काम के वक्त नो रील्स! अफसरों के लिए आ रहा सोशल मीडिया कोड, जानिए क्या बदल सकता है
Reported by: News Desk | Edited by: आकाश शर्मा
03 सितम्बर 2026, (अपडेटेड 03 सितम्बर 2026, 5:54 अपराह्न IST)

नीमच | सरकारी अधिकारियों के सोशल मीडिया इस्तेमाल को लेकर सोशल मीडिया कोड लाने की तैयारी की जा रही है। प्रस्तावित नियमों के तहत ड्यूटी के दौरान रील्स देखने और सोशल मीडिया के इस्तेमाल पर सीमाएं तय की जा सकती हैं। इसके साथ ही सरकारी पद के महिमामंडन और अधिकारियों की निजी सोशल मीडिया पोस्ट को लेकर भी नए नियम बनाए जाने की संभावना है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वरिष्ठ नौकरशाहों को इस तरह के कोड की संभावना पर विचार करने का निर्देश दिया है। हालांकि, अभी प्रस्तावित सोशल मीडिया कोड का अंतिम प्रारूप सामने नहीं आया है।

ड्यूटी के दौरान रील्स पर लग सकती है रोक

सरकारी कार्यालयों में सोशल मीडिया का इस्तेमाल लगातार बढ़ रहा है। कुछ अधिकारी ड्यूटी के दौरान रील्स देखते और शेयर करते हैं। कुछ अधिकारी अपनी निजी राय और वीडियो भी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर पोस्ट करते हैं। इसी तरह के इस्तेमाल को देखते हुए सरकार अब अधिकारियों के सोशल मीडिया आचरण को लेकर स्पष्ट व्यवस्था तैयार करने पर विचार कर रही है। नए सोशल मीडिया कोड में यह तय किया जा सकता है कि सरकारी कर्मचारी ड्यूटी के दौरान सोशल मीडिया का किस तरह इस्तेमाल कर सकते हैं।

हालांकि, अभी यह स्पष्ट नहीं है कि प्रस्तावित नियम सभी सरकारी कर्मचारियों पर लागू होंगे या मुख्य रूप से वरिष्ठ अधिकारियों के सोशल मीडिया आचरण पर केंद्रित रहेंगे।

पीएम मोदी ने दिया विचार करने का निर्देश

सोशल मीडिया इस्तेमाल को लेकर प्रस्तावित व्यवस्था का मामला वरिष्ठ नौकरशाही के स्तर तक पहुंच चुका है।  प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वरिष्ठ अधिकारियों को सोशल मीडिया कोड की संभावना पर विचार करने का निर्देश दिया है। रिपोर्ट के मुताबिक, कैबिनेट सचिव टी.वी. सोमनाथन ने इस सप्ताह अधिकारियों को एक संदेश भेजा। इसमें हाल में हुई बैठक के प्रमुख बिंदुओं का उल्लेख किया गया था। इसी बैठक में अधिकारियों के सोशल मीडिया इस्तेमाल को लेकर चर्चा हुई थी।

इससे संकेत मिलता है कि सरकार सरकारी अधिकारियों के डिजिटल आचरण के लिए अलग और स्पष्ट दिशा-निर्देश तैयार करने पर विचार कर रही है।

पद के महिमामंडन पर भी नजर

प्रस्तावित सोशल मीडिया कोड में अधिकारियों द्वारा अपने सरकारी पद और काम के प्रचार को लेकर भी नियम बनाए जा सकते हैं। कुछ अधिकारी सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए अपने पद और सरकारी काम को प्रमुखता से दिखाते हैं। ऐसे व्यवहार को लेकर सरकार स्पष्ट दिशा-निर्देश तैयार करने पर विचार कर रही है।

