कन्हैयालाल भील हत्याकांड में 5 साल बाद फैसला, एक को उम्रकैद; 7 बरी
Reported by: Ameet | Edited by: आकाश शर्मा
12 अगस्त 2026, (अपडेटेड 12 अगस्त 2026, 9:59 पूर्वाह्न IST)

नीमच | नीमच जिले के सिंगोली क्षेत्र के कन्हैयालाल भील हत्याकांड में करीब पांच साल बाद विशेष अदालत ने फैसला सुनाया है। कोर्ट ने आरोपी छीतर गुर्जर, निवासी ग्राम पाटन, को हत्या का दोषी मानते हुए उम्रकैद और 1,000 रुपए जुर्माने की सजा सुनाई। वहीं, मामले के 7 अन्य आरोपियों को सबूतों की कमी के चलते बरी कर दिया गया।

मामला 26 अगस्त 2021 की सुबह का है। ग्राम बाणदा निवासी काना उर्फ कन्हैयालाल भील अपने साथी गोविंद के साथ बाइक से अपनी लापता पत्नी की तलाश में निकले थे। सिंगोली-नीमच रोड पर अथवाकलां फंटे के पास दोनों आने-जाने वाले वाहनों को रोककर पूछताछ कर रहे थे।

टक्कर के बाद शुरू हुआ पूरा घटनाक्रम

इसी दौरान आरोपी छीतर गुर्जर ने तेज रफ्तार बाइक से कन्हैयालाल को टक्कर मार दी। इससे कन्हैयालाल सड़क पर गिर गए और उनके सिर में गंभीर चोट आई। इसके बाद उनके साथ मारपीट किए जाने की बात सामने आई। घटना के दौरान कन्हैयालाल के साथ मौजूद गोविंद डर के कारण मौके से भाग गया। पुलिस जांच के अनुसार, इसके बाद कन्हैयालाल को रस्सी से बांधकर एक पिकअप वाहन के पीछे घसीटा गया। इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद मामले को लेकर काफी बवाल हुआ था।

वायरल वीडियो के बाद बढ़ी थी चर्चा

पुलिस जांच में सामने आए घटनाक्रम के मुताबिक, पिकअप के पीछे घसीटे जाने के बाद कन्हैयालाल को उपचार के लिए अस्पताल ले जाया गया। इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई।सरकार ने इस घटना को ‘जघन्य अपराध’ की श्रेणी में रखा था। इसके बाद पुलिस ने मामले की जांच करते हुए विभिन्न साक्ष्य जुटाए और उन्हें अदालत के सामने प्रस्तुत किया।

कन्हैयालाल भील हत्याकांड की सुनवाई के दौरान पिकअप वाहन, मोबाइल और चश्मदीदों के बयान को महत्वपूर्ण साक्ष्य के रूप में रखा गया। इसके साथ ही पुलिस की ओर से जुटाए गए फॉरेंसिक और डॉक्टरों से संबंधित साक्ष्य भी अदालत के सामने प्रस्तुत किए गए।

कोर्ट में इन सबूतों पर टिका फैसला

विशेष लोक अभियोजक कीर्ति शर्मा और अशोक कुमार सोनी ने मामले में पैरवी की। अभियोजन पक्ष ने पुलिस जांच में जुटाए गए साक्ष्यों के आधार पर अपना पक्ष रखा। विशेष न्यायाधीश आलोक कुमार सक्सेना की अदालत ने मामले में उपलब्ध साक्ष्यों पर विचार करने के बाद छीतर गुर्जर को हत्या का दोषी माना। कोर्ट ने उसे उम्रकैद और 1,000 रुपए जुर्माने की सजा सुनाई। वहीं, मामले में शामिल 7 अन्य आरोपियों के खिलाफ पर्याप्त सबूत नहीं मिलने के कारण अदालत ने उन्हें बरी कर दिया।

पांच साल बाद आया फैसला

26 अगस्त 2021 को हुई इस घटना के बाद मामला न्यायिक प्रक्रिया में था। अब करीब पांच साल बाद आए फैसले में एक आरोपी को उम्रकैद मिली है, जबकि सात अन्य आरोपी बरी हो गए। इस तरह कन्हैयालाल भील हत्याकांड में अदालत ने उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर मुख्य आरोपी छीतर गुर्जर को दोषी ठहराया है। वहीं, अन्य 7 आरोपियों को सबूतों के अभाव में बरी किया ।

