बिज़नेस डेस्क (Silver vs Gold) | सोने और चांदी की कीमतों में बड़ी गिरावट के बाद अब बाजार में आगे की दिशा को लेकर नए सिरे से चर्चा शुरू हो गई है। Monarch PMS के विश्लेषण के मुताबिक, मौजूदा परिस्थितियों में चांदी में तेजी की गुंजाइश बनी हुई है। रिपोर्ट में कम फिजिकल इन्वेंट्री, बढ़ती निवेश मांग और सिल्वर मार्केट में मौजूद पेपर लेवरेज को संभावित तेजी के प्रमुख कारणों में गिना गया है।
बुधवार के शुरुआती कारोबार में सोने और चांदी दोनों की कीमतों में कमजोरी देखने को मिली। COMEX पर सोना 0.41 फीसदी गिरकर 4,420.80 डॉलर प्रति औंस पर आ गया, जबकि चांदी 0.21 फीसदी गिरकर 66.86 डॉलर प्रति औंस पर पहुंची। इस दौरान ब्रेंट क्रूड 1.6 फीसदी बढ़कर 99.49 डॉलर प्रति बैरल और WTI 1.72 फीसदी बढ़कर 94.63 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया।
ऐसे माहौल में सवाल यह है कि हालिया गिरावट के बाद क्या चांदी में तेजी का अगला दौर शुरू हो सकता है?
चांदी की सबसे बड़ी ताकत बनी फिजिकल कमी

Monarch PMS के मुताबिक, चांदी लगातार छठे साल फिजिकल डेफिसिट की स्थिति में है। 2026 में यह कमी 46.3 मिलियन औंस रहने का अनुमान लगाया गया है। यह आंकड़ा 2025 में अनुमानित 40.3 मिलियन औंस की कमी से भी ज्यादा है। रिपोर्ट के मुताबिक, 2021 से अब तक कुल 762 मिलियन औंस चांदी मौजूदा स्टॉक से निकाली जा चुकी है। दूसरी तरफ सप्लाई बढ़ने की रफ्तार असामान्य रूप से धीमी बनी हुई है।
2015 से ग्लोबल माइन प्रोडक्शन लगभग 830-850 मिलियन औंस सालाना के आसपास स्थिर रहने की बात कही गई है। चांदी का बड़ा हिस्सा तांबा, सीसा और जस्ता खनन के बाय-प्रोडक्ट के तौर पर आता है। इस वजह से कीमतों में अचानक तेजी आने पर भी बाजार में नई चांदी की सप्लाई तुरंत बढ़ाना आसान नहीं है।
नई खदानों से सप्लाई आने में लग सकता है लंबा समय
Monarch PMS के विश्लेषण के अनुसार, नई खदान को परमिट मिलने से लेकर उत्पादन शुरू होने तक लगभग एक दशक लग सकता है। इसका मतलब है कि ऊंची कीमतें बाजार में तुरंत अतिरिक्त चांदी उपलब्ध नहीं करा सकतीं। यही संरचनात्मक बाधा चांदी में तेजी के संभावित आधार को मजबूत करने वाली प्रमुख वजहों में से एक बताई गई है।
सोलर पैनल की मांग घटी, फिर भी कमी क्यों नहीं हुई?
चांदी के बाजार के लिए सोलर सेक्टर महत्वपूर्ण है। लेकिन इसी क्षेत्र से जुड़ी मांग में कमी भी सामने आई है। 2025 में फोटोवोल्टिक चांदी की खपत में 6 फीसदी गिरावट के बाद 2026 में इसके 19 फीसदी घटकर करीब 151 मिलियन औंस रहने का अनुमान है। हालांकि, Monarch PMS का कहना है कि इस गिरावट की मुख्य वजह थ्रिफ्टिंग है। यानी प्रत्येक सोलर सेल में चांदी की मात्रा कम की जा रही है। इसे पूरी तरह किसी अन्य मेटल से चांदी को बदलने की प्रक्रिया नहीं माना गया है।
चांदी के इस्तेमाल को एक सीमा से ज्यादा कम करने पर सोलर सेल की क्षमता और विश्वसनीयता प्रभावित हो सकती है। मुख्य TOPCon टेक्नोलॉजी में कॉपर के इस्तेमाल की शुरुआत बड़े पैमाने पर 2028-30 से पहले होने की उम्मीद नहीं बताई गई है। सबसे अहम बात यह है कि फोटोवोल्टिक मांग में गिरावट के बावजूद चांदी का फिजिकल डेफिसिट बढ़ने का अनुमान है। Monarch PMS के अनुसार, यह सप्लाई साइड की कमजोरी को दर्शाता है।
पेपर लेवरेज से तेजी और गिरावट दोनों तेज हो सकती हैं
सिल्वर मार्केट का एक और महत्वपूर्ण पहलू इसका पेपर लेवरेज है। COMEX में रजिस्टर्ड इन्वेंट्री करीब 96 मिलियन औंस बताई गई है। यह बकाया पेपर क्लेम के मुकाबले करीब 17.8 फीसदी कवरेज और लगभग 5.6 गुना अनुमानित पेपर लेवरेज को दर्शाती है। यह लेवरेज बाजार में दोनों दिशाओं में असर डाल सकता है। इसी मार्केट स्ट्रक्चर ने जनवरी में 121.64 डॉलर प्रति औंस के पीक से जून में करीब 57.6 डॉलर तक चांदी की गिरावट में भूमिका निभाई।
