भगवान विष्णु माता पार्वती के भाई कैसे बने? कथा में छिपा है यह रहस्य
Reported by: News Desk | Edited by: आकाश शर्मा
28 अगस्त 2026, (अपडेटेड 28 अगस्त 2026, 10:45 पूर्वाह्न IST)

धर्म डेस्क, नीमच । भगवान विष्णु माता पार्वती के भाई कैसे बने, यह सवाल हिंदू धार्मिक कथाओं में बताए गए एक रोचक संबंध से जुड़ा है। पुराणिक मान्यताओं के अनुसार, भगवान विष्णु को माता पार्वती का आध्यात्मिक भाई माना जाता है। शिव-पार्वती विवाह के प्रसंग में भगवान विष्णु ने भाई की भूमिका निभाई थी, जिसके बाद विष्णु और पार्वती के इस संबंध की धार्मिक मान्यता और भी महत्वपूर्ण मानी गई।

यह संबंध केवल शिव-पार्वती विवाह की कथा तक सीमित नहीं बताया जाता। भगवान कृष्ण के जन्म से जुड़े एक प्रसंग और दक्षिण भारत की धार्मिक परंपराओं में भी इस भाई-बहन संबंध की व्याख्या मिलती है। हालांकि, अलग-अलग धार्मिक ग्रंथों और परंपराओं में इन कथाओं का विवरण अलग-अलग हो सकता है।

आखिर भगवान विष्णु और माता पार्वती का रिश्ता क्या है?

पुराणिक परंपराओं में देवी पार्वती को शक्ति के विभिन्न स्वरूपों से जोड़ा गया है। उनके पूर्व जन्म को सती या दक्षायणी के रूप में बताया जाता है। बाद में उन्होंने माता पार्वती के रूप में जन्म लिया और भगवान शिव से विवाह किया। धार्मिक कथा के अनुसार, भगवान विष्णु को माता पार्वती का आध्यात्मिक भाई माना गया। इसका सबसे प्रमुख प्रसंग शिव-पार्वती विवाह से जुड़ा बताया जाता है।

इसी विवाह कथा में भगवान विष्णु की भूमिका को लेकर भी एक महत्वपूर्ण धार्मिक मान्यता बताई जाती है। माता पार्वती विवाह के दौरान भाई से जुड़ी रस्मों को लेकर चिंतित थीं। तब भगवान विष्णु प्रकट हुए और उन्होंने भाई की सभी आवश्यक रस्में निभाने की बात कही। भगवान विष्णु ने माता पार्वती के भाई के रूप में विवाह समारोह में भूमिका निभाई। इसी कारण कुछ धार्मिक परंपराओं में विष्णु जी को पार्वती जी का आध्यात्मिक भाई कहा जाता है।

यह रिश्ता जन्म से जुड़े सामान्य पारिवारिक संबंध की तरह नहीं, बल्कि धार्मिक और आध्यात्मिक मान्यता के रूप में समझा जाता है।

कृष्ण जन्म की कथा से भी जुड़ता है संबंध

भगवान विष्णु और माता पार्वती के संबंध को लेकर एक अन्य प्रसंग भगवान कृष्ण के जन्म से जुड़ा बताया जाता है। धार्मिक कथा के अनुसार, द्वापर युग में भगवान विष्णु ने भगवान कृष्ण के रूप में जन्म लिया। उसी समय गोकुल में नंद और यशोदा के घर एक कन्या का जन्म हुआ था। वासुदेव भगवान कृष्ण को लेकर गोकुल पहुंचे और वहां से उस कन्या को लेकर मथुरा लौटे। इसके बाद जब कंस ने उस बच्ची को मारने का प्रयास किया तो वह उसके हाथ से निकलकर आकाश में चली गई।

कथा में बताया जाता है कि वह कन्या देवी के रूप में प्रकट हुई। प्रस्तुत धार्मिक विवरण में इस देवी स्वरूप को माता पार्वती के अवतार से जोड़ा गया है। इसी आधार पर कृष्ण और देवी के बीच भाई-बहन के संबंध की धार्मिक व्याख्या की जाती है। चूंकि भगवान कृष्ण को भगवान विष्णु का अवतार माना जाता है, इसलिए यह प्रसंग विष्णु और पार्वती के संबंध से भी जोड़ा जाता है।

मुरुगन को क्यों कहा जाता है विष्णु का भांजा?

