Khatu Shyam Mela: 20% माल भी नहीं बिका, मेंटेनेंस निकालना भी भारी! जानिए मेला फीका रहने की 5 असली वजहें
Reported by: News Desk | Edited by: आकाश शर्मा
27 फ़रवरी 2026, (अपडेटेड 27 फ़रवरी 2026, 12:36 अपराह्न IST)

सीकर । हर साल फाल्गुन मास में राजस्थान के सीकर जिले में लगने वाले खाटू श्याम मेला (Khatu Shyam Mela) का नजारा अद्भुत होता है। लाखों की संख्या में श्रद्धालु अपने आराध्य बाबा श्याम के दर्शनों के लिए यहाँ खिंचे चले आते हैं। आम दिनों में भी जहाँ खाटू कस्बे में पैर रखने की जगह नहीं मिलती, वहीं इस बार के मुख्य मेले की तस्वीर बेहद चौंकाने वाली और व्यापारियों के लिए निराशाजनक है।

आलम यह है कि मेले में आए दुकानदारों का 20 प्रतिशत माल भी नहीं बिका है और रेस्ट हाउस संचालकों के लिए मेंटेनेंस का खर्च निकालना भी भारी पड़ रहा है। आइए ग्राउंड जीरो से समझते हैं कि आखिर इस बार खाटू श्याम मेला (Khatu Shyam Mela) में भीड़ कम क्यों है और इसके पीछे के 5 बड़े कारण क्या हैं।

व्यापारियों का छलका दर्द: “मेंटेनेंस भी नहीं निकल रहा”

खाटू कस्बे में इस समय सन्नाटा सा पसरा है। जो होटल और गेस्ट हाउस आम दिनों में फुल रहते थे, उनकी ऑक्यूपेंसी 50 प्रतिशत से भी नीचे गिर गई है।

रेस्ट हाउस का संचालन करने वाले मुकेश गढ़वाल बड़ी निराशा के साथ बताते हैं,

“इस बार तो काम बहुत ही मंदा चल रहा है। हमारा मेंटेनेंस का खर्चा भी बमुश्किल निकल पा रहा है। आम तौर पर इस समय मेला अपने पीक (चरम) पर होता है और सभी होटलें खचाखच भर जाती थीं। लेकिन इस बार सब कुछ सुनसान नजर आ रहा है।”

गलियों में खिलौने बेचने वाले रेहड़ी-ठेले वाले हेमराज  का दर्द भी कुछ ऐसा ही है। वे कहते हैं,

“हम दिनभर गलियों में घूम रहे हैं, लेकिन खरीददारी न के बराबर है। हमारा माल वैसे का वैसा पड़ा है, 20 प्रतिशत तक भी बिक्री नहीं हुई है। अब तो बाबा श्याम की कृपा होगी तभी माल बिकेगा। उम्मीद है कि आखिरी 2 दिनों में कुछ भीड़ आ जाए।”

एक अन्य होटल संचालक पवन पुजारी का नजरिया थोड़ा अलग है। उनका मानना है कि भीड़ तो आ रही है, लेकिन वह बंट गई है। श्रद्धालु अब खाटू में रुकने के बजाय सीधे दर्शन करके वापस लौट रहे हैं, जिससे स्थानीय व्यापार पूरी तरह से ठप पड़ गया है।

प्रशासन के दावे और जमीनी हकीकत में बड़ा अंतर

इस बार मेले में दुकानों पर पहले जैसी रौनक नहीं दिख रही है। ग्राहकों की कम संख्या से बहुत कम है।

एक तरफ जहाँ व्यापारी खाली बैठे हैं, वहीं प्रशासन और श्रीश्याम मंदिर कमेटी के आंकड़े अलग ही कहानी बयां कर रहे हैं। कमेटी का दावा है कि मेले के छठे दिन (26 फरवरी की दोपहर) तक करीब 10 लाख 35 हजार भक्त बाबा के दर्शन कर चुके हैं। लेकिन स्थानीय व्यापारिक विशेषज्ञ और ग्राउंड रिपोर्ट इन आंकड़ों को सिरे से खारिज कर रहे हैं।