यानी चांदी अपने पीक से करीब 53 फीसदी नीचे आ चुकी है। लेकिन Monarch PMS का मानना है कि अगर फिजिकल उपलब्धता कम रहती है और निवेश मांग वापस आती है, तो यही लेवरेज्ड मार्केट स्ट्रक्चर कीमतों में तेजी को भी तेज कर सकता है।
निवेश मांग बढ़ने से बदल सकता है बाजार का मूड
Monarch PMS के अनुमान के मुताबिक, 2026 में फिजिकल सिल्वर निवेश की मांग 20 फीसदी बढ़कर 227 मिलियन औंस हो सकती है। अमेरिकी रिटेल मांग में भी 57 फीसदी रिकवरी का अनुमान लगाया गया है। यही स्थिति चांदी के बाजार के लिए महत्वपूर्ण बनती है। एक तरफ सोलर सेक्टर में प्रति सेल कम चांदी इस्तेमाल होने की वजह से मांग घटने का अनुमान है, जबकि दूसरी तरफ निवेश मांग बढ़ने की संभावना जताई गई है। यदि फिजिकल सप्लाई पहले से ही सीमित है और निवेशक मांग में सुधार आता है, तो कीमतों पर इसका असर अधिक दिखाई दे सकता है।
सोने से चांदी क्यों बेहतर दिख रही है?
Monarch PMS के वैल्यूएशन फ्रेमवर्क में चांदी की अनुमानित रेंज 54-77 डॉलर प्रति औंस बताई गई है। इसका मिडपॉइंट 65 डॉलर है। 6 अगस्त के आंकड़ों के अनुसार, चांदी 61.7 के डॉलर स्तर पर इस मिडपॉइंट से लगभग 6 फीसदी नीचे थी। इसके उलट, सोना अपने 3,922 डॉलर के मिडपॉइंट से करीब 8 फीसदी ऊपर 4,242 डॉलर पर था।
इस तुलना के आधार पर Monarch PMS का मानना है कि चांदी का रिस्क-रिवॉर्ड प्रोफाइल संभावित रूप से अधिक आकर्षक दिखाई देता है।
गोल्ड-सिल्वर रेश्यो भी दे रहा है संकेत
करेक्शन के बाद गोल्ड-सिल्वर रेश्यो करीब 46 गुना से बढ़कर लगभग 69 गुना पर पहुंचने की बात रिपोर्ट में कही गई है। Monarch PMS के अनुसार, लेवरेज के खत्म होने और गोल्ड-सिल्वर रेश्यो के रीसेट होने के बाद चांदी कीमती धातुओं की रैली के अगले चरण के लिए बेहतर स्थिति में हो सकती है। हालांकि, यहां जोखिम को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। चांदी सोने की तुलना में अधिक तेजी से बढ़ सकती है, लेकिन गिरावट की स्थिति में इसकी कीमत में ज्यादा उतार-चढ़ाव भी देखने को मिल सकता है।
क्या चांदी सोने से आगे निकल सकती है?
Monarch PMS के विश्लेषण में चांदी में तेजी की संभावना के पीछे कई कारण बताए गए हैं—फिजिकल सप्लाई की लगातार कमी, सीमित माइन प्रोडक्शन, नई खदानों से सप्लाई आने में लंबा समय, निवेश मांग में संभावित बढ़ोतरी और सिल्वर मार्केट में मौजूद पेपर लेवरेज।
2026 में 46.3 मिलियन औंस के फिजिकल डेफिसिट का अनुमान और 227 मिलियन औंस की फिजिकल निवेश मांग का अनुमान इस कहानी को और महत्वपूर्ण बनाता है। फिलहाल उपलब्ध विश्लेषण के आधार पर चांदी को कीमती धातुओं की अगली तेजी में बेहतर प्रदर्शन करने वाला विकल्प माना जा रहा है। लेकिन इसकी कीमतों में उतार-चढ़ाव का जोखिम भी सोने की तुलना में अधिक बताया गया है।
इसलिए बड़ा सवाल अब भी यही है—क्या हालिया 53 फीसदी की गिरावट चांदी के लिए कमजोरी का संकेत है या अगली तेजी से पहले का बड़ा रीसेट?
डिस्क्लेमर: यह खबर उपलब्ध कराए गए Monarch PMS के विश्लेषण और आंकड़ों पर आधारित है। इसमें दिए गए बाजार संबंधी अनुमान भविष्य की निश्चित गारंटी नहीं हैं। चांदी और अन्य कीमती धातुओं की कीमतों में उतार-चढ़ाव संभव है। पाठकों को किसी भी निवेश संबंधी निर्णय से पहले अपने स्तर पर जानकारी की जांच और योग्य वित्तीय सलाहकार से परामर्श करना चाहिए। The Times of MP किसी निवेश लाभ या नुकसान के लिए जिम्मेदार नहीं होगा।
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