नीमच। गर्मी का मौसम शुरू होते ही सबसे ज्यादा असर वाहनों पर दिखाई देने लगता है। लगातार बढ़ता तापमान, लंबे ट्रैफिक जाम और घंटों की ड्राइविंग कार के इंजन पर सीधा असर डालती है। ऐसे मौसम में कार इंजन ओवरहीट होना एक आम लेकिन बेहद गंभीर समस्या बन चुकी है। कई लोग शुरुआत में मिलने वाले संकेतों को नजरअंदाज कर देते हैं और बाद में उन्हें भारी नुकसान उठाना पड़ता है। समय रहते सावधानी नहीं बरती गई तो इंजन सीज होने तक की नौबत आ सकती है, जिसकी मरम्मत में हजारों नहीं बल्कि लाखों रुपये तक खर्च हो सकते हैं।
कार इंजन ओवरहीट होने के संकेतों को भूलकर भी नजरअंदाज न करें
अक्सर ड्राइविंग के दौरान कार अचानक संकेत देने लगती है कि इंजन सामान्य से ज्यादा गर्म हो रहा है। Temperature Gauge का तेजी से ऊपर जाना, बोनट से हल्की भाप निकलना, इंजन की आवाज बदलना या AC की कूलिंग कम होना ऐसे संकेत हैं जिन्हें हल्के में लेना भारी पड़ सकता है।
अगर आपको लगे कि कार इंजन ओवरहीट हो रहा है, तो तुरंत कार को सुरक्षित जगह पर रोक देना चाहिए। कई लोग जल्दबाजी में गाड़ी चलाते रहते हैं, जिससे इंजन के अंदरूनी हिस्सों पर अत्यधिक दबाव पड़ता है। यही लापरवाही बाद में इंजन फेल होने की वजह बनती है।
गर्म इंजन में तुरंत रेडिएटर खोलना पड़ सकता है भारी
बहुत से लोग इंजन गर्म होते ही तुरंत बोनट खोलकर रेडिएटर कैप हटाने लगते हैं। यह सबसे खतरनाक गलतियों में से एक मानी जाती है। जब इंजन ओवरहीट होता है, तब रेडिएटर के अंदर कूलेंट और भाप का प्रेशर काफी ज्यादा होता है।
ऐसे में अचानक कैप खोलने पर उबलता हुआ कूलेंट बाहर निकल सकता है और गंभीर चोट पहुंचा सकता है। इसलिए अगर कार इंजन ओवरहीट हो जाए तो सबसे पहले इंजन बंद करें और उसे कम से कम 20 से 30 मिनट तक ठंडा होने दें। उसके बाद ही कूलेंट या रेडिएटर की जांच करें।
सिर्फ पानी डालना नहीं, सही कूलेंट इस्तेमाल करना जरूरी
कई लोग कार में कूलेंट खत्म होने पर सिर्फ साधारण पानी डाल देते हैं। शुरुआत में यह तरीका सही लग सकता है, लेकिन लंबे समय में इससे इंजन पर असर पड़ता है। कंपनी द्वारा रिकमेंडेड कूलेंट इंजन के तापमान को नियंत्रित रखने में मदद करता है और कूलिंग सिस्टम को बेहतर तरीके से काम करने देता है।
ऑटो एक्सपर्ट्स का कहना है कि लगातार होने वाली कार इंजन ओवरहीट समस्या के पीछे सबसे बड़ी वजह कम कूलेंट या खराब क्वालिटी का कूलेंट होता है। इसलिए लंबी यात्रा पर निकलने से पहले कूलेंट लेवल जरूर चेक करें।
लगातार AC चलाना भी बढ़ा सकता है परेशानी
भीषण गर्मी में लोग लगातार फुल AC चलाते हैं, लेकिन इससे इंजन पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है। खासकर जब कार ट्रैफिक जाम में फंसी हो, तब इंजन ज्यादा गर्म होने लगता है।
अगर आपको लगे कि कार इंजन ओवरहीट हो रहा है तो कुछ समय के लिए AC बंद कर देना चाहिए। सिर्फ ब्लोअर चलाने से इंजन पर लोड कम होता है और तापमान धीरे-धीरे सामान्य होने लगता है।
रेडिएटर फैन खराब होने से बढ़ सकती है दिक्कत
रेडिएटर फैन इंजन को ठंडा रखने में अहम भूमिका निभाता है। अगर फैन सही तरीके से काम नहीं कर रहा हो या कूलिंग पाइप में ब्लॉकेज हो, तो इंजन तेजी से गर्म होने लगता है। समय-समय पर सर्विसिंग करवाना बेहद जरूरी है। नियमित जांच से कार इंजन ओवरहीट जैसी समस्या से काफी हद तक बचा जा सकता है। छोटी खराबी को नजरअंदाज करना बाद में बड़ी परेशानी बन सकता है।
सही इंजन ऑयल इंजन को रखता है सुरक्षित
इंजन ऑयल सिर्फ मशीन के पार्ट्स को स्मूद नहीं बनाता बल्कि इंजन को ठंडा रखने में भी मदद करता है। अगर ऑयल पुराना हो जाए या उसकी मात्रा कम हो, तो इंजन जल्दी गर्म होने लगता है। इसलिए हमेशा सही ग्रेड का इंजन ऑयल इस्तेमाल करें और तय समय पर ऑयल बदलवाते रहें। खराब ऑयल भी कार इंजन ओवरहीट की बड़ी वजह बन सकता है।
धूप में पार्किंग से भी बढ़ता है खतरा
तेज धूप में लंबे समय तक खड़ी रहने वाली कार का तापमान बहुत तेजी से बढ़ जाता है। इसका असर इंजन , बैटरी और इलेक्ट्रिकल सिस्टम पर भी पड़ता है। कोशिश करें कि कार को हमेशा छांव में पार्क करें। अगर छांव उपलब्ध न हो तो सनशेड या कार कवर का इस्तेमाल करें। इससे कार का तापमान काफी हद तक कंट्रोल में रहता है और कार इंजन ओवरहीट होने का खतरा कम हो जाता है।
छोटी सावधानी बचा सकती है बड़ा खर्च
गर्मियों में कार की छोटी-छोटी जांच ही बड़े नुकसान से बचा सकती है। अगर समय रहते इंजन के संकेतों को समझ लिया जाए और सही कदम उठाए जाएं, तो इंजन को भारी नुकसान से बचाया जा सकता है। गर्मी के मौसम में लापरवाही नहीं बल्कि सतर्कता ही आपकी कार और जेब दोनों को सुरक्षित रख सकती है।
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