रायपुर। धर्मांतरण नियम को लेकर छत्तीसगढ़ सरकार ने नए प्रावधान लागू कर दिए हैं। अब राज्य में कोई भी व्यक्ति यदि धर्म परिवर्तन करना चाहता है, तो उसे प्रस्तावित तिथि से 90 दिन पहले जिला कलेक्टर को लिखित सूचना देना अनिवार्य होगा। सरकार ने इसके लिए छत्तीसगढ़ धर्म स्वातंत्र्य नियम 2026 लागू किए हैं। नए नियमों के तहत धर्म परिवर्तन से जुड़े प्रत्येक मामले का ऑनलाइन रिकॉर्ड रखा जाएगा और पूरी प्रक्रिया प्रशासन की निगरानी में होगी।
सरकार के अनुसार इन नए प्रावधानों का उद्देश्य धर्म परिवर्तन से जुड़ी प्रक्रिया को निर्धारित कानूनी व्यवस्था के तहत संचालित करना है। इसके साथ ही आवेदन की जांच, रिकॉर्ड संधारण और प्रशासनिक निगरानी को भी नियमों का हिस्सा बनाया गया है।
धर्म परिवर्तन से पहले 90 दिन पहले देनी होगी सूचना
नए धर्मांतरण नियम के अनुसार यदि कोई व्यक्ति अपना धर्म बदलना चाहता है, तो उसे निर्धारित प्रारूप में जिला कलेक्टर के समक्ष लिखित घोषणा पत्र जमा करना होगा। यह सूचना धर्म परिवर्तन की संभावित तिथि से कम से कम 90 दिन पहले देना अनिवार्य होगी। घोषणा पत्र मिलने के बाद प्रशासन संबंधित मामले की जांच करेगा। जांच पूरी होने के बाद ही आगे की प्रक्रिया निर्धारित नियमों के अनुसार आगे बढ़ेगी।
हर धर्म परिवर्तन का बनेगा ऑनलाइन रिकॉर्ड
सरकार ने नए नियमों में डिजिटल निगरानी पर भी विशेष जोर दिया है। धर्म परिवर्तन से जुड़े प्रत्येक आवेदन और उसकी प्रक्रिया का ऑनलाइन रिकॉर्ड रखा जाएगा। इससे प्रशासन को सभी मामलों की निगरानी और रिकॉर्ड सुरक्षित रखने में सुविधा मिलेगी।
घर वापसी के लिए अलग प्रक्रिया तय
नए धर्मांतरण नियम में मूल या पैतृक धर्म में लौटने यानी घर वापसी के लिए अलग व्यवस्था की गई है। सरकार के अनुसार—
- व्यक्ति को आवश्यक जानकारी प्रशासन को देनी होगी।
- सूचना मिलने के बाद 15 दिनों के भीतर जांच पूरी की जाएगी।
- इस प्रक्रिया में किसी तीसरे पक्ष की सहमति आवश्यक नहीं होगी।
अंतर धार्मिक विवाह के मामलों में भी लागू होंगे नियम
यदि धर्म परिवर्तन का उद्देश्य अंतर धार्मिक विवाह है, तब भी निर्धारित प्रक्रिया का पालन करना होगा। नियमों के अनुसार—
- विवाह से कम से कम 60 दिन पहले जिला कलेक्टर को सूचना देना अनिवार्य होगा।
- प्रशासन इस सूचना को ऑनलाइन पोर्टल और नोटिस बोर्ड पर सार्वजनिक करेगा।
- सूचना जारी होने के बाद 30 दिनों के भीतर आपत्तियां दर्ज कराई जा सकेंगी।
जनजातीय क्षेत्रों में ग्राम सभा की होगी अहम भूमिका
बस्तर और सरगुजा संभाग के जनजातीय क्षेत्रों में ग्राम सभा को विशेष जिम्मेदारी दी गई है। यदि किसी मामले में प्रलोभन, दबाव या धोखाधड़ी से धर्म परिवर्तन की शिकायत मिलती है, तो ग्राम सभा अपनी रिपोर्ट प्रशासन को दे सकेगी। इसके आधार पर पुलिस और संबंधित अधिकारी आवश्यक कानूनी कार्रवाई करेंगे।
धर्म परिवर्तन कराने वाले आयोजकों के लिए भी नियम
नए प्रावधानों के तहत धर्म परिवर्तन से जुड़े आयोजकों और संस्थाओं के लिए भी पंजीकरण अनिवार्य किया गया है। मुख्य प्रावधान इस प्रकार हैं—
- आयोजन से 30 दिन पहले पंजीकरण कराना होगा।
- पंजीकरण की वैधता पांच वर्ष रहेगी।
- संबंधित संस्थाओं के वित्तीय लेनदेन पर प्रशासनिक निगरानी रखी जाएगी।
सजा और जुर्माने के प्रावधान भी तय
सरकार द्वारा निर्धारित नियमों के अनुसार अलग-अलग परिस्थितियों में अलग दंड का प्रावधान किया गया है।
- सामान्य अवैध धर्म परिवर्तन पर 7 से 10 वर्ष तक की सजा।
- न्यूनतम 5 लाख रुपये तक जुर्माना।
- महिला या नाबालिग के धर्म परिवर्तन के मामलों में 10 से 20 वर्ष तक की सजा।
- भय, दबाव या प्रलोभन देकर धर्म परिवर्तन कराने पर 30 लाख रुपये तक जुर्माने का प्रावधान।
क्या है नए नियमों का उद्देश्य?
सरकार के अनुसार धर्मांतरण नियम के माध्यम से धर्म परिवर्तन की पूरी प्रक्रिया को निर्धारित कानूनी ढांचे के भीतर लाना, प्रत्येक मामले का रिकॉर्ड तैयार करना और प्रशासनिक निगरानी सुनिश्चित करना उद्देश्य है। नए नियमों में धर्म परिवर्तन, घर वापसी, अंतर धार्मिक विवाह, ग्राम सभा की भूमिका, आयोजकों के पंजीकरण और दंड संबंधी विस्तृत प्रावधान शामिल किए गए हैं।
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