Success Story of Santosh Devi: भैंस बेचकर शुरू की खेती, अब सेब-अनार से सालाना ₹40 लाख की कमाई; पढ़ें राजस्थान की ‘लखपति’ संतोष देवी की संघर्ष गाथा
Reported by: News Desk | Edited by: आकाश शर्मा
06 फ़रवरी 2026, (अपडेटेड 06 फ़रवरी 2026, 12:09 अपराह्न IST)

सीकर, राजस्थान। अगर मन में कुछ कर गुजरने का जज्बा हो, तो रेगिस्तान की तपती रेत भी मीठे फलों की खुशबू से महक सकती है। राजस्थान के सीकर जिले के एक छोटे से गांव बेरी की रहने वाली संतोष देवी ने इस कहावत को हकीकत में बदल दिया है। यह Success Story of Santosh Devi आज देश के उन तमाम युवाओं और किसानों के लिए एक प्रेरणा है, जो बंजर जमीन या संसाधनों की कमी का रोना रोते हैं। महज 5वीं तक शिक्षा प्राप्त करने वाली एक साधारण गृहिणी ने अपनी कड़ी मेहनत और अटूट विश्वास के दम पर 5 बीघा रेतीली जमीन को 40 लाख रुपये सालाना आय वाले बिजनेस में तब्दील कर दिया है।

कम उम्र में शादी और चुनौतियों का पहाड़

संतोष देवी के जीवन का सफर संघर्षों की एक लंबी दास्तान है। साल 1990 में जब उनकी उम्र महज 15 साल थी, तब उनकी शादी रामकरण खेदड़ से हुई थी। पढ़ाई के नाम पर उनके पास सिर्फ 5वीं तक का ज्ञान था, लेकिन जमीन से जुड़ाव बचपन से ही था। शादी के कुछ समय बाद जब परिवार का बंटवारा हुआ, तो हिस्से में आई 5 बीघा जमीन। यह जमीन उपजाऊ नहीं, बल्कि पूरी तरह बंजर और रेतीली थी।

हालात इतने चुनौतीपूर्ण थे कि वहां सिंचाई के लिए पानी का एक कतरा तक नहीं था। पति रामकरण होमगार्ड की नौकरी करते थे, जिससे महीने में सिर्फ 3 हजार रुपये की आय होती थी। इतने कम पैसों में परिवार का गुजारा करना और बच्चों के बेहतर भविष्य का सपना देखना किसी दुःस्वप्न जैसा था। लेकिन संतोष ने हार नहीं मानी।

नौकरी छोड़ने का बड़ा फैसला और इकलौती भैंस की कुर्बानी

साल 2008 में जब रामकरण करौली में अपनी ड्यूटी पर थे, तब एक अधिकारी ने उन्हें अनार की खेती की संभावनाओं के बारे में बताया। जब उन्होंने यह बात घर आकर संतोष को बताई, तो संतोष ने एक ऐतिहासिक फैसला लिया। उन्होंने पति से कहा,

“आप यह 3 हजार की नौकरी छोड़ दीजिए, हम अपनी ही जमीन पर पसीना बहाएंगे।”

पूंजी की व्यवस्था करना सबसे बड़ी चुनौती थी। विभाग से 220 अनार के पौधे खरीदने के लिए 5,500 रुपये चाहिए थे, और पूरे सिस्टम को खड़ा करने के लिए करीब 45 हजार रुपये की आवश्यकता थी। उस समय घर में सिर्फ एक भैंस थी। अपनी उम्मीदों को पंख देने के लिए संतोष ने उस भैंस को 25 हजार रुपये में बेच दिया और बाकी पैसे रिश्तेदारों से उधार लिए। यहीं से Success Story of Santosh Devi का असली अध्याय शुरू हुआ।

