2 साल पुराने किराएदार को मकान मालिक ने दिया झटका, डिपॉजिट से काट ली बड़ी रकम; वायरल हुआ ‘वियर एंड टियर’ का विवाद
Reported by: News Desk | Edited by: आकाश शर्मा
22 नवम्बर 2025, (अपडेटेड 22 नवम्बर 2025, 10:21 पूर्वाह्न IST)

डेस्क रिपोर्ट: शहरों में किराए के मकान में रहना और उसे छोड़ते वक्त अपना पूरा सिक्योरिटी डिपॉजिट (Security Deposit) वापस पाना, किसी जंग जीतने से कम नहीं है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म Reddit पर एक ऐसा ही मामला सामने आया है, जिसने किराएदारों और मकान मालिकों (Landlord-Tenant Dispute) के बीच सदियों पुरानी बहस को फिर से हवा दे दी है।

एक यूजर ने अपना दर्द साझा करते हुए बताया कि 2 साल तक एक फ्लैट में रहने के बाद, जब उसने मकान खाली किया, तो मकान मालिक ने 44,000 रुपये की सिक्योरिटी मनी में से 31,000 रुपये काट लिए।

क्या है पूरा मामला?

पीड़ित किराएदार के अनुसार, मकान मालिक ने हाल ही में अपनी प्रॉपर्टी बेच दी है। डिपॉजिट सेटलमेंट के दौरान, मालिक ने आरोप लगाया कि किराएदार ने घर को ‘बर्बाद’ (Damage) कर दिया है। इसी आधार पर 44 हजार में से 31 हजार रुपये रोक लिए गए।

किराएदार का तर्क है कि जो भी नुकसान हुआ है, वह ‘नॉर्मल वियर एंड टियर’ (Normal wear and tear) यानी समय के साथ होने वाली सामान्य टूट-फूट की श्रेणी में आता है। दीवारों का पेंट फीका पड़ना या मामूली खरोंचें आना 2 साल के प्रवास में स्वाभाविक हैं, जिसके लिए इतना भारी जुर्माना नहीं लगाया जा सकता।

सोशल मीडिया पर फूटा गुस्सा, मिले कानूनी सुझाव

इस पोस्ट के वायरल होते ही इंटरनेट यूजर्स ने मकान मालिक के रवैये को ‘लूट’ करार दिया। कई लोगों ने इसे धोखाधड़ी बताते हुए पुलिस में शिकायत दर्ज कराने की सलाह दी।

  • फेक बिल का खेल: एक यूजर ने सलाह दी, “जितने पैसे काटे गए हैं, उसका पक्का बिल मांगें। अगर मकान मालिक बिल नहीं देता या फर्जी बिल थमाता है, तो धोखाधड़ी की FIR दर्ज करवाएं।”

  • पुलिस का डर: एक अन्य यूजर ने कहा कि स्थानीय पुलिस स्टेशन में एक शिकायत और पुलिस की एक कॉल ही मकान मालिक को सीधा करने के लिए काफी है।

वकील की सलाह: किराएदार के पास क्या हैं अधिकार?

चर्चा के बीच एक वकील ने बेहद अहम जानकारी साझा की, जो हर किराएदार के काम आ सकती है:

“किराएदार केवल लापरवाही से हुए नुकसान (Negligent Damage) के लिए जिम्मेदार है, सामान्य टूट-फूट के लिए नहीं। आप मकान मालिक से मरम्मत का ‘आइटमाइज्ड बिल’ (Itemized Bill) मांगें। अगर वह मना करे, तो लीगल नोटिस भेजें। जरूरत पड़ने पर सिविल कोर्ट का दरवाजा खटखटाया जा सकता है। सबूत के तौर पर घर खाली करते वक्त की फोटो और वीडियो हमेशा अपने पास रखें।”

 

 

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Aakash Sharma
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आकाश शर्मा मध्यप्रदेश के नीमच क्षेत्र में सक्रिय पत्रकार और द टाइम्स ऑफ MP के संपादक हैं। उन्हें प्रिंट मीडिया में 12 वर्षों का पत्रकारिता अनुभव है। लंबे समय से स्थानीय एवं जनसरोकार से जुड़े मुद्दों की रिपोर्टिंग, समाचार संपादन और समाचार प्रकाशन के क्षेत्र में सक्रिय रहते हुए उन्होंने स्थानीय पत्रकारिता में व्यापक अनुभव हासिल किया है।द टाइम्स ऑफ MP के माध्यम से आकाश शर्मा नीमच, मंदसौर और आसपास के क्षेत्रों से जुड़ी महत्वपूर्ण खबरों को पाठकों तक पहुंचाने का कार्य करते हैं। उनकी कवरेज में स्थानीय प्रशासन, पुलिस एवं कानून-व्यवस्था, जनसमस्याएं, नागरिक सुविधाएं, राजनीति, सामाजिक गतिविधियां, शिक्षा, कृषि, व्यापार और अन्य जनहित से जुड़े विषय शामिल हैं।उनकी संपादकीय कार्यशैली में तथ्यपरक रिपोर्टिंग, स्रोत-आधारित जानकारी, निष्पक्ष प्रस्तुति और जिम्मेदार पत्रकारिता को प्राथमिकता दी जाती है। संवेदनशील और अपराध से जुड़े मामलों की रिपोर्टिंग में आरोप और प्रमाणित तथ्य के बीच अंतर बनाए रखने तथा उपलब्ध आधिकारिक एवं विश्वसनीय स्रोतों के आधार पर खबर प्रस्तुत करने पर विशेष ध्यान दिया जाता है।पत्रकारिता के साथ आकाश शर्मा पिछले 4 वर्षों से पैरा लीगल वॉलंटियर (PLV) के रूप में भी कार्य कर रहे हैं। इस भूमिका में वे कानूनी जागरूकता और जनहित से जुड़े कार्यों से जुड़े रहे हैं। इसके साथ ही वे इंटरनेशनल ह्यूमन सिक्योरिटी ऑर्गनाइजेशन में जिला उपाध्यक्ष (District Vice President) के दायित्व का निर्वहन कर रहे हैं।अनुभव 12 वर्ष — प्रिंट मीडिया एवं पत्रकारिता का अनुभव 4 वर्ष — पैरा लीगल वॉलंटियर (PLV) के रूप में अनुभव संपादक — द टाइम्स ऑफ MP जिला उपाध्यक्ष — इंटरनेशनल ह्यूमन सिक्योरिटी ऑर्गनाइजेशनआकाश शर्मा का उद्देश्य स्थानीय स्तर की महत्वपूर्ण सूचनाओं को विश्वसनीय, स्पष्ट, तथ्यपरक और जिम्मेदार पत्रकारिता के माध्यम से पाठकों तक पहुंचाना तथा आम नागरिकों से जुड़े मुद्दों को प्रभावी मंच प्रदान करना है।विशेषज्ञता: स्थानीय पत्रकारिता | प्रिंट मीडिया | समाचार संपादन | डिजिटल पत्रकारिता | स्थानीय समाचार रिपोर्टिंग | जनहित के मुद्दे | कानूनी जागरूकता |

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