नीम करोली बाबा का नाम आज भारत ही नहीं, बल्कि विदेशों में भी आध्यात्मिक चर्चा का हिस्सा है। बाबा से जुड़े कई चमत्कारिक प्रसंग और उनकी शिक्षाएं लोगों के बीच लोकप्रिय हैं। स्टीव जॉब्स, मार्क जुकरबर्ग, जूलिया रॉबर्ट्स और भारतीय क्रिकेटर विराट कोहली व अनुष्का शर्मा से उनका नाम जोड़ा जाता है। इसी बीच बाबा के जीवन पर आधारित फिल्म ‘हनुमान अंश’ की चर्चा ने एक बार फिर लोगों का ध्यान उनकी कहानी की ओर खींचा है।
दिए गए बॉक्स ऑफिस आंकड़ों के मुताबिक, करीब 1.75 से 2 करोड़ रुपये के बजट में बनी इस फिल्म ने 50 करोड़ रुपये से अधिक की वर्ल्डवाइड कमाई का आंकड़ा पार किया है। फिल्म में बाबा नीम करोली के जीवन और उनसे जुड़े आध्यात्मिक प्रसंगों को दिखाया गया है।
कम बजट की फिल्म ने बॉक्स ऑफिस पर बनाई पकड़
‘हनुमान अंश’ 7 अगस्त को सिनेमाघरों में रिलीज हुई थी। शुरुआती दौर में फिल्म की कमाई अपेक्षाकृत धीमी बताई गई, लेकिन दूसरे सप्ताह के बाद दर्शकों की प्रतिक्रिया और सोशल मीडिया पर चर्चा के कारण इसकी कमाई में तेजी आई। Sacnilk की बताई गई रिपोर्ट के अनुसार, फिल्म ने अपने चौथे सोमवार को 5.15 करोड़ रुपये का नेट कलेक्शन किया। इसके साथ भारत में फिल्म का कुल नेट कलेक्शन 45.28 करोड़ रुपये और ग्रॉस कलेक्शन 53.43 करोड़ रुपये बताया गया है।
वर्ल्डवाइड स्तर पर फिल्म के 50 करोड़ रुपये से अधिक कमाई करने की जानकारी दी गई है। फिल्म का निर्देशन विशाल चतुर्वेदी ने किया है और मुख्य भूमिका में शोभिनव सत्या हैं।हालांकि, बॉक्स ऑफिस के आंकड़ों और फिल्म के बजट से जुड़े आंकड़ों का अंतिम स्वतंत्र सत्यापन यहां उपलब्ध नहीं है।
कौन थे नीम करोली बाबा?
नीम करोली बाबा का वास्तविक नाम श्री लक्ष्मीनारायण शर्मा बताया जाता है। उनका जन्म लगभग 1900 में उत्तर प्रदेश के पास स्थित अकबरपुर गांव में हुआ था। उनका जीवन सादगी और आध्यात्मिक साधना से जुड़ा रहा। बताया जाता है कि उनका विवाह कम उम्र में हुआ था। बाद के जीवन में उन्होंने आध्यात्मिक मार्ग को अपनाया और उत्तर भारत के अलग-अलग क्षेत्रों में साधु के रूप में भ्रमण किया। उनसे जुड़े विवरणों में उनके दो पुत्र और एक पुत्री का भी उल्लेख मिलता है। बाबा को अलग-अलग स्थानों पर अलग-अलग नामों से पुकारे जाने की जानकारी भी सामने आती है।
‘नीम करोली’ नाम के पीछे क्या कहानी है?
नीम करोली बाबा के नाम से जुड़ा सबसे चर्चित प्रसंग एक ट्रेन से संबंधित है। कथा के अनुसार, एक बार बिना टिकट यात्रा करने के कारण उन्हें नीब करोली स्टेशन पर ट्रेन से उतार दिया गया। इसके बाद बाबा स्टेशन के पास बैठ गए और उन्होंने अपना चिमटा जमीन में गाड़ दिया। कथा के अनुसार, इसके बाद ट्रेन आगे नहीं बढ़ सकी। अधिकारियों और रेलवे कर्मचारियों के अनुरोध के बाद बाबा को ट्रेन में वापस बैठाया गया और ट्रेन चल पड़ी।
इसी प्रसंग को उनके नाम ‘नीम करोली बाबा’ से जोड़कर बताया जाता है। हालांकि, यह घटना मुख्य रूप से उनके अनुयायियों और उनसे जुड़ी लोककथाओं में वर्णित चमत्कारिक प्रसंग के रूप में सामने आती है।
मध्य प्रदेश के भोपाल से भी जुड़ा है संबंध
नीम करोली बाबा के जीवन से जुड़ी जानकारी में भोपाल का भी विशेष उल्लेख मिलता है। बाबा की अस्थियों का एक हिस्सा उनके परिवार के पास भोपाल में सुरक्षित बताया जाता है। बाबा ने 11 सितंबर 1973 को अनंत चतुर्दशी के दिन वृंदावन में देह त्याग किया था। उनकी समाधि के बाद अस्थियों के विसर्जन से जुड़ी जानकारी भी दी गई है, जबकि एक हिस्सा परिवार द्वारा भोपाल ले जाने का उल्लेख मिलता है।
बाबा के पोते डॉ. धनंजय शर्मा के हवाले से बताया गया है कि बाबा का भोपाल से आध्यात्मिक जुड़ाव था। वर्ष 1970 में उनके अरेरा कॉलोनी स्थित पारिवारिक घर में करीब 10 दिन रुकने की बात कही गई है। इस दौरान उनके नेवरी मंदिर जाने का भी उल्लेख मिलता है। परिवार की ओर से भोपाल में बाबा का मंदिर और आश्रम बनाने की तैयारी किए जाने की जानकारी भी दी गई है।
