चित्तौड़गढ़: श्रीकृष्ण जन्माष्टमी पर सांवलियाजी में तीन साल बाद सांवलियाजी ड्रोन शो का आयोजन किया गया। शुक्रवार रात 8 बजे 1100 ड्रोन ने एक साथ उड़ान भरकर करीब 15 मिनट तक आसमान में भगवान श्रीकृष्ण के जीवन से जुड़ी विभिन्न आकृतियां प्रदर्शित कीं। ड्रोन शो देखने के लिए मंदिर परिसर के साथ डोम पार्किंग और यशोदा विहार चौक पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे।
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ड्रोन की रोशनी से आसमान में श्रीकृष्ण जन्म, शेषनाग की छत्रछाया, गोवर्धन पर्वत, बाल कृष्ण, बांसुरी बजाते कान्हा, अर्जुन के सारथी बने श्रीकृष्ण, कालिया नाग पर नृत्य, माखन खाते बाल गोपाल और राधा-कृष्ण की आकृतियां उभरीं। इस दौरान श्रद्धालुओं की तालियां और जयकारे गूंजते रहे।
तीन साल बाद फिर हुआ ड्रोन शो

मंदिर मंडल अध्यक्ष हजारीदास वैष्णव के मुताबिक, इस बार सांवलियाजी ड्रोन शो की पूरी थीम भगवान श्रीकृष्ण के जीवन और श्री सांवलियाजी मंदिर पर आधारित थी। दिल्ली की बोटलैब डायनॉमिक्स कंपनी ने 1100 ड्रोन के साथ यह प्रदर्शन किया। शो की तैयारी के लिए कंपनी की 20 सदस्यीय टीम तीन दिन पहले ही सांवलियाजी पहुंच गई थी। बताया गया कि इससे पहले वर्ष 2023 की जन्माष्टमी पर यहां 1000 ड्रोन का शो आयोजित किया गया था। इस बार ड्रोन की संख्या बढ़ाकर 1100 की गई और नई थीम भी जोड़ी गई।
आसमान में दिखी कृष्ण जीवन की झलक

शो के दौरान ड्रोन ने अलग-अलग आकृतियां बनाकर भगवान श्रीकृष्ण से जुड़े प्रसंगों को प्रस्तुत किया। इनमें प्रमुख रूप से—
- श्रीकृष्ण जन्म
- शेषनाग की छत्रछाया
- गोवर्धन पर्वत उठाते श्रीकृष्ण
- बाल कृष्ण का रूप
- बांसुरी बजाते कान्हा
- महाभारत में अर्जुन के सारथी बने श्रीकृष्ण
- कालिया नाग पर नृत्य करते भगवान
- माखन खाते बाल गोपाल
- राधा-कृष्ण की झलक
- श्री सांवलियाजी मंदिर
- सांवरा सेठ की आकृतियां
शाम होते ही लोग शो देखने के लिए निर्धारित स्थानों पर पहुंचने लगे थे। बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक श्रद्धालु खुले आसमान के नीचे ड्रोन शो का इंतजार करते दिखाई दिए। ड्रोन के उड़ते ही आसमान रोशनी से जगमगा उठा।
डोम पार्किंग और यशोदा विहार चौक पर भीड़

सांवलियाजी ड्रोन शो के लिए मंदिर परिसर के आसपास विशेष व्यवस्था की गई थी। डोम वाली पार्किंग और यशोदा विहार चौक को शो देखने के लिए प्रमुख स्थान माना गया। बड़ी संख्या में श्रद्धालु परिवारों के साथ इन स्थानों पर पहुंचे। कई लोगों ने मोबाइल फोन से ड्रोन शो के वीडियो और तस्वीरें भी बनाए। शो समाप्त होने के बाद श्रद्धालुओं के बीच इसकी चर्चा होती रही। महोत्सव के दौरान धार्मिक आस्था के साथ आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल भी देखने को मिला। दिन में पारंपरिक कार्यक्रम हुए, जबकि रात का 1100 ड्रोन शो प्रमुख आकर्षण रहा।
अखाड़ा प्रदर्शन से दिनभर बना रहा उत्सव का माहौल

ड्रोन शो से पहले जन्माष्टमी महोत्सव के तहत अखाड़ा प्रदर्शन और धार्मिक जुलूस का आयोजन हुआ। दोपहर बाद श्री सांवलियाजी मंदिर परिसर में उज्जैन जिले के पिपलोदा स्थित द्वारिकाधीश की बजरंग व्यायामशाला के कलाकारों का स्वागत किया गया। मंदिर मंडल अध्यक्ष हजारीदास वैष्णव, सदस्य पवन तिवारी और जन्माष्टमी महोत्सव समिति के विपिन मंडोत सहित अन्य पदाधिकारियों ने कलाकारों का उपरना ओढ़ाकर सम्मान किया।
इसके बाद पहलवान हुकुमचंद गुड्डू के सानिध्य में अखाड़ा प्रदर्शन हुआ। अर्जुन पहलवान, मुकेश भाई, देवेंद्र जैन, जितेंद्र सोलंकी, बिट्टू सरदार और अन्य कलाकारों ने पारंपरिक व्यायाम एवं विभिन्न करतब प्रस्तुत किए। कलाकारों का जुलूस गुर्जर चौक, कबूतरखाना, ब्रह्मपुरी, पुराने मंदिर मार्ग और मीरा सर्किल होते हुए यशोदा विहार चौक तक पहुंचा। रास्ते में लोगों ने कलाकारों का स्वागत किया।
चौराहों पर हुई मटकी फोड़ की रस्म
जन्माष्टमी के पारंपरिक रंग को बनाए रखने के लिए जुलूस के दौरान विभिन्न स्थानों पर मटकी फोड़ कार्यक्रम भी आयोजित किया गया। गुर्जर चौक, कबूतरखाना, जैन मोहल्ला और पुराने मंदिर मार्ग के प्रमुख चौराहों पर कलाकारों ने मटकी फोड़कर भगवान श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं को प्रस्तुत किया। मटकी फूटने पर श्रद्धालुओं ने जयकारे लगाए और तालियों से कलाकारों का उत्साह बढ़ाया। स्थानीय लोगों ने कई स्थानों पर कलाकारों का फूल-मालाओं से स्वागत किया और जलपान की व्यवस्था भी की।
परंपरा और तकनीक का संगम बना आकर्षण

इस बार सांवलियाजी का जन्माष्टमी महोत्सव धार्मिक और सांस्कृतिक कार्यक्रमों के साथ आधुनिक तकनीक के प्रदर्शन के लिए भी खास रहा। दिनभर अखाड़ा प्रदर्शन, मटकी फोड़ और धार्मिक जुलूस हुए, जबकि रात में 1100 ड्रोन शो ने आसमान में श्रीकृष्ण के जीवन से जुड़े प्रसंगों को आकृतियों के रूप में प्रस्तुत किया।
तीन साल बाद आयोजित हुए इस ड्रोन शो में 1000 की जगह 1100 ड्रोन का इस्तेमाल किया गया। करीब 15 मिनट के प्रदर्शन के दौरान श्रद्धालुओं की नजरें आसमान पर टिकी रहीं।मंदिर मंडल अध्यक्ष के अनुसार, शो की थीम श्रीकृष्ण के जीवन और श्री सांवलियाजी मंदिर पर केंद्रित थी। इस तरह जन्माष्टमी महोत्सव में परंपरा, आस्था और आधुनिक तकनीक का संयोजन देखने को मिला।
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