नीमच। सांस फूलना अगर केवल दौड़ने, भारी वजन उठाने या अधिक मेहनत करने के बाद हो तो इसे सामान्य माना जा सकता है। लेकिन यदि कुछ कदम चलने, सीढ़ियां चढ़ने, सामान्य काम करते समय या सीधे लेटते ही बार-बार सांस फूलना शुरू हो जाए तो इसे हल्के में लेना जोखिम भरा साबित हो सकता है। विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे लक्षण कई बार दिल से जुड़ी गंभीर समस्याओं की शुरुआती चेतावनी हो सकते हैं। समय रहते सही जांच और उपचार से कई गंभीर जटिलताओं को रोका जा सकता है।
आखिर क्यों होता है सांस फूलना?
दिल और फेफड़े मिलकर पूरे शरीर तक ऑक्सीजन युक्त रक्त पहुंचाने का काम करते हैं। जब किसी कारण से दिल की पंपिंग क्षमता प्रभावित होती है, तो शरीर के विभिन्न हिस्सों तक पर्याप्त ऑक्सीजन नहीं पहुंच पाती। इसके कारण फेफड़ों में तरल पदार्थ जमा होने लगता है और व्यक्ति को सांस लेने में कठिनाई महसूस हो सकती है।
हार्ट फेलियर, कोरोनरी आर्टरी डिजीज और हार्ट वाल्व से जुड़ी समस्याएं ऐसी स्थितियां हैं, जिनमें सांस फूलना प्रमुख लक्षण के रूप में सामने आ सकता है।
चलते या सीढ़ियां चढ़ते समय सांस फूलना क्यों है चिंता की बात?
कई लोग सामान्य चलने या कुछ सीढ़ियां चढ़ने के दौरान भी जल्दी थक जाते हैं और उनकी सांस फूलने लगती है। अक्सर इसे उम्र बढ़ने, कमजोरी या फिटनेस की कमी समझ लिया जाता है। हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह परेशानी लगातार बनी रहे या पहले की तुलना में बढ़ती जाए, तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।
जब दिल शरीर की जरूरत के अनुसार रक्त नहीं पहुंचा पाता, तब हल्की शारीरिक गतिविधि भी व्यक्ति के लिए कठिन हो सकती है। ऐसे में चलना, कपड़े पहनना या सामान्य बातचीत करना भी मुश्किल महसूस होने लगता है।
सीधे लेटते ही बढ़ जाती है परेशानी?
कुछ लोगों को बिस्तर पर सीधे लेटते ही सांस लेने में दिक्कत महसूस होती है। चिकित्सकीय भाषा में इस स्थिति को ऑर्थोपनिया कहा जाता है। विशेषज्ञों के अनुसार लेटने पर दिल और फेफड़ों की ओर रक्त का प्रवाह बढ़ जाता है। यदि दिल पहले से कमजोर हो, तो यह अतिरिक्त दबाव फेफड़ों में कंजेशन बढ़ा सकता है, जिससे सांस लेना और कठिन हो जाता है।
कुछ मरीज रात में अचानक सांस लेने के लिए हांफते हुए उठ जाते हैं। यह स्थिति भी दिल की कार्यक्षमता में कमी का संकेत हो सकती है।
सीने में दर्द और सांस फूलना साथ हो तो तुरंत सतर्क हो जाएं
यदि सांस फूलना के साथ सीने में दर्द, दबाव या भारीपन महसूस हो रहा है, तो यह कोरोनरी आर्टरी डिजीज जैसी गंभीर समस्या का संकेत हो सकता है। इस स्थिति में हृदय की धमनियां संकरी हो जाती हैं, जिससे हृदय की मांसपेशियों तक पर्याप्त रक्त नहीं पहुंच पाता। परिणामस्वरूप मरीज को सीने में दर्द, सांस लेने में तकलीफ और कमजोरी जैसी शिकायतें हो सकती हैं।
ऐसे लक्षणों को कभी भी सामान्य गैस, थकान या तनाव समझकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।
दिल की धड़कन तेज होना भी हो सकता है संकेत
हार्ट रिदम डिसऑर्डर यानी एरिथमिया भी सांस फूलना का कारण बन सकता है। इस स्थिति में व्यक्ति को तेज धड़कन महसूस होना, चक्कर आना, अत्यधिक थकान और सांस लेने में परेशानी जैसी समस्याएं हो सकती हैं। इसके अलावा माइट्रल वाल्व या एओर्टिक वाल्व से जुड़ी बीमारियां भी रक्त संचार को प्रभावित कर सकती हैं और दिल पर अतिरिक्त दबाव डाल सकती हैं।
हार्ट फेलियर में क्यों बढ़ जाती है सांस की तकलीफ?
जब दिल की पंपिंग क्षमता लगातार कम होने लगती है, तो शरीर और फेफड़ों में तरल पदार्थ जमा होने लगता है। यही कारण है कि मरीज को लगातार सांस फूलना, पैरों में सूजन, सीने में भारीपन और अनियमित धड़कन जैसी परेशानियां महसूस हो सकती हैं।
यदि इन लक्षणों की समय पर पहचान हो जाए तो इलाज शुरू करके स्थिति को गंभीर होने से काफी हद तक रोका जा सकता है।
हर बार हार्ट की बीमारी नहीं होती वजह
सांस फूलना केवल दिल की बीमारी के कारण ही नहीं होता। कई बार एंग्जायटी, फेफड़ों का संक्रमण या अन्य श्वसन संबंधी बीमारियों में भी ऐसे लक्षण दिखाई दे सकते हैं। हालांकि यदि यह समस्या बार-बार हो रही हो, लगातार बढ़ रही हो या इसके साथ सीने में दर्द, तेज धड़कन या कमजोरी महसूस हो रही हो, तो डॉक्टर से जांच जरूर करानी चाहिए।
किन लक्षणों पर तुरंत डॉक्टर से मिलना चाहिए?
निम्न स्थितियों में बिना देरी किए चिकित्सकीय सहायता लेना जरूरी है—
- आराम करते समय भी सांस फूलना
- अचानक सांस लेने में गंभीर तकलीफ
- सीने में दर्द या दबाव
- बहुत ज्यादा पसीना आना
- चक्कर आना या बेहोशी
- दर्द का जबड़े, गर्दन या हाथ तक फैलना
- पैरों में सूजन और लगातार थकान
ऐसे लक्षण गंभीर हृदय या फेफड़ों की बीमारी का संकेत हो सकते हैं और समय पर इलाज मरीज की जान बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
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