क्या रतनगढ़ रेलवे स्टेशन की मांग बदल देगी पूरे क्षेत्र की तस्वीर? रेल मंत्री तक पहुंचा बड़ा प्रस्ताव

रतनगढ़ (प्रदीप तिवारी)। प्रस्तावित नीमच-सिंगोली-बेगू-कोटा नई रेल लाइन परियोजना में रतनगढ़ रेलवे स्टेशन को शामिल करने की मांग अब जनआंदोलन का रूप लेती नजर आ रही है। क्षेत्र के नागरिकों ने भारत सरकार के रेल मंत्री के नाम ज्ञापन भेजकर रतनगढ़ में रेलवे स्टेशन स्थापित करने की मांग उठाई है। उनका कहना है कि यदि रतनगढ़ रेलवे स्टेशन को इस परियोजना में शामिल किया जाता है तो इससे धार्मिक पर्यटन, कृषि, व्यापार, शिक्षा और रोजगार सहित पूरे सीमावर्ती क्षेत्र के विकास को नई गति मिलेगी।

The Times of MP Advisement

टप्पा तहसील कार्यालय रतनगढ़ में आयोजित कार्यक्रम के दौरान क्षेत्र के जागरूक नागरिकों ने रेल मंत्री के नाम विस्तृत ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन का वाचन गोविंद सिंह सांडा ने किया, जबकि आभार इंजीनियर दिनेश सोलंकी ने व्यक्त किया। कार्यक्रम में मौजूद नागरिकों ने कहा कि रतनगढ़ रेलवे स्टेशन केवल एक स्टेशन की मांग नहीं, बल्कि वर्षों से क्षेत्रवासियों की विकास संबंधी अपेक्षाओं का प्रतीक है।

धार्मिक आस्था का प्रमुख केंद्र है रतनगढ़

ज्ञापन में बताया गया कि रतनगढ़ स्थित प्रसिद्ध श्री लक्ष्मीनाथ मंदिर मध्यप्रदेश, राजस्थान सहित देश के विभिन्न राज्यों से आने वाले श्रद्धालुओं की आस्था का प्रमुख केंद्र है। हर वर्ष बड़ी संख्या में श्रद्धालु यहां दर्शन के लिए पहुंचते हैं, लेकिन रेलवे सुविधा उपलब्ध नहीं होने के कारण उन्हें लंबी दूरी सड़क मार्ग से तय करनी पड़ती है।

नागरिकों का कहना है कि यदि रतनगढ़ रेलवे स्टेशन बनाया जाता है तो मंदिर आने वाले श्रद्धालुओं को सीधी रेल सुविधा मिल सकेगी। इससे धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा और क्षेत्र की पहचान राष्ट्रीय स्तर पर और मजबूत होगी।

किसानों और व्यापारियों के लिए बनेगा विकास का नया रास्ता

ज्ञापन में इस बात पर भी जोर दिया गया कि रतनगढ़ और आसपास का इलाका कृषि उत्पादन के लिए जाना जाता है। वर्तमान में किसानों को अपनी उपज बाजारों तक पहुंचाने के लिए सड़क परिवहन पर निर्भर रहना पड़ता है, जिससे समय और लागत दोनों बढ़ जाते हैं।

यदि रतनगढ़ रेलवे स्टेशन की स्थापना होती है तो किसानों को कृषि उपज के परिवहन का सस्ता और सुविधाजनक माध्यम मिलेगा। इससे परिवहन लागत कम होगी और किसानों को बड़े बाजारों तक पहुंचने का बेहतर अवसर मिलेगा।

स्थानीय व्यापारियों का भी मानना है कि रेलवे स्टेशन बनने से व्यापारिक गतिविधियों में तेजी आएगी। माल परिवहन आसान होने से स्थानीय उद्योगों और व्यापार को नई दिशा मिल सकती है।

युवाओं और विद्यार्थियों को मिलेगी बड़ी राहत

क्षेत्र के अनेक विद्यार्थी उच्च शिक्षा, प्रतियोगी परीक्षाओं और रोजगार के लिए इंदौर, कोटा, उज्जैन, भोपाल सहित अन्य शहरों की यात्रा करते हैं। रेल सुविधा नहीं होने के कारण उन्हें अतिरिक्त समय और खर्च उठाना पड़ता है।

ज्ञापन में कहा गया है कि रतनगढ़ रेलवे स्टेशन बनने से विद्यार्थियों और युवाओं को सुरक्षित, सुलभ और किफायती यात्रा सुविधा मिलेगी। इससे शिक्षा और रोजगार के अवसरों तक पहुंच पहले की तुलना में अधिक आसान हो जाएगी।

100 से अधिक गांवों को मिल सकता है सीधा लाभ

रतनगढ़ राजस्थान सीमा के निकट स्थित है और यह क्षेत्रीय दृष्टि से महत्वपूर्ण स्थान रखता है। नागरिकों के अनुसार यदि रतनगढ़ रेलवे स्टेशन स्थापित किया जाता है तो रतनगढ़, ऊमर, डीकेन, जाट, जावदा सहित मध्यप्रदेश और राजस्थान के सीमावर्ती क्षेत्रों के 100 से अधिक छोटे-बड़े गांवों के लाखों लोगों को इसका प्रत्यक्ष लाभ मिलेगा।

ग्रामीण क्षेत्रों की बेहतर रेल कनेक्टिविटी से व्यापार, शिक्षा, स्वास्थ्य सेवाओं और रोजगार के नए अवसर भी विकसित होने की संभावना जताई गई है।

रेलवे को भी होगा राजस्व लाभ

ज्ञापन में यह भी उल्लेख किया गया कि रतनगढ़ रेलवे स्टेशन बनने से केवल स्थानीय लोगों को ही सुविधा नहीं मिलेगी, बल्कि यात्रियों और माल परिवहन के माध्यम से भारतीय रेलवे के राजस्व में भी वृद्धि हो सकती है। श्रद्धालुओं, पर्यटकों और व्यापारिक गतिविधियों में बढ़ोतरी से रेलवे को नियमित यात्री और माल ढुलाई का लाभ मिलने की उम्मीद है।

वर्षों पुरानी मांग को मिला नया स्वर

क्षेत्र के नागरिकों ने ज्ञापन में कहा कि रतनगढ़ रेलवे स्टेशन की मांग लंबे समय से की जा रही है। उनका मानना है कि यह स्टेशन पूरे क्षेत्र के धार्मिक, कृषि, व्यापारिक, शैक्षणिक और पर्यटन विकास का मजबूत आधार बनेगा। उन्होंने रेल मंत्री से आग्रह किया कि जनहित और क्षेत्रीय विकास को प्राथमिकता देते हुए रतनगढ़ को प्रस्तावित रेल परियोजना में शामिल करने का निर्णय लिया जाए।

कार्यक्रम में इंजीनियर दिनेश सोलंकी, राजेश लढ़ा, शंभूभाई चारण, गोविंद सिंह सांडा, अनिल सोडानी, प्रहलाद सोनी उस्ताद, शब्बीर भाई कंठालिया, मोहम्मदी बोहरा नजमी, ओमप्रकाश सोनी, श्रीकांत छिपा, शाकिर शाह, अजय अरोड़ा, महेश टेलर, राकेश कमाली, पवन वर्मा, पत्रकार सुरेश साहू, ईश्वर व्यास, प्रकाश माली, प्रदीप तिवारी, निर्मल मूंदड़ा सहित बड़ी संख्या में नागरिक मौजूद रहे।


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