अचार के डिब्बे में छुपा था करोड़ों के खेल का राज! 7 लाख के कर्ज ने युवक को बना दिया अफीम सप्लाई का खिलाड़ी
Reported by: News Desk | Edited by: आकाश शर्मा
05 जून 2026, (अपडेटेड 05 जून 2026, 2:42 अपराह्न IST)

चित्तौड़गढ़। राजस्थान के चित्तौड़गढ़ जिले में अफीम सप्लाई का एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। आर्थिक तंगी और लाखों के कर्ज में फंसा एक युवक तस्करी के नेटवर्क से जुड़ गया। आरोपी अचार के डिब्बे में 1.215 किलो अफीम छुपाकर सप्लाई देने जा रहा था, लेकिन एएनटीएफ और स्थानीय पुलिस की संयुक्त कार्रवाई में पकड़ा गया।

पुलिस के अनुसार आरोपी ने अफीम को छुपाने के लिए ऐसा तरीका अपनाया था, जिससे सामान्य जांच में किसी को शक न हो। डिब्बे के नीचे थैली में अफीम रखी गई थी और ऊपर अचार भर दिया गया था। हालांकि सटीक सूचना के आधार पर की गई कार्रवाई में पूरा मामला खुल गया।

सूचना मिलते ही मौके पर पहुंची टीम

एएनटीएफ के महानिरीक्षक विकास कुमार ने बताया कि टीम को सूचना मिली थी कि बस्सी थाना क्षेत्र के नगरी आम रोड पर एक संदिग्ध व्यक्ति अवैध मादक पदार्थ के साथ मौजूद है। सूचना मिलने के बाद टीम तुरंत मौके पर पहुंची और बताए गए हुलिये के आधार पर एक युवक को घेराबंदी कर पकड़ लिया।

कानूनी प्रक्रिया पूरी करने के लिए स्थानीय पुलिस को भी मौके पर बुलाया गया। इसके बाद पुलिस अधिकारियों की मौजूदगी में युवक की तलाशी शुरू की गई।

अचार के डिब्बे में छुपाई गई थी अफीम

अफीम सप्लाई

अफीम सप्लाई

तलाशी के दौरान पुलिस को युवक के पास रखा अचार का डिब्बा संदिग्ध लगा। जब डिब्बे को खोला गया तो उसके अंदर अफीम छुपाने का पूरा खेल सामने आ गया। पुलिस के मुताबिक आरोपी ने नीचे एक प्लास्टिक थैली में अफीम रखी थी और ऊपर अचार भर दिया था ताकि चेकिंग के दौरान किसी को शक न हो।

जांच के दौरान पुलिस ने डिब्बे से कुल 1.215 किलोग्राम अवैध अफीम बरामद की। इसके बाद मादक पदार्थ जब्त कर आरोपी को गिरफ्तार कर लिया गया।

7 लाख के कर्ज ने बदल दी जिंदगी

गिरफ्तार आरोपी की पहचान राधेश्याम पुत्र बंशीलाल सालवी (30) निवासी आवलहेड़ा, थाना बस्सी के रूप में हुई है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने पुलिस को बताया कि उस पर करीब 7 लाख रुपए का कर्ज हो गया था।

पुलिस के अनुसार आर्थिक दबाव के कारण वह अफीम सप्लाई से जुड़े लोगों के संपर्क में आया और धीरे-धीरे सप्लाई का काम करने लगा। आरोपी ने पूछताछ में यह भी स्वीकार किया कि वह नशे का आदी है।

एक खेप पहुंचाने के मिलते थे 5 हजार रुपए

पूछताछ में आरोपी ने बताया कि उसे हर बार अफीम की खेप पहुंचाने के बदले करीब 5 हजार रुपए दिए जाते थे। शुरुआती जांच में सामने आया है कि आरोपी सप्लाई चेन में केवल माल पहुंचाने का काम करता था। फिलहाल पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि आरोपी तक अफीम कौन पहुंचा रहा था और यह खेप कहां भेजी जानी थी। मामले में एनडीपीएस एक्ट के तहत प्रकरण दर्ज कर जांच शुरू कर दी गई है।

अफीम सप्लाई नेटवर्क की जांच में जुटी पुलिस

पुलिस अधिकारियों के अनुसार अब इस पूरे अफीम सप्लाई नेटवर्क की कड़ियां जोड़ी जा रही हैं। जांच एजेंसियां यह पता लगाने का प्रयास कर रही हैं कि आरोपी कब से इस अवैध कारोबार में शामिल था और उसके संपर्क में कौन-कौन लोग थे।