दक्षिण भारत में भगवान मुरुगन की विशेष धार्मिक मान्यता है। उन्हें भगवान कार्तिकेय के नाम से भी जाना जाता है। धार्मिक परंपरा के अनुसार, भगवान मुरुगन माता पार्वती और भगवान शिव के पुत्र हैं। प्रस्तुत कथा के अनुसार, कुछ दक्षिण भारतीय परंपराओं में मुरुगन को भगवान विष्णु का भांजा कहा जाता है। इसके पीछे वही धार्मिक संबंध माना जाता है, जिसके अनुसार भगवान विष्णु माता पार्वती के भाई हैं।

अगर माता पार्वती को विष्णु जी की बहन माना जाए, तो उनके पुत्र मुरुगन भगवान विष्णु के भांजे माने जाएंगे। इसी पारिवारिक संबंध के आधार पर यह धार्मिक संबोधन सामने आता है।


ताज़ा ख़बरों का अपडेट सीधा अपने फोन पर पाने के लिए हमारे WhatsApp चैनल से जुड़ें

Aakash Sharma
Aakash Sharmahttps://thetimesofmp.com
आकाश शर्मा मध्यप्रदेश के नीमच क्षेत्र में सक्रिय पत्रकार और द टाइम्स ऑफ MP के संपादक हैं। उन्हें प्रिंट मीडिया में 12 वर्षों का पत्रकारिता अनुभव है। लंबे समय से स्थानीय एवं जनसरोकार से जुड़े मुद्दों की रिपोर्टिंग, समाचार संपादन और समाचार प्रकाशन के क्षेत्र में सक्रिय रहते हुए उन्होंने स्थानीय पत्रकारिता में व्यापक अनुभव हासिल किया है।द टाइम्स ऑफ MP के माध्यम से आकाश शर्मा नीमच, मंदसौर और आसपास के क्षेत्रों से जुड़ी महत्वपूर्ण खबरों को पाठकों तक पहुंचाने का कार्य करते हैं। उनकी कवरेज में स्थानीय प्रशासन, पुलिस एवं कानून-व्यवस्था, जनसमस्याएं, नागरिक सुविधाएं, राजनीति, सामाजिक गतिविधियां, शिक्षा, कृषि, व्यापार और अन्य जनहित से जुड़े विषय शामिल हैं।उनकी संपादकीय कार्यशैली में तथ्यपरक रिपोर्टिंग, स्रोत-आधारित जानकारी, निष्पक्ष प्रस्तुति और जिम्मेदार पत्रकारिता को प्राथमिकता दी जाती है। संवेदनशील और अपराध से जुड़े मामलों की रिपोर्टिंग में आरोप और प्रमाणित तथ्य के बीच अंतर बनाए रखने तथा उपलब्ध आधिकारिक एवं विश्वसनीय स्रोतों के आधार पर खबर प्रस्तुत करने पर विशेष ध्यान दिया जाता है।पत्रकारिता के साथ आकाश शर्मा पिछले 4 वर्षों से पैरा लीगल वॉलंटियर (PLV) के रूप में भी कार्य कर रहे हैं। इस भूमिका में वे कानूनी जागरूकता और जनहित से जुड़े कार्यों से जुड़े रहे हैं। इसके साथ ही वे इंटरनेशनल ह्यूमन सिक्योरिटी ऑर्गनाइजेशन में जिला उपाध्यक्ष (District Vice President) के दायित्व का निर्वहन कर रहे हैं।अनुभव 12 वर्ष — प्रिंट मीडिया एवं पत्रकारिता का अनुभव 4 वर्ष — पैरा लीगल वॉलंटियर (PLV) के रूप में अनुभव संपादक — द टाइम्स ऑफ MP जिला उपाध्यक्ष — इंटरनेशनल ह्यूमन सिक्योरिटी ऑर्गनाइजेशनआकाश शर्मा का उद्देश्य स्थानीय स्तर की महत्वपूर्ण सूचनाओं को विश्वसनीय, स्पष्ट, तथ्यपरक और जिम्मेदार पत्रकारिता के माध्यम से पाठकों तक पहुंचाना तथा आम नागरिकों से जुड़े मुद्दों को प्रभावी मंच प्रदान करना है।विशेषज्ञता: स्थानीय पत्रकारिता | प्रिंट मीडिया | समाचार संपादन | डिजिटल पत्रकारिता | स्थानीय समाचार रिपोर्टिंग | जनहित के मुद्दे | कानूनी जागरूकता |

Hot this week

पालसोड़ा एक्सीडेंट में 1 युवक की मौत, 2 की हालत गंभीर

पालसोड़ा एक्सीडेंट: नीमच जिले के जीरन थाना क्षेत्र में...

उज्जैन शूटिंग रेंज मारपीट: VIDEO में कैद कोच पर हमला, सिस्टम पर उठे सवाल

उज्जैन (Ujjain Crime News)। उज्जैन शूटिंग रेंज मारपीट का...

रिद्धि राठौड़ का शानदार प्रदर्शन, 400 और 600 मीटर दौड़ में जीते स्वर्ण पदक

नीमच। शालेय संभाग स्तरीय एथलेटिक्स प्रतियोगिता में स्विमफ्लाय स्पोर्ट्स...

मनासा में घर में सो रहे 40 वर्षीय कालू को सांप ने काटा, समय पर अस्पताल पहुंचाया

मनासा। नीमच जिले के मनासा क्षेत्र में शुक्रवार अलसुबह...

Related Articles

Popular Categories