खाटू श्याम मेला (Khatu Shyam Mela)  फीका रहने के 5 बड़े कारण

आखिर ऐसा क्या हुआ कि इस बार देश के सबसे बड़े मेलो में से एक खाटू श्याम मेला (Khatu Shyam Mela) की रौनक फीकी पड़ गई?  इसके 5 मुख्य कारण सामने आए हैं:

1. 45 किलोमीटर पैदल चलने की झूठी अफवाह

आजकल सोशल मीडिया रील्स का जमाना है। मेले से ठीक पहले इंटरनेट पर कुछ भ्रामक रील्स वायरल हो गईं, जिनमें दावा किया गया कि बाबा श्याम के दर्शन के लिए श्रद्धालुओं को 45 किलोमीटर तक पैदल चलना पड़ेगा।

इस अफवाह ने दूर-दराज से आने वाले भक्तों के मन में डर पैदा कर दिया। विडंबना यह रही कि स्थानीय प्रशासन और मंदिर कमेटी समय रहते इस भ्रम को तोड़ने में पूरी तरह नाकाम रहे।

2. खाटू-जयपुर प्राइवेट बसों की अचानक हड़ताल

मेला शुरू होने के महज दो दिन बाद, 23 फरवरी से खाटू और जयपुर के बीच चलने वाली प्राइवेट बसों ने हड़ताल कर दी। विवाद जयपुर में एंट्री को लेकर था। बस ऑपरेटरों की मांग थी कि मेले के दौरान उन्हें जयपुर के सिंधी कैंप बस स्टैंड तक जाने दिया जाए (वर्तमान में केवल हीरापुरा तक अनुमति है)।

ड्रॉपिंग पॉइंट को लेकर बस वालों और यात्रियों के बीच होने वाले रोज-रोज के विवाद और मारपीट के डर से भी कई श्रद्धालुओं ने अपनी यात्रा रद्द कर दी।

3. सीबीएसई और राजस्थान बोर्ड की परीक्षाएं

फरवरी-मार्च का महीना परीक्षाओं का होता है। इस समय राजस्थान बोर्ड (RBSE) और CBSE बोर्ड की परीक्षाएं सिर पर हैं। बच्चों के भविष्य को ध्यान में रखते हुए न केवल छात्र, बल्कि उनके माता-पिता भी इस बार खाटू की यात्रा करने से बच रहे हैं। इसका सीधा असर खाटू श्याम मेला (Khatu Shyam Mela) की भीड़ पर पड़ा है।

4. कस्बों से कोसों दूर बनाई गई पार्किंग

प्रशासन की एक और बड़ी चूक पार्किंग व्यवस्था रही है। श्रद्धालुओं के वाहनों के लिए 52 बीघा, सांवलपुरा, दांता रोड स्थित श्याम पाठशाला और रेनवाल रोड के सीतारामपुरा में 4 पार्किंग स्थल बनाए गए हैं। समस्या यह है कि ये सभी पार्किंग खाटू कस्बे से 2 से 4 किलोमीटर दूर हैं। इतनी लंबी दूरी पैदल तय करने की परेशानी से बचने के लिए श्रद्धालुओं ने मेले के बजाय आम दिनों में दर्शन करने का मन बना लिया है।

5. अत्यधिक बैरिकेडिंग और रास्तों की रुकावट

सुरक्षा के लिहाज से बैरिकेडिंग जरूरी है, लेकिन इस बार प्रशासन ने जगह-जगह रास्ते रोक दिए हैं। अत्यधिक बैरिकेडिंग के कारण जो श्रद्धालु आ भी रहे हैं, वे दुकानों पर रुक नहीं पा रहे हैं। उन्हें लगातार आगे बढ़ने के लिए मजबूर किया जा रहा है। जब श्रद्धालु रुकेंगे ही नहीं, तो खरीदारी कैसे होगी? यही वजह है कि मेले में भीड़ का ठहराव नहीं हो पा रहा है।

कुल मिलाकर, प्रशासन की अव्यवस्थाओं, सोशल मीडिया की अफवाहों और परिवहन की समस्याओं ने इस बार खाटू श्याम मेला (Khatu Shyam Mela) के रंग को फीका कर दिया है। अब देखना यह है कि मेले के अंतिम दिनों में बाबा के दर पर रौनक लौटती है या व्यापारियों को मायूसी के साथ ही अपनी दुकानें समेटनी पड़ेंगी।


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Aakash Sharma
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