चित्तौड़गढ़। राजस्थान के चित्तौड़गढ़ स्थित दक्ष हॉस्पिटल एक गंभीर आरोप के बाद चर्चा में है। महिला के परिजनों का दावा है कि सिजेरियन डिलीवरी के दौरान ऑपरेशन में इस्तेमाल किया गया कपड़ा (मोप) महिला के पेट के अंदर ही रह गया। आरोप है कि इसके कारण महिला की तबीयत लगातार बिगड़ती गई और बाद में अहमदाबाद के अस्पताल में दोबारा सर्जरी कर कपड़ा निकाला गया। मामले की शिकायत जिला प्रशासन तक पहुंचने के बाद कलेक्टर डॉ. मंजू ने मेडिकल टीम गठित कर जांच के आदेश दिए हैं।
प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि जांच रिपोर्ट आने के बाद यदि किसी प्रकार की चिकित्सकीय लापरवाही सामने आती है तो संबंधित डॉक्टरों और अस्पताल प्रबंधन के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। वहीं, अस्पताल की ओर से लगाए गए आरोपों को गलत बताया गया है।
2 मई को हुआ था सिजेरियन ऑपरेशन
महिला के पति लोकेश चौधरी के अनुसार उनकी पत्नी जया चौधरी गर्भावस्था के आठवें महीने में थीं। 2 मई को उन्हें कुंभानगर स्थित दक्ष हॉस्पिटल ले जाया गया, जहां जांच के बाद डॉक्टर प्रतिभा सनाढ्य ने गर्भावस्था में जटिलता बताते हुए तत्काल सिजेरियन ऑपरेशन की सलाह दी। परिजनों के अनुसार उसी दिन दोपहर करीब तीन बजे ऑपरेशन किया गया और बेटे का जन्म हुआ। करीब चार दिन अस्पताल में भर्ती रखने के बाद 6 मई को मां और नवजात को छुट्टी दे दी गई।
छुट्टी के कुछ दिन बाद शुरू हुई परेशानी
पति का आरोप है कि अस्पताल से घर लौटने के करीब दस दिन बाद जया चौधरी के पेट में तेज दर्द शुरू हुआ। इसके साथ बुखार, कमजोरी और अन्य स्वास्थ्य समस्याएं भी बढ़ने लगीं। परिवार ने पहले स्थानीय स्तर पर इलाज कराया, लेकिन हालत में सुधार नहीं हुआ। परिजनों के मुताबिक धीरे-धीरे महिला का खाना-पीना भी बंद हो गया और लगातार उल्टियां होने लगीं। 19 मई को बिरला हॉस्पिटल में जांच कराई गई, जहां शरीर में संक्रमण और लिवर में सूजन होने की जानकारी मिली।
अहमदाबाद में सामने आया नया दावा

परिवार का कहना है कि लगातार बिगड़ती हालत को देखते हुए 24 जून को महिला को अहमदाबाद के जायडस अस्पताल ले जाया गया। वहां जांच के दौरान डॉक्टरों ने कथित रूप से महिला के पेट में ऑपरेशन के दौरान इस्तेमाल किया गया कपड़ा होने की जानकारी दी।
पति का आरोप है कि इसी कपड़े की वजह से पेट में फ्लूड जमा हो गया, जिससे गंभीर संक्रमण फैल गया। उनका दावा है कि बड़ी आंत प्रभावित हुई और लिवर को भी नुकसान पहुंचा। इसके बाद 27 जून को दोबारा ऑपरेशन कर कपड़ा निकाला गया तथा आगे का उपचार किया गया।
इलाज में 15 लाख रुपये खर्च होने का दावा
महिला के परिवार ने आरोप लगाया है कि कथित लापरवाही के कारण अब तक करीब 15 लाख रुपये इलाज पर खर्च हो चुके हैं। उनका कहना है कि लंबे समय तक अस्पताल में भर्ती रहने के कारण नवजात बच्चे को मां का दूध भी नहीं मिल पाया, जिससे पूरे परिवार को मानसिक और आर्थिक परेशानियों का सामना करना पड़ा। परिजनों ने जिम्मेदार डॉक्टरों और मेडिकल स्टाफ के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है।
जिला प्रशासन ने बनाई मेडिकल टीम
मामले की गंभीरता को देखते हुए जिला कलेक्टर डॉ. मंजू ने मेडिकल टीम गठित कर जांच के निर्देश दिए हैं। प्रशासन के अनुसार जांच में ऑपरेशन से जुड़े सभी दस्तावेज, मेडिकल रिकॉर्ड, उपचार संबंधी रिपोर्ट और अस्पताल की प्रक्रिया की समीक्षा की जाएगी। अधिकारियों ने कहा है कि यदि जांच में चिकित्सकीय लापरवाही प्रमाणित होती है तो संबंधित डॉक्टरों और अस्पताल प्रबंधन के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
दक्ष हॉस्पिटल की डॉक्टर ने आरोपों से किया इनकार
दूसरी ओर दक्ष हॉस्पिटल की वरिष्ठ डॉक्टर प्रतिभा सनाढ्य ने परिजनों के आरोपों को गलत बताया है। उनका कहना है कि ऑपरेशन उन्होंने स्वयं किया था और उस समय मरीज पूरी तरह स्वस्थ होकर अस्पताल से घर गई थी। उन्होंने कहा कि यदि महिला को बाद में किसी प्रकार की परेशानी हुई थी तो उन्हें पहले अस्पताल आकर जांच करानी चाहिए थी। डॉक्टर के अनुसार लगभग दो महीने बाद यह कहना कि ऑपरेशन के दौरान छोड़ा गया मोप निकला है, सही दावा नहीं है।
जांच रिपोर्ट के बाद साफ होगी स्थिति
फिलहाल यह मामला जांच के अधीन है। एक ओर महिला के परिवार ने गंभीर चिकित्सकीय लापरवाही का आरोप लगाया है, जबकि दूसरी ओर अस्पताल प्रबंधन ने इन आरोपों को खारिज किया है। ऐसे में पूरे मामले की सच्चाई अब मेडिकल टीम की जांच रिपोर्ट सामने आने के बाद ही स्पष्ट होगी। प्रशासन ने भी कहा है कि जांच के निष्कर्ष के आधार पर ही आगे की कार्रवाई की जाएगी।
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