नीमच, 3 जुलाई 2026। कभी परिवार का खर्च चलाना भी राधा यादव के लिए बड़ी चुनौती हुआ करता था। सीमित आय के कारण बच्चों की पढ़ाई से लेकर घर की रोजमर्रा की जरूरतें पूरी करना आसान नहीं था। लेकिन आज वही राधा यादव आत्मनिर्भर उद्यमी के रूप में अपनी अलग पहचान बना चुकी हैं। उनके जीवन में आया यह बदलाव किसी संयोग का नहीं, बल्कि सही समय पर मिले अवसर और मेहनत का परिणाम है।
जिला प्रशासन द्वारा जारी जानकारी के अनुसार, नीमच सिटी के वार्ड क्रमांक-5 निवासी राधा यादव ने मध्यप्रदेश शासन की संत रविदास स्वरोजगार योजना का लाभ लेकर अपने घर से लघु मसाला उद्योग की शुरुआत की। आज यह उद्योग न केवल उनके परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत कर रहा है, बल्कि अन्य महिलाओं के लिए भी रोजगार का माध्यम बन चुका है।
आर्थिक तंगी से जूझ रहा था परिवार
प्रशासन के मुताबिक, कुछ समय पहले तक राधा यादव का परिवार आर्थिक कठिनाइयों का सामना कर रहा था। सीमित संसाधनों के कारण घर का खर्च चलाना और बच्चों की शिक्षा जैसी जरूरी जिम्मेदारियों को पूरा करना आसान नहीं था।
ऐसे समय में उन्होंने स्वयं कुछ करने का निर्णय लिया, लेकिन पर्याप्त पूंजी की कमी उनके सामने सबसे बड़ी बाधा थी। इसी दौरान उन्हें संत रविदास स्वरोजगार योजना की जानकारी मिली।
2 लाख रुपये की सहायता बनी नई शुरुआत
जिला अंत्यावसायी कार्यालय, नीमच के माध्यम से राधा यादव को यूको बैंक, नीमच शाखा से 2 लाख रुपये का ऋण स्वीकृत हुआ। इस आर्थिक सहायता का उपयोग उन्होंने अपने घर पर मसाला उद्योग स्थापित करने में किया। शुरुआत छोटे स्तर से हुई, लेकिन लगातार मेहनत और व्यवसाय के प्रति समर्पण ने धीरे-धीरे उनके उद्योग को स्थिर आय का स्रोत बना दिया।
आज उनका मसाला उद्योग नियमित रूप से संचालित हो रहा है और प्रशासन के अनुसार वे हर महीने लगभग 10 से 12 हजार रुपये की आय अर्जित कर रही हैं।
अब बच्चों की पढ़ाई और भविष्य की चिंता कम
राधा यादव बताती हैं कि पहले परिवार की अधिकांश आय दैनिक जरूरतों में ही खर्च हो जाती थी। बचत करना लगभग असंभव था।लेकिन स्वरोजगार शुरू होने के बाद परिस्थितियां बदल गईं। अब वे बच्चों की शिक्षा, परिवार की आवश्यक जरूरतों और भविष्य की बचत पर भी ध्यान दे पा रही हैं। इससे पूरे परिवार में आर्थिक सुरक्षा की भावना मजबूत हुई है।
सिर्फ खुद नहीं बदलीं, दूसरी महिलाओं को भी दिया रोजगार
राधा यादव की सफलता केवल उनके परिवार तक सीमित नहीं रही। प्रशासन के अनुसार, उन्होंने अपने मसाला उद्योग के माध्यम से अन्य महिलाओं को भी रोजगार उपलब्ध कराया है। इससे स्थानीय स्तर पर महिला सशक्तिकरण और स्वरोजगार को बढ़ावा मिला है। उनके साथ जुड़ी महिलाओं को भी आय का एक नियमित स्रोत मिला है।
यह पहल दर्शाती है कि यदि सरकारी योजनाओं का सही उपयोग किया जाए तो एक छोटा उद्योग भी कई परिवारों के जीवन में सकारात्मक बदलाव ला सकता है।
क्या है संत रविदास स्वरोजगार योजना?
मध्यप्रदेश शासन की संत रविदास स्वरोजगार योजना का उद्देश्य अनुसूचित जाति वर्ग के पात्र हितग्राहियों को स्वरोजगार स्थापित करने के लिए बैंक ऋण और शासन की सहायता उपलब्ध कराना है।
योजना के माध्यम से लाभार्थियों को अपना व्यवसाय शुरू करने का अवसर मिलता है, जिससे वे आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बन सकें और स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर भी तैयार हों।
राधा यादव ने शासन और प्रशासन का जताया आभार
राधा यादव ने अपनी सफलता का श्रेय मध्यप्रदेश शासन, जिला प्रशासन, जिला अंत्यावसायी कार्यालय तथा यूको बैंक, नीमच शाखा को दिया है। उन्होंने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के प्रति भी आभार व्यक्त करते हुए कहा कि इस योजना ने उनके परिवार को नई उम्मीद दी और आर्थिक रूप से मजबूत बनने का अवसर प्रदान किया।
सरकारी योजना बनी बदलाव की मिसाल
जिला प्रशासन के अनुसार, राधा यादव की कहानी इस बात का उदाहरण है कि यदि पात्र हितग्राही सरकारी योजनाओं का लाभ लेकर मेहनत और लगन के साथ स्वरोजगार शुरू करें, तो वे न केवल अपने परिवार की आर्थिक स्थिति सुधार सकते हैं बल्कि अन्य लोगों के लिए भी रोजगार के अवसर तैयार कर सकते हैं।
आज राधा यादव की सफलता नीमच जिले में महिला उद्यमिता और आत्मनिर्भरता का एक प्रेरणादायक उदाहरण मानी जा रही है। उनका सफर यह संदेश देता है कि सही अवसर, दृढ़ संकल्प और निरंतर मेहनत किसी भी परिवार की तस्वीर बदल सकती है।
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