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Hastkala Exhibition: नीमच में देश भर की कला का संगम, 40 हजार की साड़ी और पशमीना शॉल बनी पहली पसंद

Hastkala Exhibition

नीमच। (विशेष संवाददाता, The Times of MP)

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भारतीय संस्कृति की विविध रंगत और बुनकरों की अद्वितीय कलात्मकता का जीवंत उदाहरण इन दिनों नीमच शहर में देखने को मिल रहा है। स्थानीय लायंस डेन (गोमा बाई नेत्रालय के सामने) में आयोजित Hastkala Exhibition कला प्रेमियों और खरीदारी के शौकीनों के लिए आकर्षण का केंद्र बनी हुई है। 30 दिसंबर तक चलने वाली इस राष्ट्रीय हस्तशिल्प एवं हाथकरघा प्रदर्शनी में देशभर के विभिन्न राज्यों से आए शिल्पी अपनी सर्वश्रेष्ठ कला का प्रदर्शन कर रहे हैं।

Hastkala Exhibition में पशमीना और बनारसी का शाही संगम

कड़ाके की ठंड के बीच इस Hastkala Exhibition में जम्मू-कश्मीर की विश्व प्रसिद्ध पशमीना शॉल महिलाओं की पहली पसंद बनी हुई है। अपनी कोमलता और गर्माहट के लिए जानी जाने वाली यह शॉल कश्मीर की विरासत को बखूबी पेश कर रही है। वहीं दूसरी ओर, उत्तर प्रदेश के वाराणसी से आई बनारसी नक्काशीदार साड़ियाँ और ड्रेस मटेरियल अपनी राजसी चमक बिखेर रहे हैं। इन साड़ियों पर की गई महीन नक्काशी और जरी का काम ग्राहकों को मंत्रमुग्ध कर रहा है।

40 हजार की ‘प्योर सिल्क’ साड़ी बनी चर्चा का विषय

प्रदर्शनी में सबसे बड़ा आकर्षण जम्मू-कश्मीर के शिल्पियों द्वारा तैयार की गई ‘प्योर सिल्क’ की हाथ से कड़ाई वाली साड़ियाँ हैं। प्रदर्शनी के आयोजकों ने बताया कि एक-एक साड़ी को तैयार करने में कई महीनों का कठिन परिश्रम लगता है। Hastkala Exhibition में इन साड़ियों की कीमत 40 हजार रुपये तक है। उच्च वर्ग और कला के पारखी लोग इन साड़ियों की जमकर सराहना कर रहे हैं और बुकिंग भी करा रहे हैं।

राजस्थान का स्वाद: चूर्ण सुपारी की जबरदस्त मांग

कपड़ों और हस्तशिल्प के अलावा Hastkala Exhibition में खान-पान और घरेलू वस्तुओं के स्टॉल भी भीड़ खींच रहे हैं। विशेष रूप से राजस्थान की प्रसिद्ध चूर्ण सुपारी लोगों की जुबान पर चढ़ी हुई है। विभिन्न स्वादों और औषधीय गुणों से भरपूर यह सुपारी खरीदारी करने आए लोगों के लिए एक जरूरी स्वाद बन गई है। इसके साथ ही जयपुर की पारंपरिक जूतियां और फैंसी चप्पलें भी युवतियों के बीच काफी लोकप्रिय हो रही हैं।

एक छत के नीचे पूरा भा

हैंडलूम हैंडीक्राफ्ट आर्टिजन वेलफेयर सोसाइटी इंदौर द्वारा आयोजित इस Hastkala Exhibition में विविधता का अद्भुत भंडार है:

  • मेरठ का कॉटन: पुरुषों के लिए विशेष कॉटन शर्ट, कुर्ता और पायजामा की विस्तृत रेंज।

  • हैदराबाद के मोती: असली पर्ल्स (Real Pearls) की ज्वैलरी, जो महिलाओं के आकर्षण को बढ़ा रही है।

  • देवास का लेदर: टाटा एक्सपोर्ट के लेदर बैग और एक्सेसरीज अपनी मजबूती के लिए पसंद किए जा रहे हैं।

  • खादी इंडिया: हर्बल ब्यूटी प्रोडक्ट्स और प्राकृतिक दवाइयों की स्टॉल्स पर भी स्वास्थ्य के प्रति जागरूक लोगों की भीड़ है।

  • प्रिंट्स की विविधता: यहाँ कलमकारी, बाग प्रिंट, ब्लॉक प्रिंट और बाटिक प्रिंट के सूट, गाउन और प्लाजो की भारी मांग है।

प्रदर्शनी प्रभारी का अनुभव और जनसैलाब

प्रदर्शनी प्रभारी के अनुसार, नीमच में इस बार Hastkala Exhibition को लेकर जो उत्साह देखा जा रहा है, वह उम्मीद से कहीं अधिक है।

उन्होंने बताया,

“नीमच के लोग न केवल कला के प्रेमी हैं, बल्कि वे बुनकरों की मेहनत की कद्र भी करना जानते हैं।
शहर के साथ-साथ मनासा, जावद और राजस्थान के सीमावर्ती क्षेत्रों से भी बड़ी संख्या में लोग यहाँ खरीदारी करने पहुँच रहे हैं।”

प्रदर्शनी में न केवल फैंसी आइटम, बल्कि घरेलू साज-सज्जा के सामान, हैंडलूम की चादरें और ऑक्सीडाइज जर्मन सिल्वर ज्वैलरी के भी कई विकल्प उपलब्ध हैं। 30 दिसंबर तक चलने वाली इस प्रदर्शनी में हर दिन ग्राहकों की संख्या बढ़ती जा रही है, जो स्थानीय अर्थव्यवस्था और हस्तशिल्पियों के मनोबल के लिए एक शुभ संकेत है।


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