जीरन (नीमच) (Jeeran News)। नगर के ऐतिहासिक एवं पेयजल-सिंचाई के प्रमुख स्रोत जीरन तालाब में चल रहे वेस्ट वीयर (चादर) निर्माण कार्य को नुकसान पहुंचाने के आरोप के बाद मामला चर्चा का विषय बन गया है। ग्रामीणों और जनप्रतिनिधियों ने आरोप लगाया है कि जीरन तालाब के डूब क्षेत्र में अवैध खेती करने वाले कुछ लोगों ने रात के समय निर्माण स्थल पर तोड़फोड़ कर कार्य बाधित किया। मामले को लेकर ग्रामीणों ने नीमच विधायक दिलीप सिंह परिहार से शिकायत करते हुए दोषियों के विरुद्ध कार्रवाई की मांग की है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार जल संसाधन विभाग द्वारा जीरन तालाब की वेस्ट वीयर की मरम्मत एवं उसकी ऊंचाई बढ़ाने का कार्य शुरू किया गया था। बताया गया कि निर्माण एजेंसी ने कंक्रीट कार्य की तैयारी के लिए सरियों का जाल एवं सेंटिंग लगाई थी, लेकिन अगले दिन कार्य स्थल पर सामग्री अस्त-व्यस्त मिली।
निर्माण कार्य को नुकसान पहुंचाने का आरोप
स्थानीय लोगों का आरोप है कि देर रात कुछ लोगों ने निर्माण स्थल पहुंचकर सेंटिंग एवं सरियों का ढांचा उखाड़ दिया, जिससे निर्धारित आरसीसी कार्य नहीं हो सका। इस घटना के बाद नगरवासियों और किसानों में नाराजगी देखने को मिली। हालांकि, इस संबंध में संबंधित पक्ष का बयान उपलब्ध नहीं है और आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है।
विधायक से मिला प्रतिनिधिमंडल
मामले को लेकर भाजपा दक्षिण मंडल अध्यक्ष मदन गुर्जर एवं नगर पालिका उपाध्यक्ष मुकेश राव तावरे के नेतृत्व में किसानों एवं नागरिकों का प्रतिनिधिमंडल नीमच विधायक दिलीप सिंह परिहार से मिला। प्रतिनिधिमंडल ने विधायक को ज्ञापन सौंपते हुए निर्माण कार्य को शीघ्र पूरा कराने तथा सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने वालों के विरुद्ध कार्रवाई की मांग की।
विधायक ने जल संसाधन विभाग से की चर्चा
प्रतिनिधिमंडल की शिकायत के बाद विधायक दिलीप सिंह परिहार ने जल संसाधन विभाग के कार्यपालन यंत्री (ईई) आर.सी. भाभर से दूरभाष पर चर्चा की। विधायक ने कहा कि जीरन तालाब नगर के पेयजल एवं सिंचाई दोनों की दृष्टि से महत्वपूर्ण जल स्रोत है और इसके विकास कार्य में किसी भी प्रकार की बाधा स्वीकार नहीं की जाएगी। उन्होंने विभाग से कार्य शीघ्र पूरा कराने के निर्देश दिए।
विभाग ने दोबारा कार्य शुरू कराने का दिया आश्वासन
जल संसाधन विभाग के कार्यपालन यंत्री आर.सी. भाभर ने प्रतिनिधिमंडल को आश्वस्त किया कि प्रशासन एवं पुलिस के सहयोग से वेस्ट वीयर का निर्माण कार्य पुनः शुरू कराया जाएगा तथा निर्धारित योजना के अनुसार पूरा किया जाएगा।
जीरन तालाब का महत्व
जीरन तालाब नगर के सबसे पुराने जल स्रोतों में शामिल है। वर्तमान में इसका उपयोग केवल सिंचाई के लिए ही नहीं बल्कि नगर की पेयजल योजना के लिए भी किया जा रहा है। तालाब के समीप आधुनिक फिल्टर प्लांट स्थापित है, जिससे नगरवासियों को पेयजल उपलब्ध कराया जाता है। इसी कारण तालाब की क्षमता बनाए रखना आवश्यक माना जा रहा है।
40-45 वर्ष पहले घटाया गया था जल स्तर
प्राप्त जानकारी के अनुसार—
- तालाब का मूल फुल टैंक लेवल (FTL) 1555 फीट निर्धारित था।
- लगभग 40-45 वर्ष पूर्व निचले क्षेत्र में जलभराव की आशंका एवं पिचिंग वॉल की स्थिति को देखते हुए जल स्तर अस्थायी रूप से 1554 फीट किया गया था।
- स्थानीय जनप्रतिनिधियों का कहना है कि वर्तमान में पिचिंग वॉल मजबूत हो चुकी है तथा अब पुराने निर्धारित स्तर तक पानी भरना संभव है।
प्रतिनिधिमंडल में ये लोग रहे शामिल
विधायक से मिले प्रतिनिधिमंडल में शामिल प्रमुख लोगों के नाम इस प्रकार हैं—
- नहर समिति अध्यक्ष शांतिलाल तूफान
- पार्षद प्रतिनिधि बबलू भीलावत
- कुंदन शर्मा
- अभय पोरवाल
- प्रभूलाल माली
- हस्तीमल भरानिया
- अन्य किसान एवं स्थानीय नागरिक
ग्रामीणों की मांग
ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि—
- निर्माण कार्य को शीघ्र पूरा कराया जाए।
- यदि शासकीय कार्य में बाधा पहुंचाने अथवा सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने की पुष्टि होती है तो संबंधित लोगों के विरुद्ध नियमानुसार कानूनी कार्रवाई की जाए।
- तालाब के संरक्षण एवं विकास कार्यों की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए।
प्रशासनिक कार्रवाई पर नजर
फिलहाल जल संसाधन विभाग ने निर्माण कार्य दोबारा शुरू कराने का आश्वासन दिया है। स्थानीय नागरिकों की निगाह अब इस बात पर है कि प्रशासन मामले में क्या कदम उठाता है और जीरन तालाब के विकास कार्य को कब तक पूरा कराया जाता है।
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