चित्तौड़गढ़: सैनिक स्कूल चित्तौड़गढ़ में लेफ्टिनेंट कर्नल ईशा ठकराल ने नई वाइस प्रिंसिपल के रूप में पदभार संभाल लिया है। स्कूल पहुंचने पर प्रशासन की ओर से उनका स्वागत किया गया। इसके बाद स्कूल के प्रिंसिपल कर्नल अनिल देव सिंह जसरोटिया ने उन्हें संस्थान की शैक्षणिक व्यवस्था, अनुशासन प्रणाली और छात्र गतिविधियों की जानकारी दी।
स्कूल प्रशासन के अनुसार, शिक्षा और प्रशासनिक क्षेत्र में उनके अनुभव का लाभ छात्रों और संस्थान दोनों को मिलेगा।
आर्मी एजुकेशनल कोर की अनुभवी अधिकारी हैं ईशा ठकराल
सैनिक स्कूल चित्तौड़गढ़ के जनसंपर्क अधिकारी बाबूलाल शिवरान ने बताया कि लेफ्टिनेंट कर्नल ईशा ठकराल आर्मी एजुकेशनल कोर की वरिष्ठ और अनुभवी अधिकारी हैं। उन्हें 16 सितंबर 2006 को भारतीय सेना में कमीशन प्राप्त हुआ था।
वह दूसरी पीढ़ी की सेना अधिकारी हैं और ऑफिसर्स ट्रेनिंग अकादमी, चेन्नई की पूर्व छात्रा भी रह चुकी हैं। उन्होंने जम्मू यूनिवर्सिटी से इंग्लिश लिटरेचर में पोस्ट ग्रेजुएशन किया है।
शिक्षा, नेतृत्व और प्रशासन में रहा महत्वपूर्ण योगदान
सेना में अपने कार्यकाल के दौरान लेफ्टिनेंट कर्नल ईशा ठकराल ने शिक्षा, प्रशासन, नेतृत्व और जनसंपर्क से जुड़े कई महत्वपूर्ण दायित्व निभाए हैं। स्कूल प्रशासन का मानना है कि उनका अनुभव सैनिक स्कूल चित्तौड़गढ़ की शैक्षणिक और प्रशासनिक गुणवत्ता को और मजबूत करेगा।
प्रशासन के मुताबिक, छात्रों में नेतृत्व क्षमता और अनुशासन विकसित करने में उनकी भूमिका महत्वपूर्ण साबित हो सकती है।
भारतीय सैन्य अकादमी देहरादून में भी निभा चुकी हैं जिम्मेदारी
लेफ्टिनेंट कर्नल ईशा ठकराल वर्ष 2008 से 2011 तक भारतीय सैन्य अकादमी (IMA) देहरादून में जनसंपर्क अधिकारी के रूप में सेवाएं दे चुकी हैं।
इस दौरान उन्होंने जेंटलमैन कैडेट्स के प्रशिक्षण से जुड़े कई कार्यों का संचालन किया। साथ ही अकादमी की संचार व्यवस्था और आउटरीच गतिविधियों में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।
छात्रों के व्यक्तित्व विकास पर रहेगा विशेष फोकस
पदभार ग्रहण करने के बाद लेफ्टिनेंट कर्नल ईशा ठकराल ने कहा कि सैनिक स्कूल चित्तौड़गढ़ पहले से ही बेहतर कार्य कर रहा है और वह इसे नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने के लिए पूरी मेहनत करेंगी।
उन्होंने कहा कि छात्रों की पढ़ाई के साथ-साथ अनुशासन, नेतृत्व क्षमता और व्यक्तित्व विकास पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। उनका लक्ष्य स्कूल को देश के अग्रणी सैनिक स्कूलों में शामिल करने की दिशा में काम करना है।
स्कूल प्रशासन को नई ऊर्जा मिलने की उम्मीद
स्कूल प्रशासन का कहना है कि सेना की शिक्षा और अनुशासन व्यवस्था में उनके अनुभव से संस्थान को नई दिशा मिलेगी। साथ ही छात्रों को बेहतर शैक्षणिक वातावरण और नेतृत्व विकास के अवसर उपलब्ध कराने में भी मदद मिलेगी।
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