14 घंटे की मेहनत और आधुनिक खेती का संगम

रेतीले धोरों में पौधे उगाना आसान नहीं था। संतोष देवी ने पारंपरिक खेती के बजाय वैज्ञानिक और जैविक खेती का रास्ता चुना। शुरुआत में बिजली नहीं थी, तो उन्होंने डीजल इंजन से सिंचाई की। बाद में 2012 में सरकारी अनुदान से सोलर प्लांट लगवाया। संतोष रोजाना 14 घंटे खेत में बिताती हैं।

उनकी खेती की सबसे बड़ी यूएसपी ‘ऑर्गेनिक फार्मिंग’ है। वे रासायनिक उर्वरकों के बजाय हर पौधे में 50 किलो गोबर की खाद का उपयोग करती हैं। पौधों को बीमारियों से बचाने के लिए वे चूने और नीले थोथे का खुद तैयार किया हुआ घोल इस्तेमाल करती हैं। उनकी तकनीक इतनी सटीक है कि प्रत्येक पौधे को सप्ताह में सिर्फ एक बार पानी की जरूरत पड़ती है। आज उनके खेत में सेब, सिंदूरी अनार, मौसमी और नींबू के हजारों पेड़ लहलहा रहे हैं।

शेखावाटी कृषि फार्म: एक ब्रांड और ट्रेनिंग सेंटर

आज उनकी 5 बीघा जमीन केवल एक खेत नहीं, बल्कि ‘शेखावाटी कृषि फार्म और उद्यान नर्सरी’ के नाम से एक ब्रांड बन चुकी है। यह नर्सरी भारत सरकार से रजिस्टर्ड है। संतोष देवी अब सिर्फ फल नहीं बेचतीं, बल्कि उच्च गुणवत्ता वाले पौधे भी तैयार करती हैं। उनके फॉर्म से होने वाली आय अब सालाना 40 लाख रुपये के पार पहुंच गई है।

उनकी सफलता को देखते हुए सरकार ने उन्हें कई पुरस्कारों से नवाजा है। अब वे अपने इलाके की रोल मॉडल बन चुकी हैं। देश के विभिन्न हिस्सों से किसान उनके पास कम पानी और कम जमीन में अधिक मुनाफा कमाने की ट्रेनिंग लेने आते हैं।

नई पीढ़ी का जुड़ाव और भविष्य की राह

संतोष देवी का संघर्ष अब उनकी अगली पीढ़ी के लिए रास्ता बन गया है। उनके बेटे राहुल, जिन्होंने बीकानेर से एग्रीकल्चर में ग्रेजुएशन (B.Sc) किया है, अब अपनी मां के साथ कंधे से कंधा मिलाकर काम कर रहे हैं। राहुल खेत में ही एक प्रोसेसिंग यूनिट लगाने की योजना बना रहे हैं, ताकि गांव के अन्य लोगों को भी रोजगार मिल सके। यह Success Story of Santosh Devi इस बात का प्रमाण है कि खेती यदि सही दिशा और समर्पण के साथ की जाए, तो यह किसी भी कॉर्पोरेट नौकरी से अधिक सम्मान और पैसा दे सकती है।


यह भी पढ़ें: बीजेपी पार्षद की पत्नी पर चाकू से ताबड़तोड़ हमला, मौके पर ही दर्दनाक मौत