इसका उद्देश्य सरकारी पद की गरिमा और अधिकारियों के आचरण को लेकर स्पष्ट व्यवस्था बनाना बताया जा रहा है। हालांकि, अंतिम कोड में इस संबंध में क्या प्रावधान होंगे, इसकी जानकारी अभी उपलब्ध नहीं है।

पुराने नियमों में सोशल मीडिया का स्पष्ट प्रावधान नहीं

इस प्रस्ताव को लेकर कुछ वरिष्ठ सेवारत और सेवानिवृत्त अधिकारियों ने समर्थन जताया है। उनका कहना है कि मौजूदा समय में सोशल मीडिया सरकारी अधिकारियों के जीवन और कामकाज का हिस्सा बन चुका है। मौजूदा आचरण नियम उस दौर में तैयार किए गए थे, जब सोशल मीडिया आज की तरह व्यापक नहीं था। इसलिए अधिकारियों के सोशल मीडिया इस्तेमाल को लेकर अलग से विस्तृत प्रावधान नहीं होने की बात सामने आई है।

इसी वजह से बदलते डिजिटल दौर को देखते हुए नया सोशल मीडिया कोड तैयार करने की जरूरत महसूस की जा रही है।

निजी पोस्ट और सरकारी नीतियों पर भी बन सकते हैं नियम

नए कोड में केवल ड्यूटी के दौरान रील्स देखने का मुद्दा ही शामिल नहीं हो सकता। अधिकारियों के निजी सोशल मीडिया इस्तेमाल और सरकारी नीतियों से जुड़ी पोस्ट को लेकर भी दिशा-निर्देश बनाए जाने की संभावना है। सरकारी जानकारी और नीतियों पर अधिकारियों द्वारा निजी राय व्यक्त करने को लेकर भी नियम तय किए जा सकते हैं। इससे अधिकारियों के सोशल मीडिया आचरण, जवाबदेही और अनुशासन के लिए स्पष्ट व्यवस्था बनाने की कोशिश होगी। लेकिन अभी तक अंतिम नियम सार्वजनिक नहीं हुए हैं। इसलिए इन संभावित प्रावधानों को अंतिम फैसला नहीं माना जा सकता।

साथ में ‘एक भारत पोर्टल’ की भी तैयारी

सोशल मीडिया कोड की चर्चा के साथ सरकार नागरिकों के लिए एक भारत पोर्टल शुरू करने की तैयारी भी कर रही है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सचिवों के साथ बातचीत के दौरान इलेक्ट्रॉनिक्स और आईटी मंत्रालय को एक यूनिफाइड सर्विस डिलीवरी प्लेटफॉर्म जल्द शुरू करने का निर्देश दिया है। वर्तमान में नागरिकों को अलग-अलग सरकारी सेवाओं के लिए विभिन्न वेबसाइटों का इस्तेमाल करना पड़ता है। कई सेवाओं के लिए अलग यूजरनेम और पासवर्ड की आवश्यकता होती है।

प्रस्तावित एक भारत पोर्टल का उद्देश्य इन सेवाओं को एक जगह लाना बताया गया है।

एक लॉगिन से कई सरकारी सेवाएं

एक भारत पोर्टल शुरू होने के बाद नागरिक एक ही यूजरनेम और पासवर्ड के जरिए विभिन्न सरकारी सेवाओं का इस्तेमाल कर सकेंगे। इससे अलग-अलग सरकारी वेबसाइटों पर बार-बार रजिस्ट्रेशन और लॉगिन करने की परेशानी कम हो सकती है। अधिकारियों के मुताबिक, पोर्टल को लेकर विभागों के बीच कुछ दौर की बैठकें भी हो चुकी हैं।फिलहाल इस पोर्टल की अंतिम लॉन्च तारीख और इसमें शामिल होने वाली सेवाओं की विस्तृत जानकारी सामने नहीं आई है।

