कुशाग्र ओझा का सपना हुआ सच… अब श्रीलंका में होगी सबसे बड़ी परीक्षा, परिवार ने सांवलिया सेठ को चढ़ाया चांदी का बैट

चित्तौड़गढ़ | चित्तौड़गढ़ जिले के बस्सी से जुड़ी एक प्रेरणादायक खबर सामने आई है। कुशाग्र ओझा का चयन भारतीय अंडर-19 पुरुष क्रिकेट टीम में होने के बाद अब उनकी अगली चुनौती श्रीलंका दौरा है। 17 वर्षीय क्रिकेटर भारतीय टीम के साथ 30 जून को ही श्रीलंका रवाना हो चुके हैं। बेटे की इस उपलब्धि पर परिवार ने गुरुवार को सांवलिया सेठ के दरबार में 500 ग्राम चांदी का बैट अर्पित कर उनके शानदार प्रदर्शन की कामना की।

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परिवार के अनुसार यह चांदी का बैट उस मन्नत का प्रतीक है, जो उन्होंने कुशाग्र के भारतीय टीम में चयन के लिए मांगी थी। अब चयन होने के बाद परिवार ने भगवान का आभार व्यक्त करते हुए श्रीलंका दौरे में सफलता की प्रार्थना की है। कुशाग्र का चयन भारतीय अंडर-19 टीम की वनडे और टेस्ट दोनों टीमों में हुआ है। पहला मुकाबला 4 जुलाई को खेला जाएगा।

सांवलिया सेठ के दरबार में पूरी हुई मन्नत

कुशाग्र ओझा

कुशाग्र के पिता ओमप्रकाश ओझा ने बताया कि बेटे के भारतीय अंडर-19 टीम में चयन की कामना लेकर उन्होंने पहले ही सांवलिया सेठ से मन्नत मांगी थी। चयन की आधिकारिक पुष्टि होने के बाद परिवार मंदिर पहुंचा और 500 ग्राम चांदी का बैट अर्पित किया।

उन्होंने बताया कि यह सिर्फ आस्था नहीं बल्कि वर्षों की मेहनत और विश्वास का प्रतीक भी है। परिवार ने भगवान से प्रार्थना की कि कुशाग्र श्रीलंका दौरे पर अपने खेल से देश का नाम रोशन करें।

अब निगाहें श्रीलंका दौरे पर

कुशाग्र ओझा

भारतीय अंडर-19 टीम के साथ श्रीलंका पहुंचे कुशाग्र ओझा के सामने अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर खुद को साबित करने का अवसर है। परिवार को उम्मीद है कि वह इस दौरे में बेहतरीन प्रदर्शन कर भविष्य में भारतीय सीनियर टीम तक पहुंचने की दिशा में मजबूत कदम बढ़ाएंगे।

पहला मुकाबला 4 जुलाई को खेला जाएगा। क्रिकेट प्रेमियों की नजरें अब इस युवा खिलाड़ी के प्रदर्शन पर रहेंगी।

पूरे चित्तौड़गढ़ में खुशी का माहौल

कुशाग्र ओझा

भारतीय अंडर-19 टीम में चयन की खबर सामने आने के बाद बस्सी सहित पूरे चित्तौड़गढ़ जिले में खुशी का माहौल है। स्थानीय लोग, खेल प्रेमी और शुभचिंतक लगातार परिवार को बधाई दे रहे हैं।

परिवार का कहना है कि यह उपलब्धि केवल उनके घर की नहीं बल्कि पूरे क्षेत्र के लिए गर्व का विषय है। युवा खिलाड़ियों के लिए भी यह प्रेरणा है कि लगातार मेहनत और अनुशासन से बड़े लक्ष्य हासिल किए जा सकते हैं।

तीसरी कक्षा से शुरू हुआ क्रिकेट का सफर

परिवार के अनुसार कुशाग्र ओझा का जन्म वर्ष 2009 में जयपुर में हुआ। बचपन से ही उन्हें क्रिकेट खेलने का विशेष शौक था। जब वे तीसरी कक्षा में पढ़ते थे, तभी उन्होंने क्रिकेट खेलना शुरू कर दिया था। शुरुआत स्कूल स्तर से हुई, लेकिन धीरे-धीरे उन्होंने नियमित प्रशिक्षण लेना शुरू किया। परिवार का कहना है कि बचपन से ही उनका सपना भारतीय टीम की जर्सी पहनकर देश का प्रतिनिधित्व करना था।

इसी लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए उन्होंने लगातार अभ्यास किया और अपने खेल में सुधार करते रहे। क्रिकेट के प्रति उनका समर्पण परिवार और कोच दोनों के लिए प्रेरणादायक रहा।

कूच बिहार ट्रॉफी ने बदली किस्मत

कुशाग्र ओझा

ओमप्रकाश ओझा के अनुसार हाल ही में आयोजित कूच बिहार ट्रॉफी में कुशाग्र ने प्रभावशाली प्रदर्शन किया। इसी प्रदर्शन के आधार पर उन्हें बेंगलुरु में आगे की ट्रेनिंग और कोचिंग का अवसर मिला।

लगातार बेहतर प्रदर्शन करते हुए उन्होंने चयनकर्ताओं का ध्यान अपनी ओर आकर्षित किया और आखिरकार भारतीय अंडर-19 टीम में जगह बनाने में सफल रहे। परिवार का मानना है कि यह उपलब्धि उनकी वर्षों की मेहनत और अनुशासन का परिणाम है।

परिवार को है बड़ी उम्मीद

कुशाग्र के पिता ओमप्रकाश ओझा जयपुर में एक निजी बैंक में मैनेजर हैं, जबकि उनकी माता निशा ओझा गृहिणी हैं। परिवार वर्तमान में जयपुर में निवास करता है।परिजनों का कहना है कि कुशाग्र ने हमेशा क्रिकेट को ही अपना लक्ष्य बनाया और उसी दिशा में पूरी लगन से मेहनत की। अब भारतीय अंडर-19 टीम में चयन के बाद उनका सपना एक नई उड़ान भर चुका है।

परिवार को विश्वास है कि श्रीलंका दौरे पर उनका प्रदर्शन आने वाले समय में उन्हें भारतीय सीनियर टीम तक पहुंचाने में मदद करेगा।


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