कहीं आपका डोरमैट ही तो नहीं रोक रहा मां लक्ष्मी का प्रवेश? जानिए वास्तु नियम
Reported by: News Desk | Edited by: आकाश शर्मा
01 जून 2026, (अपडेटेड 01 जून 2026, 3:00 अपराह्न IST)

धर्म डेस्क/नीमच। घर के मुख्य द्वार को वास्तु शास्त्र में बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। मान्यता है कि यहीं से घर में सकारात्मक और नकारात्मक ऊर्जा प्रवेश करती है। ऐसे में मुख्य दरवाजे पर रखा डोरमैट या पायदान भी घर की सुख-समृद्धि और आर्थिक स्थिति को प्रभावित कर सकता है। वास्तु शास्त्र में डोरमैट वास्तु से जुड़े कई नियम बताए गए हैं, जिनका पालन करने से घर में सकारात्मक वातावरण बना रह सकता है।

अक्सर लोग घर की सजावट पर ध्यान देते हैं, लेकिन मुख्य द्वार पर बिछे पायदान को नजरअंदाज कर देते हैं। वास्तु मान्यताओं के अनुसार गलत रंग, गलत मटीरियल या गंदा डोरमैट घर में नकारात्मक ऊर्जा को बढ़ा सकता है। वहीं सही दिशा और सही रंग का पायदान सकारात्मक ऊर्जा को आकर्षित करने वाला माना जाता है।

दिशा के अनुसार चुनें सही रंग

डोरमैट वास्तु में दिशाओं का विशेष महत्व बताया गया है। वास्तु शास्त्र के अनुसार मुख्य द्वार की दिशा के हिसाब से पायदान का रंग चुनना शुभ माना जाता है।

  • यदि घर का मुख्य द्वार उत्तर या पूर्व दिशा में है, तो हरे या नीले रंग का डोरमैट बेहतर माना जाता है।
  • दक्षिण दिशा के दरवाजे के लिए लाल या मैरून रंग शुभ माना गया है।
  • पश्चिम दिशा में सफेद या ग्रे रंग का पायदान रखने की सलाह दी जाती है।
  • दक्षिण-पश्चिम दिशा में पीले या सुनहरे रंग का डोरमैट शुभ फल देने वाला माना गया है।

मान्यता है कि दिशा के अनुसार चुना गया रंग घर में सकारात्मक ऊर्जा के प्रवाह को संतुलित बनाए रखता है।

प्राकृतिक रेशों से बने पायदान को माना गया शुभ

डोरमैट वास्तु के अनुसार पायदान का मटीरियल भी महत्वपूर्ण होता है। वास्तु विशेषज्ञ प्राकृतिक रेशों से बने डोरमैट इस्तेमाल करने की सलाह देते हैं। सूती कपड़े, जूट और नारियल की जटा से बने पायदान सकारात्मक ऊर्जा को आकर्षित करने वाले माने जाते हैं।

वहीं रबर और सिंथेटिक फाइबर से बने डोरमैट को वास्तु में शुभ नहीं माना गया है। मान्यता है कि ऐसे पायदान नकारात्मक ऊर्जा को सोख लेते हैं, जिससे घर में तनाव और आर्थिक परेशानियां बढ़ सकती हैं।

गंदा और गीला डोरमैट बढ़ा सकता है नकारात्मकता

वास्तु शास्त्र में मुख्य द्वार की साफ-सफाई को बेहद जरूरी बताया गया है। डोरमैट वास्तु के अनुसार पायदान हमेशा साफ और सूखा होना चाहिए। गंदा और लंबे समय तक बिना साफ किया गया डोरमैट नकारात्मक ऊर्जा का कारण बन सकता है।

मान्यता है कि मुख्य द्वार पर जमा गंदगी राहु और केतु से जुड़े दोषों को बढ़ा सकती है, जिससे कार्यों में रुकावट आने लगती है। इसलिए पायदान की नियमित सफाई और समय-समय पर बदलाव जरूरी माना गया है।

धार्मिक चिन्ह वाले डोरमैट से बचने की सलाह

आजकल बाजार में ऐसे कई डोरमैट मिलते हैं, जिन पर ‘ॐ’, स्वस्तिक या देवी-देवताओं की तस्वीरें बनी होती हैं। हालांकि डोरमैट वास्तु में इसे शुभ नहीं माना गया है।

वास्तु मान्यताओं के अनुसार इन पवित्र प्रतीकों पर पैर लगना अशुभ प्रभाव पैदा कर सकता है। इसलिए मुख्य द्वार पर ऐसे पायदान का इस्तेमाल करने से बचने की सलाह दी जाती है।

फटा हुआ पायदान माना जाता है अशुभ

डोरमैट वास्तु में पुराने, फटे या अत्यधिक खराब हो चुके पायदान को दरिद्रता का संकेत माना गया है। मान्यता है कि ऐसा डोरमैट घर में मानसिक तनाव, पारिवारिक क्लेश और आर्थिक परेशानियों को बढ़ा सकता है।