अभी अंतिम नियमों का इंतजार

सरकार की ओर से प्रस्तावित सोशल मीडिया कोड अभी शुरुआती चरण में है। इसके अंतिम प्रावधान, लागू होने की तारीख और नियमों का दायरा स्पष्ट होना बाकी है। यदि यह कोड लागू होता है तो सरकारी अधिकारियों के सोशल मीडिया इस्तेमाल को लेकर अधिक स्पष्ट दिशा-निर्देश सामने आ सकते हैं। वहीं एक भारत पोर्टल लागू होने पर अलग-अलग सरकारी डिजिटल सेवाओं को एक प्लेटफॉर्म पर लाने की कोशिश होगी।

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Aakash Sharma
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आकाश शर्मा मध्यप्रदेश के नीमच क्षेत्र में सक्रिय पत्रकार और द टाइम्स ऑफ MP के संपादक हैं। उन्हें प्रिंट मीडिया में 12 वर्षों का पत्रकारिता अनुभव है। लंबे समय से स्थानीय एवं जनसरोकार से जुड़े मुद्दों की रिपोर्टिंग, समाचार संपादन और समाचार प्रकाशन के क्षेत्र में सक्रिय रहते हुए उन्होंने स्थानीय पत्रकारिता में व्यापक अनुभव हासिल किया है।द टाइम्स ऑफ MP के माध्यम से आकाश शर्मा नीमच, मंदसौर और आसपास के क्षेत्रों से जुड़ी महत्वपूर्ण खबरों को पाठकों तक पहुंचाने का कार्य करते हैं। उनकी कवरेज में स्थानीय प्रशासन, पुलिस एवं कानून-व्यवस्था, जनसमस्याएं, नागरिक सुविधाएं, राजनीति, सामाजिक गतिविधियां, शिक्षा, कृषि, व्यापार और अन्य जनहित से जुड़े विषय शामिल हैं।उनकी संपादकीय कार्यशैली में तथ्यपरक रिपोर्टिंग, स्रोत-आधारित जानकारी, निष्पक्ष प्रस्तुति और जिम्मेदार पत्रकारिता को प्राथमिकता दी जाती है। संवेदनशील और अपराध से जुड़े मामलों की रिपोर्टिंग में आरोप और प्रमाणित तथ्य के बीच अंतर बनाए रखने तथा उपलब्ध आधिकारिक एवं विश्वसनीय स्रोतों के आधार पर खबर प्रस्तुत करने पर विशेष ध्यान दिया जाता है।पत्रकारिता के साथ आकाश शर्मा पिछले 4 वर्षों से पैरा लीगल वॉलंटियर (PLV) के रूप में भी कार्य कर रहे हैं। इस भूमिका में वे कानूनी जागरूकता और जनहित से जुड़े कार्यों से जुड़े रहे हैं। इसके साथ ही वे इंटरनेशनल ह्यूमन सिक्योरिटी ऑर्गनाइजेशन में जिला उपाध्यक्ष (District Vice President) के दायित्व का निर्वहन कर रहे हैं।अनुभव 12 वर्ष — प्रिंट मीडिया एवं पत्रकारिता का अनुभव 4 वर्ष — पैरा लीगल वॉलंटियर (PLV) के रूप में अनुभव संपादक — द टाइम्स ऑफ MP जिला उपाध्यक्ष — इंटरनेशनल ह्यूमन सिक्योरिटी ऑर्गनाइजेशनआकाश शर्मा का उद्देश्य स्थानीय स्तर की महत्वपूर्ण सूचनाओं को विश्वसनीय, स्पष्ट, तथ्यपरक और जिम्मेदार पत्रकारिता के माध्यम से पाठकों तक पहुंचाना तथा आम नागरिकों से जुड़े मुद्दों को प्रभावी मंच प्रदान करना है।विशेषज्ञता: स्थानीय पत्रकारिता | प्रिंट मीडिया | समाचार संपादन | डिजिटल पत्रकारिता | स्थानीय समाचार रिपोर्टिंग | जनहित के मुद्दे | कानूनी जागरूकता |

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