नीमच। जिले में मंगलवार को आयोजित जनसुनवाई के दौरान कृषि भूमि सीमांकन का एक मामला कलेक्टर के समक्ष पहुंचा। नीमच सिटी निवासी किसान अरविंद रावत ने लिखित शिकायत देकर आरोप लगाया कि कई बार आवेदन देने और सीएम हेल्पलाइन पर शिकायत दर्ज कराने के बावजूद उनकी कृषि भूमि का सीमांकन नहीं कराया गया। उन्होंने मामले की निष्पक्ष जांच कर शीघ्र सीमांकन कराने और जिम्मेदार अधिकारियों के विरुद्ध आवश्यक कार्रवाई की मांग की है।

किसान द्वारा दिए गए आवेदन के अनुसार, जीरन तहसील के ग्राम गोपालपुरा स्थित उनकी 1.78 हेक्टेयर कृषि भूमि का लंबे समय से सीमांकन लंबित है। उनका कहना है कि आसपास की अन्य कृषि भूमि का सीमांकन पहले ही पूरा किया जा चुका है, लेकिन उनकी भूमि का सीमांकन अब तक नहीं कराया गया।
कई बार आवेदन देने का दावा
अरविंद रावत ने आवेदन में बताया कि उन्होंने अपनी कृषि भूमि सीमांकन की समस्या को लेकर संबंधित राजस्व अधिकारियों के समक्ष कई बार आवेदन प्रस्तुत किए। इसके बाद भी उनकी समस्या का समाधान नहीं हुआ।
उन्होंने कहा कि सीमांकन नहीं होने के कारण उन्हें लगातार परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। उनका कहना है कि प्रशासनिक स्तर पर कई बार संपर्क करने के बावजूद मामले में अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई।
सीएम हेल्पलाइन पर शिकायत भी रही बेअसर
किसान ने आवेदन में उल्लेख किया कि उन्होंने अपनी समस्या के समाधान के लिए सीएम हेल्पलाइन पर भी शिकायत दर्ज कराई थी। इसके बावजूद उनकी कृषि भूमि सीमांकन की प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ सकी। शिकायत में उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि शिकायत वापस लेने के लिए उन पर दबाव बनाया गया। साथ ही उनके साथ अभद्र व्यवहार और धमकी दिए जाने का भी आरोप लगाया गया है।
हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और संबंधित अधिकारियों की ओर से इस संबंध में कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
कलेक्टर से निष्पक्ष जांच की मांग
जनसुनवाई में दिए गए आवेदन के माध्यम से किसान ने कलेक्टर से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने का अनुरोध किया है। उन्होंने मांग की कि संबंधित राजस्व अधिकारियों को उनकी कृषि भूमि सीमांकन की प्रक्रिया शीघ्र पूरी करने के निर्देश दिए जाएं।
इसके साथ ही उन्होंने यह भी आग्रह किया कि यदि जांच में किसी अधिकारी की लापरवाही या अनियमितता सामने आती है तो उनके विरुद्ध आवश्यक प्रशासनिक कार्रवाई की जाए।
आसपास की भूमि का सीमांकन होने का दावा
आवेदन के अनुसार किसान का कहना है कि जिस क्षेत्र में उनकी कृषि भूमि स्थित है, वहां आसपास की अन्य भूमि का सीमांकन पहले ही किया जा चुका है। इसके बावजूद केवल उनकी भूमि का सीमांकन लंबित रहने से उन्हें लगातार दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। किसान ने इस स्थिति को असमान व्यवहार बताते हुए प्रशासन से निष्पक्ष कार्रवाई की मांग की है।
जनसुनवाई में उठाया मामला
मंगलवार को आयोजित जनसुनवाई में किसान ने अपनी शिकायत सीधे जिला प्रशासन के समक्ष रखी। जनसुनवाई का उद्देश्य आम नागरिकों की समस्याओं का समाधान करना होता है, जहां विभिन्न विभागों से जुड़े मामलों की शिकायतें प्राप्त कर संबंधित अधिकारियों को आवश्यक कार्रवाई के लिए निर्देशित किया जाता है।
किसान को उम्मीद है कि जनसुनवाई में मामला उठने के बाद उनकी कृषि भूमि सीमांकन की प्रक्रिया में तेजी आएगी और लंबे समय से लंबित समस्या का समाधान हो सकेगा।
किसान की प्रमुख मांगें
- कृषि भूमि का शीघ्र सीमांकन कराया जाए।
- पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए।
- संबंधित राजस्व अधिकारियों को आवश्यक निर्देश दिए जाएं।
- यदि लापरवाही सिद्ध होती है तो जिम्मेदार अधिकारियों के विरुद्ध कार्रवाई की जाए।
- शिकायतकर्ता को नियमानुसार न्याय दिलाया जाए।
प्रशासनिक कार्रवाई का इंतजार
फिलहाल किसान द्वारा जनसुनवाई में प्रस्तुत आवेदन पर प्रशासन की ओर से किसी निर्णय या कार्रवाई की जानकारी सामने नहीं आई है। आवेदन में लगाए गए आरोप शिकायतकर्ता के दावे पर आधारित हैं। मामले में संबंधित अधिकारियों का पक्ष अभी प्राप्त नहीं हो सका है। प्रशासन द्वारा जांच या आधिकारिक कार्रवाई के बाद स्थिति और स्पष्ट हो सकेगी।
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