विशेषज्ञों के अनुसार यदि डोरमैट ज्यादा पुराना हो गया हो, तो उसे तुरंत बदल देना चाहिए। मुख्य द्वार पर साफ और व्यवस्थित पायदान रखना शुभ माना जाता है।

फिटकरी का छोटा उपाय बढ़ा सकता है सकारात्मकता

डोरमैट वास्तु में एक छोटा उपाय भी बताया गया है। मान्यता है कि यदि मुख्य द्वार के डोरमैट के नीचे सूती कपड़े में थोड़ी-सी फिटकरी बांधकर रखी जाए, तो यह नकारात्मक ऊर्जा और नजर दोष को दूर रखने में मदद कर सकता है।

कई लोग इसे घर में सुख-शांति और सकारात्मक वातावरण बनाए रखने वाला उपाय मानते हैं। हालांकि इन मान्यताओं के वैज्ञानिक प्रमाण उपलब्ध नहीं हैं।

अस्वीकरण

यह लेख विभिन्न वास्तु मान्यताओं, धार्मिक विश्वासों और पारंपरिक जानकारियों पर आधारित है। इसका उद्देश्य केवल सामान्य सूचना प्रदान करना है। किसी भी उपाय को अपनाने से पहले अपने विवेक का उपयोग करें।


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Aakash Sharma
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आकाश शर्मा मध्यप्रदेश के नीमच क्षेत्र में सक्रिय पत्रकार और द टाइम्स ऑफ MP के संपादक हैं। उन्हें प्रिंट मीडिया में 12 वर्षों का पत्रकारिता अनुभव है। लंबे समय से स्थानीय एवं जनसरोकार से जुड़े मुद्दों की रिपोर्टिंग, समाचार संपादन और समाचार प्रकाशन के क्षेत्र में सक्रिय रहते हुए उन्होंने स्थानीय पत्रकारिता में व्यापक अनुभव हासिल किया है।द टाइम्स ऑफ MP के माध्यम से आकाश शर्मा नीमच, मंदसौर और आसपास के क्षेत्रों से जुड़ी महत्वपूर्ण खबरों को पाठकों तक पहुंचाने का कार्य करते हैं। उनकी कवरेज में स्थानीय प्रशासन, पुलिस एवं कानून-व्यवस्था, जनसमस्याएं, नागरिक सुविधाएं, राजनीति, सामाजिक गतिविधियां, शिक्षा, कृषि, व्यापार और अन्य जनहित से जुड़े विषय शामिल हैं।उनकी संपादकीय कार्यशैली में तथ्यपरक रिपोर्टिंग, स्रोत-आधारित जानकारी, निष्पक्ष प्रस्तुति और जिम्मेदार पत्रकारिता को प्राथमिकता दी जाती है। संवेदनशील और अपराध से जुड़े मामलों की रिपोर्टिंग में आरोप और प्रमाणित तथ्य के बीच अंतर बनाए रखने तथा उपलब्ध आधिकारिक एवं विश्वसनीय स्रोतों के आधार पर खबर प्रस्तुत करने पर विशेष ध्यान दिया जाता है।पत्रकारिता के साथ आकाश शर्मा पिछले 4 वर्षों से पैरा लीगल वॉलंटियर (PLV) के रूप में भी कार्य कर रहे हैं। इस भूमिका में वे कानूनी जागरूकता और जनहित से जुड़े कार्यों से जुड़े रहे हैं। इसके साथ ही वे इंटरनेशनल ह्यूमन सिक्योरिटी ऑर्गनाइजेशन में जिला उपाध्यक्ष (District Vice President) के दायित्व का निर्वहन कर रहे हैं।अनुभव 12 वर्ष — प्रिंट मीडिया एवं पत्रकारिता का अनुभव 4 वर्ष — पैरा लीगल वॉलंटियर (PLV) के रूप में अनुभव संपादक — द टाइम्स ऑफ MP जिला उपाध्यक्ष — इंटरनेशनल ह्यूमन सिक्योरिटी ऑर्गनाइजेशनआकाश शर्मा का उद्देश्य स्थानीय स्तर की महत्वपूर्ण सूचनाओं को विश्वसनीय, स्पष्ट, तथ्यपरक और जिम्मेदार पत्रकारिता के माध्यम से पाठकों तक पहुंचाना तथा आम नागरिकों से जुड़े मुद्दों को प्रभावी मंच प्रदान करना है।विशेषज्ञता: स्थानीय पत्रकारिता | प्रिंट मीडिया | समाचार संपादन | डिजिटल पत्रकारिता | स्थानीय समाचार रिपोर्टिंग | जनहित के मुद्दे | कानूनी जागरूकता |

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