हैं कि आपदा में ही अवसर छिपा होता है, लेकिन इसे सच कर दिखाना हर किसी के बस की बात नहीं होती। पुणे की रहने वालीं कल्याणी चवली ने इसे हकीकत में बदल कर दिखाया है। आमतौर पर एक केमिकल इंजीनियर की दुनिया प्रयोगशालाओं (Labs), टेस्ट ट्यूब और रसायनों के इर्द-गिर्द घूमती है, लेकिन कल्याणी के लिए उनकी लैब अब ‘रसोई’ है और रसायन ‘पारंपरिक मसाले’।
अपनी डिग्री का अनूठा इस्तेमाल कर उन्होंने ‘सहृदया फूड्स’ (Sahrudaya Foods) की नींव रखी और आज वह एक सफल उद्यमी के तौर पर पहचानी जाती हैं। यह Chemical Engineer Success Story उन लाखों युवाओं के लिए प्रेरणा है जो प्लान फेल होने पर निराश हो जाते हैं।

लैब से लजीज व्यंजनों तक का सफर Chemical Engineer Success Story

Chemical Engineer Success Story में मूल रूप से हैदराबाद की रहने वालीं और पुणे में पली-बढ़ीं 24 वर्षीय कल्याणी ने मुंबई के प्रतिष्ठित इंस्टीट्यूट ऑफ केमिकल टेक्नोलॉजी (ICT) से पढ़ाई की है। उनका सपना विदेश जाकर हायर एजुकेशन लेने का था। सब कुछ तय था, लेकिन तभी कोरोना महामारी (Covid-19) ने दस्तक दी और पूरी दुनिया थम गई। कल्याणी का विदेश जाने का प्लान कैंसिल हो गया।

हालांकि, कल्याणी ने हाथ पर हाथ धरे बैठने के बजाय अपने ज्ञान का इस्तेमाल करने की ठानी। खाली समय में उन्होंने महाराष्ट्र के पाबल गांव स्थित ‘विज्ञान आश्रम’ के साथ एक प्रोजेक्ट पर काम करना शुरू किया। यहीं से उनकी जिंदगी और करियर की दिशा बदल गई।

इंजीनियरिंग का ‘तड़का’ और नानी-दादी के नुस्खे

Chemical Engineer Success Story ग्रामीण इलाकों में काम करते हुए कल्याणी ने देखा कि वहां की महिलाएं पारंपरिक व्यंजन बनाने में माहिर हैं, लेकिन उन्हें इसका सही बाज़ार नहीं मिल पाता। वहीं, एक केमिकल इंजीनियर होने के नाते कल्याणी खाद्य पदार्थों के विज्ञान को बखूबी समझती थीं। उन्होंने अपनी टेक्निकल नॉलेज का इस्तेमाल न्यूट्रिशन को लॉक करने में किया।
मिसाल के तौर पर, जब वह ‘मोरिंगा’ (सहजन) की चिक्की बनाती हैं, तो तापमान का विशेष ध्यान रखती हैं ताकि प्रोसेस के दौरान विटामिन-C नष्ट न हो। उनकी यह Chemical Engineer Success Story इस बात का सबूत है कि डिग्री कोई भी हो, अगर नजरिया सही हो तो उसे किसी भी फील्ड में इस्तेमाल किया जा सकता है।

बिना मैदा और चीनी के बनाई सेहतमंद पहचान

Chemical Engineer Success Story 2021 में शुरू हुए ‘सहृदया फूड्स’ की यूएसपी (USP) इसकी शुद्धता है। कल्याणी के स्टार्टअप में रिफाइंड शुगर, मैदा या किसी भी तरह के हानिकारक प्रिजर्वेटिव्स का इस्तेमाल नहीं होता। उनके उत्पाद—जैसे तेलंगाना का मशहूर स्नैक ‘गारेलु’, ‘सप्तधान्य लड्डू’ और ‘मोरिंगा चिक्की’—स्वाद और सेहत का बेहतरीन संगम हैं।

Chemical Engineer Success Story का यही कारण है कि आज पुणे में उनके 2,500 ऑनलाइन और 3,000 ऑफलाइन नियमित ग्राहक हैं। सिर्फ भारत के मेट्रो शहरों (दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरु) में ही नहीं, बल्कि सात समंदर पार अमेरिका, न्यूजीलैंड और जापान तक उनके स्नैक्स का जायका पहुंच चुका है। कैलिफोर्निया के तो एक मंदिर में उनके उत्पादों की खास डिमांड रहती है।

ग्रामीण महिलाओं को बनाया आत्मनिर्भर

कल्याणी का यह बिजनेस मॉडल Chemical Engineer Success Story सिर्फ मुनाफे पर नहीं टिका है। यह एक सोशल एंटरप्राइज भी है। उन्होंने अब तक असम, जयपुर और महाराष्ट्र की 160 से ज्यादा महिलाओं को ट्रेनिंग दी है। ‘सहृदया फूड्स’ के किचन में काम करने वाली महिलाओं को न केवल वेतन मिलता है, बल्कि कंपनी 70% कच्चा माल (Raw Material) भी इन्हीं महिलाओं के खेतों से खरीदती है। इससे ग्रामीण महिलाओं को ‘डबल मुनाफा’ होता है।

Chemical Engineer Success Story में कल्याणी की मां, लक्ष्मी भी इस काम में उनका पूरा साथ देती हैं, जिससे काम करने वाली महिलाओं को एक पारिवारिक माहौल मिलता है। कल्याणी का विजन स्पष्ट है—पारंपरिक भारतीय स्वाद को ग्लोबल प्लेटफ़ॉर्म पर ले जाना और साथ ही ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करना।

सफलता के आंकड़े और भविष्य की उड़ान

Chemical Engineer Success Story के शुरुआत में चुनौतियों का सामना करना पड़ा, लेकिन कोविड केयर सेंटर्स में इम्यूनिटी बूस्टर स्नैक्स सप्लाई करके उन्होंने अपनी साख जमाई। आज कल्याणी की कंपनी का मंथली रेवेन्यू 2 लाख रुपये और सालाना रेवेन्यू 24 लाख रुपये के पार पहुंच गया है। उनकी काबिलियत को देखते हुए ‘स्टार्टअप इंडिया’ की तरफ से उन्हें 10.4 लाख रुपये की ग्रांट मिली है। इसके अलावा, ‘द बुद्धा इंस्टीट्यूट’ की फेलोशिप ने उनके हौसलों को नई उड़ान दी है।

कल्याणी चवली की यह Chemical Engineer Success Story साबित करती है कि अगर इरादे पक्के हों, तो रास्ते खुद-ब-खुद बन जाते हैं।


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Aakash Sharma
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