धर्म डेस्क, नीमच । भगवान विष्णु माता पार्वती के भाई कैसे बने, यह सवाल हिंदू धार्मिक कथाओं में बताए गए एक रोचक संबंध से जुड़ा है। पुराणिक मान्यताओं के अनुसार, भगवान विष्णु को माता पार्वती का आध्यात्मिक भाई माना जाता है। शिव-पार्वती विवाह के प्रसंग में भगवान विष्णु ने भाई की भूमिका निभाई थी, जिसके बाद विष्णु और पार्वती के इस संबंध की धार्मिक मान्यता और भी महत्वपूर्ण मानी गई।
यह संबंध केवल शिव-पार्वती विवाह की कथा तक सीमित नहीं बताया जाता। भगवान कृष्ण के जन्म से जुड़े एक प्रसंग और दक्षिण भारत की धार्मिक परंपराओं में भी इस भाई-बहन संबंध की व्याख्या मिलती है। हालांकि, अलग-अलग धार्मिक ग्रंथों और परंपराओं में इन कथाओं का विवरण अलग-अलग हो सकता है।
आखिर भगवान विष्णु और माता पार्वती का रिश्ता क्या है?
पुराणिक परंपराओं में देवी पार्वती को शक्ति के विभिन्न स्वरूपों से जोड़ा गया है। उनके पूर्व जन्म को सती या दक्षायणी के रूप में बताया जाता है। बाद में उन्होंने माता पार्वती के रूप में जन्म लिया और भगवान शिव से विवाह किया। धार्मिक कथा के अनुसार, भगवान विष्णु को माता पार्वती का आध्यात्मिक भाई माना गया। इसका सबसे प्रमुख प्रसंग शिव-पार्वती विवाह से जुड़ा बताया जाता है।
इसी विवाह कथा में भगवान विष्णु की भूमिका को लेकर भी एक महत्वपूर्ण धार्मिक मान्यता बताई जाती है। माता पार्वती विवाह के दौरान भाई से जुड़ी रस्मों को लेकर चिंतित थीं। तब भगवान विष्णु प्रकट हुए और उन्होंने भाई की सभी आवश्यक रस्में निभाने की बात कही। भगवान विष्णु ने माता पार्वती के भाई के रूप में विवाह समारोह में भूमिका निभाई। इसी कारण कुछ धार्मिक परंपराओं में विष्णु जी को पार्वती जी का आध्यात्मिक भाई कहा जाता है।
यह रिश्ता जन्म से जुड़े सामान्य पारिवारिक संबंध की तरह नहीं, बल्कि धार्मिक और आध्यात्मिक मान्यता के रूप में समझा जाता है।
कृष्ण जन्म की कथा से भी जुड़ता है संबंध
भगवान विष्णु और माता पार्वती के संबंध को लेकर एक अन्य प्रसंग भगवान कृष्ण के जन्म से जुड़ा बताया जाता है। धार्मिक कथा के अनुसार, द्वापर युग में भगवान विष्णु ने भगवान कृष्ण के रूप में जन्म लिया। उसी समय गोकुल में नंद और यशोदा के घर एक कन्या का जन्म हुआ था। वासुदेव भगवान कृष्ण को लेकर गोकुल पहुंचे और वहां से उस कन्या को लेकर मथुरा लौटे। इसके बाद जब कंस ने उस बच्ची को मारने का प्रयास किया तो वह उसके हाथ से निकलकर आकाश में चली गई।
कथा में बताया जाता है कि वह कन्या देवी के रूप में प्रकट हुई। प्रस्तुत धार्मिक विवरण में इस देवी स्वरूप को माता पार्वती के अवतार से जोड़ा गया है। इसी आधार पर कृष्ण और देवी के बीच भाई-बहन के संबंध की धार्मिक व्याख्या की जाती है। चूंकि भगवान कृष्ण को भगवान विष्णु का अवतार माना जाता है, इसलिए यह प्रसंग विष्णु और पार्वती के संबंध से भी जोड़ा जाता है।
मुरुगन को क्यों कहा जाता है विष्णु का भांजा?
दक्षिण भारत में भगवान मुरुगन की विशेष धार्मिक मान्यता है। उन्हें भगवान कार्तिकेय के नाम से भी जाना जाता है। धार्मिक परंपरा के अनुसार, भगवान मुरुगन माता पार्वती और भगवान शिव के पुत्र हैं। प्रस्तुत कथा के अनुसार, कुछ दक्षिण भारतीय परंपराओं में मुरुगन को भगवान विष्णु का भांजा कहा जाता है। इसके पीछे वही धार्मिक संबंध माना जाता है, जिसके अनुसार भगवान विष्णु माता पार्वती के भाई हैं।
अगर माता पार्वती को विष्णु जी की बहन माना जाए, तो उनके पुत्र मुरुगन भगवान विष्णु के भांजे माने जाएंगे। इसी पारिवारिक संबंध के आधार पर यह धार्मिक संबोधन सामने आता है।
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