नीमच। खरीफ वर्ष 2025 में अतिवृष्टि से सोयाबीन की फसल बर्बाद होने के बाद भी फसल बीमा क्लेम नहीं मिलने का आरोप लगाते हुए मनासा क्षेत्र के कई गांवों के किसान नीमच कलेक्टोरेट पहुंचे। किसानों ने प्रशासन और बीमा कंपनी की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कलेक्टर एवं मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा। उनका कहना है कि फसल नुकसान का सरकारी रिकॉर्ड होने और बीमा प्रीमियम जमा होने के बावजूद कई किसानों को प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना का लाभ नहीं मिला। किसानों ने लंबित क्लेम के भुगतान और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग करते हुए समाधान नहीं होने पर व्यापक आंदोलन की चेतावनी दी है।
ज्ञापन के मुताबिक भदवा, रतनपुरा, लसूडिया आंत्री, कड़ी आंत्री, देवरी आंत्री, हतुनिया, बरलाई, कुंडलिया, मोया, आमदखेड़ी, धाऊखेड़ी, फूलपुरा और नलवा सहित कई गांवों के किसानों ने अपनी शिकायत प्रशासन के सामने रखी है। किसानों का दावा है कि खरीफ 2025 में हुई अतिवृष्टि से सोयाबीन की फसल लगभग पूरी तरह नष्ट हो गई थी।
नुकसान सरकार ने माना, फिर बीमा में ‘जीरो क्लेम’ क्यों?
किसानों के मुताबिक अतिवृष्टि से हुए फसल नुकसान को शासन स्तर पर स्वीकार किया गया और प्रभावित किसानों को राहत राशि भी प्रदान की गई। लेकिन किसानों का आरोप है कि प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत भुगतान की बारी आने पर कई गांवों को कथित रूप से ‘जीरो क्लेम’ श्रेणी में रख दिया गया। इसी को लेकर किसानों ने सवाल उठाया कि जब सरकारी रिकॉर्ड में फसल नुकसान दर्ज है और किसानों ने बीमा प्रीमियम भी जमा किया है, तब फसल बीमा क्लेम किस आधार पर नहीं दिया गया?
किसानों की मांग है कि प्रशासन संबंधित गांवों के बीमा रिकॉर्ड की जांच कर यह स्पष्ट करे कि किन कारणों से किसानों को क्लेम नहीं मिला। उनका कहना है कि वास्तविक नुकसान और बीमा प्रक्रिया से जुड़े रिकॉर्ड का मिलान होने से स्थिति स्पष्ट हो सकती है।
सर्वे पर उठे सवाल, पटवारी पर लगाया लापरवाही का आरोप
किसानों ने अपने ज्ञापन में संबंधित पटवारी दीपक पाल धनगर पर भी आरोप लगाए हैं। उनका दावा है कि फसल क्षति का सर्वे समय पर नहीं किया गया और इसी कथित लापरवाही के कारण बड़ी संख्या में किसान फसल बीमा क्लेम के लाभ से वंचित रह गए। किसानों ने वर्ष 2025 में हुई फसल क्षति का विशेष पंचनामा दोबारा कराने की मांग की है। उनका कहना है कि वास्तविक नुकसान का पुनः आकलन कर पात्र किसानों की स्थिति स्पष्ट की जाए और उसके आधार पर लंबित बीमा क्लेम तथा मुआवजे की प्रक्रिया पूरी की जाए।
नामांतरण और किसान सम्मान निधि को लेकर भी गंभीर शिकायत
ज्ञापन में किसानों ने फसल बीमा के अलावा राजस्व संबंधी कार्यों को लेकर भी शिकायत की है। किसानों ने आरोप लगाया कि मृतक नामांतरण और किसान सम्मान निधि पोर्टल पर वारिसों के नाम दर्ज कराने के लिए कथित तौर पर 5 हजार से 10 हजार रुपये तक की अवैध राशि की मांग की जाती है। किसानों का आरोप है कि राशि नहीं देने पर नामांतरण लंबित रखने और सरकारी योजनाओं का लाभ रोकने की धमकी दी जाती है। किसानों ने प्रशासन से इन आरोपों की निष्पक्ष जांच कराने और जांच में दोषी पाए जाने वाले अधिकारी-कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई करने की मांग की है।
बीमा कंपनी की भूमिका की उच्चस्तरीय जांच की मांग
किसानों ने ज्ञापन के माध्यम से बीमा कंपनी की भूमिका पर भी सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि फसल बीमा क्लेम तय करने की पूरी प्रक्रिया की जांच होनी चाहिए और यह सामने आना चाहिए कि फसल नुकसान का रिकॉर्ड मौजूद होने के बावजूद कई गांवों के किसानों को क्लेम क्यों नहीं मिला। किसानों ने प्रशासन के सामने प्रमुख रूप से वर्ष 2025 की फसल क्षति का विशेष पंचनामा दोबारा कराने, सभी पात्र किसानों को लंबित बीमा क्लेम और मुआवजा दिलाने, बीमा कंपनी की भूमिका की उच्चस्तरीय जांच कराने तथा सर्वे में लापरवाही और कथित रिश्वतखोरी के आरोपों की निष्पक्ष जांच कराने की मांग रखी है।
कलेक्टोरेट में नारेबाजी, अब आंदोलन की चेतावनी
अपनी मांगों को लेकर कलेक्टोरेट पहुंचे किसानों ने नारेबाजी करते हुए नाराजगी जताई और कलेक्टर एवं मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा। किसानों का कहना है कि लंबे समय से फसल बीमा क्लेम का इंतजार करने के बाद अब उन्हें प्रशासन के सामने अपनी बात रखने के लिए आना पड़ा है। किसानों ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी शिकायतों पर शीघ्र कार्रवाई नहीं हुई और पात्र किसानों का लंबित क्लेम जारी नहीं किया गया तो वे व्यापक जन आंदोलन करने के लिए बाध्य होंगे।
फिलहाल किसानों ने ज्ञापन के जरिए अपनी मांग प्रशासन तक पहुंचा दी है। अब बड़ा सवाल यह है कि खरीफ 2025 में फसल नुकसान से प्रभावित बताए जा रहे किसानों के फसल बीमा क्लेम को लेकर प्रशासन क्या कार्रवाई करता है और किसानों द्वारा उठाए गए सर्वे तथा बीमा प्रक्रिया से जुड़े सवालों पर क्या स्थिति सामने आती है।
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