1.10 लाख का बंपर मुनाफा! नीमच के किसान ने Turmeric Farming से बदली किस्मत
Reported by: News Desk | Edited by: आकाश शर्मा
19 फ़रवरी 2026, (अपडेटेड 19 फ़रवरी 2026, 5:53 अपराह्न IST)

नीमच: खेती में अगर सही मार्गदर्शन, उन्नत तकनीक और थोड़ी हिम्मत का तड़का लगा दिया जाए, तो मिट्टी से भी सोना उगाया जा सकता है। मध्य प्रदेश के नीमच जिले के एक छोटे से गांव के किसान ने इस बात को सच साबित कर दिखाया है। लगातार पारंपरिक फसलों से नुकसान झेल रहे किसान लादूराम माली ने जब लीक से हटकर हल्दी की खेती (Turmeric Farming) का रुख किया, तो उनकी किस्मत ही बदल गई। महज डेढ़ बीघा जमीन से उन्होंने 1.10 लाख रुपये का शुद्ध मुनाफा कमाकर इलाके के अन्य किसानों के सामने एक बेहतरीन मिसाल पेश की है।

आइए विस्तार से जानते हैं कि कैसे एक आम किसान ने औषधीय फसल और सरकारी योजनाओं की मदद से अपनी तकदीर की नई कहानी लिखी।

पारंपरिक खेती से हो रहा था मोहभंग

नीमच जिले के जावद विकासखंड के अंतर्गत आने वाली ग्राम पंचायत बधावा के गांव कसमारिया के रहने वाले किसान श्री लादूराम माली सालों से खेती-किसानी के काम से जुड़े हैं। पहले वे अपने खेतों में परम्परागत रूप से मूंगफली, सोयाबीन और मक्का जैसी ही फसलें बोया करते थे। लेकिन पिछले कुछ सालों से प्रकृति की मार और सीमित वर्षा के कारण पानी की भारी कमी होने लगी थी।

इन पारंपरिक फसलों में लागत लगातार बढ़ रही थी, लेकिन जब फसल कटकर मंडी पहुंचती, तो अपेक्षित आय नहीं हो पाती थी। कड़ी मेहनत के बावजूद हाथ में नाममात्र का मुनाफा आता था, जिससे परिवार का भरण-पोषण मुश्किल होने लगा था।

वाटरशेड योजना और अधिकारियों का मिला सही मार्गदर्शन

इसी निराशा के बीच लादूराम के लिए ‘प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना’ (वाटरशेड) एक नई किरण बनकर आई। नीमच के कलेक्टर श्री हिमांशु चंद्रा और जिला पंचायत सीईओ श्री अमन वैष्णव के कुशल मार्गदर्शन में वाटरशेड टीम ने जिले के किसानों को जागरूक करने का अभियान चलाया।

टीम ने कसमारिया गांव का दौरा किया और किसानों को पारंपरिक खेती के बजाय औषधीय और सब्जी आधारित फसलें लगाने की तकनीकी सलाह दी। उन्हें फील्ड पर ले जाकर मार्गदर्शन और प्रशिक्षण दिया गया। यहीं से लादूराम को हल्दी की खेती (Turmeric Farming)  यानी हल्दी की उन्नत खेती के बारे में पता चला। उन्होंने तय किया कि वह अब नुकसान का सौदा नहीं करेंगे और अपनी 1.50 बीघा जमीन पर हल्दी उगाएंगे।

उन्नत तकनीक से की हल्दी की खेती (Turmeric Farming) की शुरुआत

सरकारी योजना ने लादूराम का सिर्फ हौसला ही नहीं बढ़ाया, बल्कि उन्हें आर्थिक मदद भी दी। वाटरशेड योजना के तहत उन्हें 23,200 रुपये की वित्तीय सहायता प्रदान की गई। इस फंड और कृषि विशेषज्ञों की सलाह का लादूराम ने बेहद स्मार्ट तरीके से इस्तेमाल किया।

उन्होंने अपनी डेढ़ बीघा जमीन पर हल्दी की खेती (Turmeric Farming) के लिए निम्नलिखित वैज्ञानिक तरीके अपनाए:

  • उन्नत बीजों का चयन: कृषि विशेषज्ञों की सलाह पर अधिक पैदावार देने वाले हल्दी के उन्नत बीजों का चुनाव किया।

  • मल्चिंग तकनीक का प्रयोग: खेत में नमी बनाए रखने और खरपतवार को रोकने के लिए मल्चिंग शीट का उपयोग किया।

  • जल संरक्षण और सिंचाई: पानी की कमी से निपटने के लिए ‘मिनी स्प्रिंकलर’ सिंचाई साधन लगाए गए, जिससे पानी की भारी बचत हुई और फसल को पर्याप्त नमी मिली।

  • जैविक और रासायनिक खाद का संतुलन: सिर्फ यूरिया या डीएपी पर निर्भर रहने के बजाय उन्होंने जैविक खाद और संतुलित कीटनाशकों का वैज्ञानिक तरीके से उपयोग किया।

लागत और बंपर मुनाफे का पूरा गणित

अगर हम लादूराम की हल्दी की खेती (Turmeric Farming)  के आर्थिक गणित को समझें, तो यह किसी भी किसान को हैरान कर सकता है। मल्चिंग, बीज, सिंचाई उपकरण, खाद और श्रम को मिलाकर उनकी कुल लागत लगभग 70 से 75 हजार रुपये आई।

जब फसल तैयार हुई, तो उन्नत तकनीक और जल संरक्षण उपायों के कारण हल्दी की गुणवत्ता और उत्पादन दोनों में रिकॉर्ड वृद्धि देखने को मिली। लादूराम ने अपनी इस शानदार उपज को बेगूं, सिंगोली और नीमच की प्रमुख मंडियों में बेचा। उच्च गुणवत्ता की हल्दी होने के कारण उन्हें बाजार में इसके बहुत अच्छे भाव मिले।

पूरी उपज बेचने के बाद उन्हें लगभग 1.85 लाख रुपये की शानदार आय प्राप्त हुई। अगर इसमें से 75 हजार रुपये की अधिकतम लागत को घटा दिया जाए, तो लादूराम को मात्र 1.50 बीघा जमीन से लगभग 1.10 लाख रुपये का ‘शुद्ध मुनाफा’ (Net Profit) हुआ है।

अन्य किसानों के लिए बने प्रेरणास्रोत

जो लादूराम कल तक मक्का और सोयाबीन की खेती में घाटा खाकर निराश थे, आज वह पूरे जावद ब्लॉक के लिए एक ‘पोस्टर बॉय’ बन गए हैं। उनकी यह सफलता आसपास के दर्जनों किसानों के लिए प्रेरणादायी साबित हो रही है। अब कसमारिया और आसपास के गांवों के अन्य किसान भी लादूराम के खेत पर आते हैं और उनसे हल्दी की खेती (Turmeric Farming) के गुर सीख रहे हैं।

हल्दी की खेती (Turmeric Farming) यह सफलता की कहानी साबित करती है कि यदि किसान सरकारी योजनाओं का सही लाभ उठाएं और वैज्ञानिक तरीकों को अपनाकर नगदी और औषधीय फसलें की ओर मुड़ें, तो खेती आज भी एक बेहद फायदे का सौदा है।


यह भी पढ़ें: नीमच में खनिज माफिया पर बड़ी स्ट्राइक: अवैध उत्खनन और परिवहन करते 5 वाहन जब्त, प्रशासन की सख्त घेराबंदी

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Aakash Sharma
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