श्योपुर/भोपाल | मध्य प्रदेश के कूनो नेशनल पार्क में बसाए गए कूनो के चीते अब भारतीय वातावरण के अनुरूप अपने व्यवहार में बदलाव करते दिखाई दे रहे हैं। केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय की प्रोजेक्ट चीता प्रोग्रेस रिपोर्ट (सितंबर 2024 से दिसंबर 2025) के अनुसार खुले जंगल में चीतों के कुल शिकार का लगभग 50 प्रतिशत हिस्सा अब पालतू पशुओं का है। रिपोर्ट यह भी बताती है कि कूनो के चीते अब मध्य प्रदेश और राजस्थान के 12 जिलों तक अपनी आवाजाही दर्ज करा चुके हैं।
रिपोर्ट के अनुसार यह बदलाव चीतों के भारतीय परिस्थितियों में धीरे-धीरे अनुकूल होने का संकेत माना जा रहा है। शिकार की उपलब्धता और क्षेत्र की परिस्थितियों के अनुसार चीते अब अपने शिकार का चयन कर रहे हैं।
प्रोजेक्ट चीता रिपोर्ट में क्या सामने आया?
केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय द्वारा जारी प्रोजेक्ट चीता प्रोग्रेस रिपोर्ट में कूनो के चीतों के शिकार के पैटर्न का विस्तृत विश्लेषण किया गया है। रिपोर्ट के मुताबिक खुले जंगल में दर्ज कुल शिकार में लगभग 50 प्रतिशत हिस्सा पालतू पशुओं का रहा। इनमें 30 प्रतिशत बकरियां और 20 प्रतिशत मवेशी शामिल हैं। वहीं 42 प्रतिशत शिकार चीतल का दर्ज किया गया है।
यह बदलाव इसलिए देखा गया क्योंकि कई स्थानों पर पालतू पशु जंगली शिकार की तुलना में अधिक आसानी से उपलब्ध होते हैं। ऐसे शिकार में ऊर्जा भी कम खर्च होती है और जोखिम भी अपेक्षाकृत कम रहता है।
गांवों और वन क्षेत्रों के आसपास बदल रहा है व्यवहार
कूनो नेशनल पार्क के कोर क्षेत्र में चीतलों की पर्याप्त संख्या उपलब्ध है। यहां प्रति वर्ग किलोमीटर औसतन 23 चीतल पाए जाते हैं, जिससे प्राकृतिक शिकार की कमी नहीं मानी जाती।हालांकि, जब कूनो के चीते अपने निर्धारित क्षेत्र से निकलकर टेरिटोरियल वन क्षेत्रों या गांवों के आसपास पहुंचते हैं, तब वहां जंगली शिकार की उपलब्धता कम हो जाती है। इसके विपरीत बकरियां और मवेशी अपेक्षाकृत अधिक संख्या में मिलते हैं। ऐसी परिस्थितियों में चीते इन्हें भी अपना शिकार बना रहे हैं।
यह व्यवहार परिस्थितियों के अनुरूप अनुकूलन का हिस्सा माना जा रहा है।
मादा चीतों ने किए सबसे अधिक शिकार
प्रोजेक्ट चीता रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया है कि शावकों की देखभाल कर रही मादा चीता ज्वाला और गामिनी ने सबसे अधिक शिकार किए। शावकों के पालन-पोषण के दौरान भोजन की आवश्यकता अधिक होती है। इसी कारण इन दोनों मादा चीतों की शिकार गतिविधियां अन्य चीतों की तुलना में अधिक दर्ज की गईं।
12 जिलों तक पहुंच चुके हैं कूनो के चीते
कूनो के चीते अब केवल राष्ट्रीय उद्यान तक सीमित नहीं हैं। उनकी आवाजाही मध्य प्रदेश और राजस्थान के 12 जिलों तक दर्ज की जा चुकी है। हाल ही में नर चीता अग्नि के राजस्थान के रणथंभौर क्षेत्र तक पहुंचने का भी उल्लेख रिपोर्ट में किया गया है। इससे यह संकेत मिलता है कि चीते नए क्षेत्रों में भ्रमण कर रहे हैं और उनका दायरा लगातार बढ़ रहा है।
आसान शिकार क्यों चुन रहे हैं चीते?
किसी भी शिकारी वन्यजीव के लिए ऐसा शिकार अधिक उपयुक्त माना जाता है जिसमें कम ऊर्जा खर्च हो और सफलता की संभावना अधिक हो। जब चीते ऐसे क्षेत्रों में पहुंचते हैं जहां जंगली शिकार कम उपलब्ध होता है, तब वे वहां मौजूद पालतू पशुओं को भी शिकार के रूप में चुन लेते हैं। रिपोर्ट में इसी कारण को चीतों के बदले हुए शिकार व्यवहार का प्रमुख कारण बताया गया है।
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