तकनीकी और स्थानीय स्तर पर जांच जारी है। पुलिस का मानना है कि मामले में अन्य लोगों की संलिप्तता भी सामने आ सकती है।

लगातार बदल रहे हैं तस्करी के तरीके

राजस्थान के कई इलाकों में मादक पदार्थ तस्करी के मामलों में लगातार नए तरीके सामने आ रहे हैं। इस मामले में भी आरोपी ने अचार के डिब्बे का इस्तेमाल कर पुलिस को गुमराह करने की कोशिश की, लेकिन सूचना सटीक होने के कारण उसकी योजना सफल नहीं हो सकी।

पुलिस और एएनटीएफ की टीमें लगातार ऐसे नेटवर्क पर नजर बनाए हुए हैं और संदिग्ध गतिविधियों पर कार्रवाई की जा रही है।


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Aakash Sharma
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आकाश शर्मा मध्यप्रदेश के नीमच क्षेत्र में सक्रिय पत्रकार और द टाइम्स ऑफ MP के संपादक हैं। उन्हें प्रिंट मीडिया में 12 वर्षों का पत्रकारिता अनुभव है। लंबे समय से स्थानीय एवं जनसरोकार से जुड़े मुद्दों की रिपोर्टिंग, समाचार संपादन और समाचार प्रकाशन के क्षेत्र में सक्रिय रहते हुए उन्होंने स्थानीय पत्रकारिता में व्यापक अनुभव हासिल किया है।द टाइम्स ऑफ MP के माध्यम से आकाश शर्मा नीमच, मंदसौर और आसपास के क्षेत्रों से जुड़ी महत्वपूर्ण खबरों को पाठकों तक पहुंचाने का कार्य करते हैं। उनकी कवरेज में स्थानीय प्रशासन, पुलिस एवं कानून-व्यवस्था, जनसमस्याएं, नागरिक सुविधाएं, राजनीति, सामाजिक गतिविधियां, शिक्षा, कृषि, व्यापार और अन्य जनहित से जुड़े विषय शामिल हैं।उनकी संपादकीय कार्यशैली में तथ्यपरक रिपोर्टिंग, स्रोत-आधारित जानकारी, निष्पक्ष प्रस्तुति और जिम्मेदार पत्रकारिता को प्राथमिकता दी जाती है। संवेदनशील और अपराध से जुड़े मामलों की रिपोर्टिंग में आरोप और प्रमाणित तथ्य के बीच अंतर बनाए रखने तथा उपलब्ध आधिकारिक एवं विश्वसनीय स्रोतों के आधार पर खबर प्रस्तुत करने पर विशेष ध्यान दिया जाता है।पत्रकारिता के साथ आकाश शर्मा पिछले 4 वर्षों से पैरा लीगल वॉलंटियर (PLV) के रूप में भी कार्य कर रहे हैं। इस भूमिका में वे कानूनी जागरूकता और जनहित से जुड़े कार्यों से जुड़े रहे हैं। इसके साथ ही वे इंटरनेशनल ह्यूमन सिक्योरिटी ऑर्गनाइजेशन में जिला उपाध्यक्ष (District Vice President) के दायित्व का निर्वहन कर रहे हैं।अनुभव 12 वर्ष — प्रिंट मीडिया एवं पत्रकारिता का अनुभव 4 वर्ष — पैरा लीगल वॉलंटियर (PLV) के रूप में अनुभव संपादक — द टाइम्स ऑफ MP जिला उपाध्यक्ष — इंटरनेशनल ह्यूमन सिक्योरिटी ऑर्गनाइजेशनआकाश शर्मा का उद्देश्य स्थानीय स्तर की महत्वपूर्ण सूचनाओं को विश्वसनीय, स्पष्ट, तथ्यपरक और जिम्मेदार पत्रकारिता के माध्यम से पाठकों तक पहुंचाना तथा आम नागरिकों से जुड़े मुद्दों को प्रभावी मंच प्रदान करना है।विशेषज्ञता: स्थानीय पत्रकारिता | प्रिंट मीडिया | समाचार संपादन | डिजिटल पत्रकारिता | स्थानीय समाचार रिपोर्टिंग | जनहित के मुद्दे | कानूनी जागरूकता |

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