‘बुलेटप्रूफ कंबल’ से जुड़ा चर्चित प्रसंग
नीम करोली बाबा से जुड़ी कथाओं में एक कंबल का प्रसंग भी काफी चर्चित है। वर्ष 1943 में बाबा फतेहगढ़ में एक बुजुर्ग दंपत्ति के घर ठहरे थे।कथा में बताया गया है कि रात के समय बाबा कंबल के अंदर इस तरह कराह रहे थे, जैसे उन्हें कोई मार रहा हो। सुबह उन्होंने कंबल दंपत्ति को देकर उसे गंगा में बहाने के लिए कहा।
कहानी के अनुसार, कंबल में दंपत्ति को लोहे की भारी गोलियों जैसा कुछ महसूस हुआ। इसके करीब एक महीने बाद उनका बेटा द्वितीय विश्व युद्ध से सुरक्षित घर लौटा। बेटे ने कथित तौर पर युद्ध के दौरान गोलीबारी के बीच बच निकलने की बात बताई। यह प्रसंग बाबा से जुड़ी चमत्कारिक कथाओं में शामिल है। इसके स्वतंत्र ऐतिहासिक सत्यापन की जानकारी उपलब्ध नहीं है।
कैंची धाम से जुड़ा बाबा का नाम
कैंची धाम उत्तराखंड के नैनीताल के पास स्थित वह स्थान है, जिसे नीम करोली बाबा से विशेष रूप से जोड़ा जाता है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार बाबा पहली बार वर्ष 1961 में यहां पहुंचे थे। बताया जाता है कि उन्होंने अपने मित्र पूर्णानंद जी के साथ मिलकर वर्ष 1964 में आश्रम की स्थापना की। पहाड़ियों के बीच स्थित इस परिसर में हनुमान जी सहित कई मंदिरों का उल्लेख मिलता है। हर वर्ष 15 जून को कैंची धाम में मेले के आयोजन की जानकारी भी दी गई है। बाबा का समाधि स्थल वृंदावन से जुड़ा बताया जाता है।
स्टीव जॉब्स से विराट-अनुष्का तक नाम क्यों जुड़ा ?
नीम करोली बाबा की लोकप्रियता केवल भारत तक सीमित नहीं रही। उपलब्ध जानकारी में Apple के सह-संस्थापक स्टीव जॉब्स के वर्ष 1974 में कैंची धाम आने का उल्लेख है। उन्हें भारत में आध्यात्मिक शांति की तलाश के दौरान यहां आने से जोड़ा जाता है। इसी तरह Facebook के सह-संस्थापक मार्क जुकरबर्ग के भी कंपनी के शुरुआती दौर में कैंची धाम आने का उल्लेख मिलता है। हॉलीवुड अभिनेत्री जूलिया रॉबर्ट्स के बाबा की तस्वीर से प्रभावित होकर उनकी भक्त बनने की बात भी कही गई है। भारतीय क्रिकेटर विराट कोहली और अभिनेत्री अनुष्का शर्मा के भी कैंची धाम पहुंचने का उल्लेख इस सामग्री में किया गया है।
इन सभी हस्तियों से जुड़े व्यक्तिगत आध्यात्मिक अनुभवों के संबंध में अलग-अलग सार्वजनिक स्रोतों से पुष्टि आवश्यक है।
नीम करोली बाबा की बताई जाने वाली शिक्षाएं
बाबा नीम करोली की शिक्षाओं में प्रेम, सेवा, सत्य और आध्यात्मिक साधना को प्रमुख बताया जाता है। उपलब्ध सामग्री में उनके नाम से निम्न बातें बताई गई हैं:
- राम नाम का जाप: नियमित रूप से प्रभु श्रीराम का स्मरण करने पर जोर दिया गया है।
- पूजा-अर्चना: भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की श्रद्धापूर्वक पूजा करने की बात कही गई है।
- ध्यान: सुबह ध्यान और आध्यात्मिक साधना को महत्व दिया गया है।
- गौ सेवा: घर की पहली रोटी गौ सेवा के लिए देने की सीख का उल्लेख है।
- मौन का अभ्यास: कुछ समय मौन रहने से आत्मबल और एकाग्रता बढ़ने की बात कही गई है।
- प्रेम और सत्य: बिना भेदभाव के लोगों से प्रेम करने और सत्य के मार्ग पर चलने का संदेश दिया गया है।
क्यों चर्चा में हैं नीम करोली बाबा ?
आज नीम करोली बाबा का नाम मुख्य रूप से कैंची धाम, उनकी आध्यात्मिक शिक्षाओं, उनसे जुड़े चमत्कारिक प्रसंगों और चर्चित हस्तियों से जुड़े संदर्भों के कारण चर्चा में रहता है। ‘हनुमान अंश’ फिल्म की सफलता ने उनके जीवन और व्यक्तित्व को लेकर लोगों की रुचि को फिर बढ़ाया है।
फिल्म की कहानी और बाबा से जुड़ी कथाओं में आस्था का महत्वपूर्ण स्थान है। इसलिए चमत्कारों से जुड़े प्रसंगों को ऐतिहासिक तथ्य के बजाय संबंधित परंपराओं और कथाओं के संदर्भ में देखना जरूरी है।
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