पिता का सपना था डॉक्टर, बेटे ने रील से खड़ा किया 3 करोड़ का साम्राज्य: पढ़िए Nadeem Iqbal की अद्भुत Makhana Business Success Story
Reported by: News Desk | Edited by: आकाश शर्मा
27 जनवरी 2026, (अपडेटेड 27 जनवरी 2026, 1:13 अपराह्न IST)

नीमच/कटिहार: अक्सर कहा जाता है कि अगर इरादों में जान हो, तो मंजिल खुद-ब-खुद कदम चूमती है। बिहार के कटिहार जिले से एक ऐसी ही दास्तां निकलकर सामने आई है, जो न केवल प्रेरणादायक है बल्कि भारत के टियर-2 और टियर-3 शहरों के युवाओं के लिए एक ‘केस स्टडी’ भी है। यह कहानी 24 वर्षीय नदीम इकबाल की है, जिन्होंने पारंपरिक थोक व्यापार को डिजिटल पंख लगाकर एक महीने में 3 करोड़ रुपये के टर्नओवर वाले साम्राज्य में बदल दिया। नदीम की यह यात्रा एक बेहतरीन Makhana Business Success Story के रूप में सामने आई है।

30 साल पुराने ढर्रे को दी नई दिशा

Makhana Business Success Story बिहार, जो दुनिया के कुल मखाना उत्पादन का लगभग 85% हिस्सा पैदा करता है, वहां मखाने का कारोबार दशकों से असंगठित (Unorganized) रहा है। नदीम के पिता, मुहम्मद रईस, पिछले 30 सालों से कटिहार में मखाने के थोक विक्रेता थे। पिता की आंखों में बेटे के लिए डॉक्टर बनने का सपना था। वे चाहते थे कि उनका बेटा स्टेथोस्कोप थामे, लेकिन नदीम की नब्ज बिजनेस की दुनिया को टटोल रही थी।

नोएडा से बीबीए (BBA) की पढ़ाई के दौरान नदीम को एक कॉलेज प्रोजेक्ट मिला। जब उन्होंने मखाना मार्केट पर रिसर्च की, तो उन्हें इस ‘सुपरफूड’ की असली ग्लोबल क्षमता का अंदाजा हुआ। उन्होंने देखा कि बिचौलियों (Middlemen) के कारण असली मुनाफा किसानों और उनके पिता जैसे व्यापारियों तक नहीं पहुंच पा रहा है। यहीं से एक नई Makhana Business Success Story की नींव पड़ी। 2024 में उन्होंने ‘नेचर्स मखाना’ (Nature’s Makhana) की शुरुआत की और पुश्तैनी काम को एक कॉर्पोरेट लुक देने की ठानी।

सप्लाई चेन में किया बड़ा बदलाव: खेत से सीधे वेयरहाउस

Makhana Business Success Story में नदीम की सफलता का सबसे बड़ा मंत्र उनका ‘बिजनेस मॉडल’ रहा। उन्होंने सबसे पहले सप्लाई चेन से उन बिचौलियों को बाहर का रास्ता दिखाया जो मोटा मुनाफा खा जाते थे। नदीम ने कटिहार के 50 से अधिक किसानों को सीधे अपने साथ जोड़ा।

एक कुशल रिपोर्टर की तरह जब हमने उनकी कार्यप्रणाली (Modus Operandi) को समझा, तो पता चला कि उन्होंने 100 लोगों की एक समर्पित टीम तैयार की है। यह टीम कच्चे मखाने को प्रोसेस करके ‘पॉप’ (लावा) बनाती है। इसके बाद नदीम ने वह किया जो पहले उनके पिता के समय में नहीं होता था— ‘ग्रेडिंग’। मखानों को उनके साइज और क्वालिटी के आधार पर छांटा जाने लगा।

दिल्ली के खारी बावली—जो एशिया की सबसे बड़ी मसाला मंडी है—वहां उन्होंने अपना वेयरहाउस स्थापित किया। सेल्स टीम के जरिए सीधे बड़े ब्रांड्स और बिजनेस घरानों से संपर्क साधा। इससे न केवल क्वालिटी कंट्रोल हुआ, बल्कि मार्केट में भरोसे का एक नया मानक (Standard) स्थापित हुआ।

Instagram Reels: 500 रुपये के विज्ञापन से करोड़ों का सफर

आज के दौर में सोशल मीडिया सिर्फ मनोरंजन नहीं, बल्कि ‘मोनेटाइजेशन’ का जरिया है। नदीम ने इसे बखूबी समझा। शुरुआत में उनका बिजनेस 1 करोड़ रुपये प्रति माह तक सीमित था, जिसे स्केल करने के लिए डिजिटल क्रांति की जरूरत थी।

नदीम ने इंस्टाग्राम का बेहद स्मार्ट उपयोग किया। खास बात यह रही कि उन्होंने ‘फेस वैल्यू’ की जगह ‘प्रोडक्ट वैल्यू’ पर जोर दिया। उन्होंने बिना अपना चेहरा दिखाए, मखाने की छंटनी, प्रोसेसिंग और पैकिंग की ‘Raw’ और ‘Authentic’ रील्स पोस्ट करनी शुरू कीं। मजे की बात यह है कि उन्होंने मात्र 500 रुपये के छोटे बजट वाले विज्ञापनों (Ads) से शुरुआत की।

परिणाम चौंकाने वाले थे। उनकी रील्स वायरल होने लगीं। एल्गोरिदम ने अपना काम किया और आज उनके इंस्टाग्राम हैंडल पर हर महीने 7-8 लाख व्यूज आते हैं। 10,000 व्यूज पर उन्हें देशभर से 100 से ज्यादा बी2बी (B2B) इंक्वायरी कॉल्स आती हैं। कश्मीर से लेकर गुजरात तक, 13 से ज्यादा राज्यों में नए क्लाइंट्स जोड़ने में इंस्टाग्राम ने गेम-चेंजर की भूमिका निभाई है।

3 करोड़ का रेवेन्यू और ‘वाइट लेबलिंग’ का मास्टरस्ट्रोक

Makhana Business Success Story में आज नदीम का स्टार्टअप हर महीने 3 करोड़ रुपये का रेवेन्यू जेनरेट कर रहा है। यह आंकड़ा किसी भी एमबीए ग्रेजुएट के लिए एक सपना हो सकता है, जिसे नदीम हकीकत में जी रहे हैं। उनकी कंपनी न केवल अपने ब्रांड ‘नेचर्स मखाना’ के तहत बिक्री करती है, बल्कि वे ‘वाइट लेबलिंग’ (White Labeling) की सुविधा भी दे रहे हैं। यानी, वे मखाना पैक करते हैं और बड़ी कंपनियां उस पर अपना लेबल लगाकर बेचती हैं। इससे उनका मुनाफा मार्जिन और क्लाइंट बेस दोनों सुरक्षित हो गए हैं।

नदीम का यह सफर साबित करता है कि अगर पारंपरिक खेती और व्यापार को आधुनिक तकनीक और स्मार्ट मार्केटिंग का साथ मिल जाए, तो बिहार का मखाना ग्लोबल ब्रांड्स को टक्कर दे सकता है। नदीम की यह Makhana Business Success Story आज हजारों युवाओं के लिए मिसाल है कि डॉक्टर या इंजीनियर बनना ही सफलता का एकमात्र पैमाना नहीं है।


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Aakash Sharma
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