ताज़ा ख़बरों का अपडेट सीधा अपने फोन पर पाने के लिए हमारे WhatsApp चैनल से जुड़ें

Aakash Sharma
Aakash Sharmahttps://thetimesofmp.com
आकाश शर्मा मध्यप्रदेश के नीमच क्षेत्र में सक्रिय पत्रकार और द टाइम्स ऑफ MP के संपादक हैं। उन्हें प्रिंट मीडिया में 12 वर्षों का पत्रकारिता अनुभव है। लंबे समय से स्थानीय एवं जनसरोकार से जुड़े मुद्दों की रिपोर्टिंग, समाचार संपादन और समाचार प्रकाशन के क्षेत्र में सक्रिय रहते हुए उन्होंने स्थानीय पत्रकारिता में व्यापक अनुभव हासिल किया है।द टाइम्स ऑफ MP के माध्यम से आकाश शर्मा नीमच, मंदसौर और आसपास के क्षेत्रों से जुड़ी महत्वपूर्ण खबरों को पाठकों तक पहुंचाने का कार्य करते हैं। उनकी कवरेज में स्थानीय प्रशासन, पुलिस एवं कानून-व्यवस्था, जनसमस्याएं, नागरिक सुविधाएं, राजनीति, सामाजिक गतिविधियां, शिक्षा, कृषि, व्यापार और अन्य जनहित से जुड़े विषय शामिल हैं।उनकी संपादकीय कार्यशैली में तथ्यपरक रिपोर्टिंग, स्रोत-आधारित जानकारी, निष्पक्ष प्रस्तुति और जिम्मेदार पत्रकारिता को प्राथमिकता दी जाती है। संवेदनशील और अपराध से जुड़े मामलों की रिपोर्टिंग में आरोप और प्रमाणित तथ्य के बीच अंतर बनाए रखने तथा उपलब्ध आधिकारिक एवं विश्वसनीय स्रोतों के आधार पर खबर प्रस्तुत करने पर विशेष ध्यान दिया जाता है।पत्रकारिता के साथ आकाश शर्मा पिछले 4 वर्षों से पैरा लीगल वॉलंटियर (PLV) के रूप में भी कार्य कर रहे हैं। इस भूमिका में वे कानूनी जागरूकता और जनहित से जुड़े कार्यों से जुड़े रहे हैं। इसके साथ ही वे इंटरनेशनल ह्यूमन सिक्योरिटी ऑर्गनाइजेशन में जिला उपाध्यक्ष (District Vice President) के दायित्व का निर्वहन कर रहे हैं।अनुभव 12 वर्ष — प्रिंट मीडिया एवं पत्रकारिता का अनुभव 4 वर्ष — पैरा लीगल वॉलंटियर (PLV) के रूप में अनुभव संपादक — द टाइम्स ऑफ MP जिला उपाध्यक्ष — इंटरनेशनल ह्यूमन सिक्योरिटी ऑर्गनाइजेशनआकाश शर्मा का उद्देश्य स्थानीय स्तर की महत्वपूर्ण सूचनाओं को विश्वसनीय, स्पष्ट, तथ्यपरक और जिम्मेदार पत्रकारिता के माध्यम से पाठकों तक पहुंचाना तथा आम नागरिकों से जुड़े मुद्दों को प्रभावी मंच प्रदान करना है।विशेषज्ञता: स्थानीय पत्रकारिता | प्रिंट मीडिया | समाचार संपादन | डिजिटल पत्रकारिता | स्थानीय समाचार रिपोर्टिंग | जनहित के मुद्दे | कानूनी जागरूकता |

Hot this week

पालसोड़ा एक्सीडेंट में 1 युवक की मौत, 2 की हालत गंभीर

पालसोड़ा एक्सीडेंट: नीमच जिले के जीरन थाना क्षेत्र में...

उज्जैन शूटिंग रेंज मारपीट: VIDEO में कैद कोच पर हमला, सिस्टम पर उठे सवाल

उज्जैन (Ujjain Crime News)। उज्जैन शूटिंग रेंज मारपीट का...

रिद्धि राठौड़ का शानदार प्रदर्शन, 400 और 600 मीटर दौड़ में जीते स्वर्ण पदक

नीमच। शालेय संभाग स्तरीय एथलेटिक्स प्रतियोगिता में स्विमफ्लाय स्पोर्ट्स...

मनासा में घर में सो रहे 40 वर्षीय कालू को सांप ने काटा, समय पर अस्पताल पहुंचाया

मनासा। नीमच जिले के मनासा क्षेत्र में शुक्रवार अलसुबह...

Related Articles

Popular Categories