मामले की मुख्य बातें

  • घटना: 26 अगस्त 2021
  • स्थान: अथवाकलां फंटे, सिंगोली-नीमच रोड
  • मृतक: काना उर्फ कन्हैयालाल भील
  • दोषी ठहराया गया आरोपी: छीतर गुर्जर
  • सजा: उम्रकैद और 1,000 रुपए जुर्माना
  • अन्य आरोपी: 7 बरी
  • प्रमुख साक्ष्य: पिकअप, मोबाइल, चश्मदीदों के बयान, फॉरेंसिक और चिकित्सकीय साक्ष्य

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Aakash Sharma
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आकाश शर्मा मध्यप्रदेश के नीमच क्षेत्र में सक्रिय पत्रकार और द टाइम्स ऑफ MP के संपादक हैं। उन्हें प्रिंट मीडिया में 12 वर्षों का पत्रकारिता अनुभव है। लंबे समय से स्थानीय एवं जनसरोकार से जुड़े मुद्दों की रिपोर्टिंग, समाचार संपादन और समाचार प्रकाशन के क्षेत्र में सक्रिय रहते हुए उन्होंने स्थानीय पत्रकारिता में व्यापक अनुभव हासिल किया है।द टाइम्स ऑफ MP के माध्यम से आकाश शर्मा नीमच, मंदसौर और आसपास के क्षेत्रों से जुड़ी महत्वपूर्ण खबरों को पाठकों तक पहुंचाने का कार्य करते हैं। उनकी कवरेज में स्थानीय प्रशासन, पुलिस एवं कानून-व्यवस्था, जनसमस्याएं, नागरिक सुविधाएं, राजनीति, सामाजिक गतिविधियां, शिक्षा, कृषि, व्यापार और अन्य जनहित से जुड़े विषय शामिल हैं।उनकी संपादकीय कार्यशैली में तथ्यपरक रिपोर्टिंग, स्रोत-आधारित जानकारी, निष्पक्ष प्रस्तुति और जिम्मेदार पत्रकारिता को प्राथमिकता दी जाती है। संवेदनशील और अपराध से जुड़े मामलों की रिपोर्टिंग में आरोप और प्रमाणित तथ्य के बीच अंतर बनाए रखने तथा उपलब्ध आधिकारिक एवं विश्वसनीय स्रोतों के आधार पर खबर प्रस्तुत करने पर विशेष ध्यान दिया जाता है।पत्रकारिता के साथ आकाश शर्मा पिछले 4 वर्षों से पैरा लीगल वॉलंटियर (PLV) के रूप में भी कार्य कर रहे हैं। इस भूमिका में वे कानूनी जागरूकता और जनहित से जुड़े कार्यों से जुड़े रहे हैं। इसके साथ ही वे इंटरनेशनल ह्यूमन सिक्योरिटी ऑर्गनाइजेशन में जिला उपाध्यक्ष (District Vice President) के दायित्व का निर्वहन कर रहे हैं।अनुभव 12 वर्ष — प्रिंट मीडिया एवं पत्रकारिता का अनुभव 4 वर्ष — पैरा लीगल वॉलंटियर (PLV) के रूप में अनुभव संपादक — द टाइम्स ऑफ MP जिला उपाध्यक्ष — इंटरनेशनल ह्यूमन सिक्योरिटी ऑर्गनाइजेशनआकाश शर्मा का उद्देश्य स्थानीय स्तर की महत्वपूर्ण सूचनाओं को विश्वसनीय, स्पष्ट, तथ्यपरक और जिम्मेदार पत्रकारिता के माध्यम से पाठकों तक पहुंचाना तथा आम नागरिकों से जुड़े मुद्दों को प्रभावी मंच प्रदान करना है।विशेषज्ञता: स्थानीय पत्रकारिता | प्रिंट मीडिया | समाचार संपादन | डिजिटल पत्रकारिता | स्थानीय समाचार रिपोर्टिंग | जनहित के मुद्दे | कानूनी जागरूकता |

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