नीमच। विद्यालय परिसर में पर्यावरण संरक्षण गतिविधि के अंतर्गत ‘प्रकृति वंदन’ कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में विद्यार्थियों ने प्रकृति पूजन एवं पौधों की वंदना के साथ पेड़-पौधों की रक्षा, अधिक से अधिक वृक्षारोपण और पर्यावरण संरक्षण का संकल्प लिया। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में नीमच निवासी कपिल गोयल उपस्थित रहे।
कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों को प्रकृति के महत्व और आने वाली पीढ़ियों के लिए पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकता के बारे में जानकारी दी गई। इस अवसर पर अमृता देवी बिश्नोई के पर्यावरण प्रेम और बलिदान की प्रेरक कहानी भी विद्यार्थियों को सुनाई गई।
प्रकृति पूजन के साथ हुआ कार्यक्रम का शुभारंभ
कार्यक्रम का शुभारंभ प्रकृति पूजन और पौधों की वंदना के साथ किया गया। मुख्य अतिथि कपिल गोयल ने विद्यार्थियों को प्रकृति के महत्व से अवगत कराया। कपिल गोयल मंडी व्यवसाय से जुड़े होने के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण गतिविधि के जिला संयोजक भी हैं। उन्होंने विद्यार्थियों से अधिक से अधिक पौधे लगाने और लगाए गए पौधों का संरक्षण करने का आह्वान किया।
उन्होंने प्रकृति को जीवन का आधार बताते हुए पर्यावरण को स्वच्छ और सुरक्षित रखने की आवश्यकता पर जोर दिया। विद्यार्थियों को यह संदेश दिया गया कि पेड़-पौधों का संरक्षण केवल वर्तमान के लिए नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए भी महत्वपूर्ण है।
विद्यार्थियों को दिया वृक्ष संरक्षण का संदेश
कार्यक्रम में विद्यार्थियों को पौधारोपण के साथ-साथ पौधों की देखभाल और संरक्षण के लिए प्रेरित किया गया। पर्यावरण को स्वच्छ एवं हरा-भरा बनाए रखने में प्रत्येक व्यक्ति की भूमिका पर भी जोर दिया गया। प्रकृति वंदन के माध्यम से विद्यार्थियों को प्रकृति के प्रति प्रेम, सम्मान और जिम्मेदारी की भावना विकसित करने का संदेश दिया गया।
अमृता देवी बिश्नोई के बलिदान की कहानी सुनाई
कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों को अमृता देवी बिश्नोई के अदम्य साहस और पर्यावरण प्रेम की प्रेरक कहानी सुनाई गई। कार्यक्रम में बताया गया कि राजस्थान के खेजड़ली गांव में पेड़ों को बचाने के लिए अमृता देवी बिश्नोई और अनेक बिश्नोई समाज के लोगों ने अपने प्राणों का बलिदान दिया था। वृक्षों की रक्षा के लिए अमृता देवी बिश्नोई ने अपना जीवन न्योछावर कर दिया।
उनके बलिदान के प्रसंग के माध्यम से विद्यार्थियों को पेड़ों और प्रकृति के प्रति संवेदनशील बनने के लिए प्रेरित किया गया। कार्यक्रम में बताया गया कि उनका पर्यावरण प्रेम आज भी वृक्ष संरक्षण और प्रकृति के प्रति समर्पण की प्रेरणा देता है।
प्रकृति संरक्षण का लिया संकल्प
कार्यक्रम के दौरान विद्यालय परिवार ने प्रकृति पूजन करते हुए पेड़-पौधों की रक्षा, अधिक से अधिक वृक्षारोपण और पर्यावरण संरक्षण का संकल्प लिया। विद्यार्थियों और विद्यालय परिवार ने प्रकृति को स्वच्छ एवं हरा-भरा रखने की दिशा में अपनी जिम्मेदारी निभाने का संकल्प भी लिया। कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों में पर्यावरण के प्रति जागरूकता और प्रकृति संरक्षण की भावना को मजबूत करना रहा।
विद्यालय परिवार की रही सहभागिता
कार्यक्रम में विद्यालय के प्राचार्य महेश गदले, आचार्य परिवार तथा भैया-बहिन उपस्थित रहे। आयोजन के दौरान विद्यार्थियों को प्रकृति के महत्व और वृक्ष संरक्षण की आवश्यकता से जोड़ने का प्रयास किया गया। कार्यक्रम के समापन पर प्रकृति के प्रति प्रेम, सम्मान और संरक्षण की भावना को आगे बढ़ाने का संदेश दिया गया।
ताज़ा ख़बरों का अपडेट सीधा अपने फोन पर पाने के लिए हमारे WhatsApp चैनल से जुड़ें।


