नीमच। नीमच जिले में खाद्य सुरक्षा विभाग के विशेष निरीक्षण एवं सैंपलिंग अभियान के दौरान ग्राम दुधलाई स्थित एक मिल्क प्लांट में दूध संग्रहण और विक्रय के लिए आवश्यक वैध खाद्य लाइसेंस उपलब्ध नहीं पाया गया। विभाग के अनुसार, मामले में प्लांट प्रभारी और संचालक के विरुद्ध 28 जुलाई को अपर कलेक्टर न्यायालय, जिला नीमच में प्रकरण दर्ज किया गया है। वहीं एक अन्य कार्रवाई में रावण रूंडी स्थित प्रतिष्ठान से घी के दो नमूने लेकर जांच के लिए राज्य खाद्य परीक्षण प्रयोगशाला भेजे गए हैं।
नियंत्रक, खाद्य एवं औषधि प्रशासन मध्यप्रदेश, भोपाल तथा कलेक्टर हिमांशु चंद्रा के निर्देश पर जिले में मिलावटी और अमानक खाद्य पदार्थों के निर्माण, भंडारण एवं विक्रय पर नियंत्रण के लिए विशेष अभियान चलाया जा रहा है। इसके तहत खाद्य सुरक्षा अधिकारी विभिन्न खाद्य प्रतिष्ठानों का आकस्मिक निरीक्षण और आवश्यकतानुसार सैंपलिंग कर रहे हैं।
दुधलाई के मिल्क प्लांट में पहुंची टीम
खाद्य सुरक्षा विभाग के अनुसार, 22 जुलाई 2026 को एम/एस श्री सावरिया मिल्क प्लांट, बस स्टैंड के पास, नीमच रोड, ग्राम दुधलाई, तहसील रामपुरा का खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम, 2006 के तहत निरीक्षण किया गया। निरीक्षण के समय प्लांट प्रभारी कमलेश कुमार जाट मौजूद थे। विभाग के मुताबिक, परिसर में 5000 लीटर क्षमता की बल्क मिल्क कूलर यानी बीएमसी संचालित पाई गई। निरीक्षण के दौरान बीएमसी में करीब 4000 लीटर मिश्रित दूध का संग्रहण और भंडारण पाया गया, जिसे मानव उपभोग के लिए बेचा जा रहा था।
लाइसेंस मांगा तो मिला परिवहन का पंजीयन
निरीक्षण के दौरान अधिकारियों ने खाद्य कारोबार से संबंधित खाद्य अनुज्ञप्ति यानी लाइसेंस प्रस्तुत करने के लिए कहा। विभाग के मुताबिक, संबंधित पक्ष की ओर से केवल परिवहन संबंधी खाद्य पंजीयन प्रस्तुत किया गया। खाद्य सुरक्षा विभाग ने बताया कि बीएमसी के माध्यम से दूध संग्रहण और विक्रय के लिए आवश्यक वैध खाद्य अनुज्ञप्ति निरीक्षण के दौरान उपलब्ध नहीं पाई गई। इसके बाद मामले में खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम के तहत कार्रवाई की गई।
विभाग के अनुसार, जांच में खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम, 2006 की धारा 26(1), 26(2)(iii), 27 एवं 31(1) सहपठित धारा 63 के उल्लंघन पाए गए।
ADM न्यायालय पहुंचा मामला
विभाग से प्राप्त जानकारी के मुताबिक, प्लांट प्रभारी कमलेश कुमार जाट और प्लांट संचालक दिनेश कुमार जाट के विरुद्ध 28 जुलाई 2026 को अपर कलेक्टर न्यायालय, जिला नीमच में प्रकरण दर्ज किया गया है। विभाग ने बताया कि अधिनियम के अनुसार बिना आवश्यक खाद्य अनुज्ञप्ति के खाद्य कारोबार संचालित करने पर अधिकतम 10 लाख रुपये तक के अर्थदंड का प्रावधान है। हालांकि, संबंधित प्रकरण में दंड का अंतिम निर्धारण न्यायिक प्रक्रिया के अनुसार होगा।
अगले दिन रावण रूंडी में भी निरीक्षण
मिल्क प्लांट की कार्रवाई के बाद खाद्य सुरक्षा विभाग का अभियान जारी रहा। 29 जुलाई 2026 को रावण रूंडी, नीमच स्थित श्री जोगमाया सेल्स का आकस्मिक निरीक्षण किया गया।विभाग के अनुसार, यहां मानव उपभोग के लिए बिक्री किए जा रहे प्रभु श्री घी और डीएफ गोल्ड घी के नमूने खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम, 2006 के तहत लिए गए। इन नमूनों को मानक गुणवत्ता परीक्षण के लिए राज्य खाद्य परीक्षण प्रयोगशाला भेजा गया है।
फिलहाल दोनों नमूनों की जांच रिपोर्ट आना बाकी है। इसलिए नमूने लिए जाने को संबंधित घी के अमानक या मिलावटी होने की पुष्टि नहीं माना जा सकता। विभाग ने बताया कि परीक्षण प्रतिवेदन मिलने के बाद परिणाम के आधार पर नियमानुसार आगे की वैधानिक कार्रवाई की जाएगी।
नीमच जिले में जारी रहेगा अभियान
पूरी कार्रवाई खाद्य सुरक्षा अधिकारी राजू सोलंकी, यशवंत कुमार शर्मा एवं उनकी टीम द्वारा की गई। प्रशासन से मिली जानकारी के अनुसार, जिले में मिलावटी एवं अमानक खाद्य पदार्थों के खिलाफ विशेष जांच और सैंपलिंग अभियान आगे भी जारी रहेगा।
खाद्य सुरक्षा विभाग जिले के विभिन्न खाद्य प्रतिष्ठानों का आकस्मिक निरीक्षण कर खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम, 2006 के प्रावधानों के अनुसार कार्रवाई कर रहा है। ताजा कार्रवाई में जहां दुधलाई के मिल्क प्लांट का मामला अपर कलेक्टर न्यायालय तक पहुंचा है, वहीं रावण रूंडी से लिए गए घी के नमूनों की प्रयोगशाला रिपोर्ट का इंतजार है।
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