उदयपुर। राजस्थान के उदयपुर में सामने आया नाबालिग हिरासत मामला अब पुलिस विभाग के लिए बड़ी परेशानी बन गया है। भूपालपुरा थाना पुलिस पर आरोप है कि उसने 16 साल के किशोर को बालिग बताकर गिरफ्तार किया और करीब 24 घंटे तक थाने में रखा। जानकारी के अनुसार पुलिस ने मारपीट के एक मामले में शुक्रवार शाम दो युवकों को हिरासत में लिया था। इनमें एक किशोर भी शामिल था।
किशोर का कहना है कि उसने पुलिस को खुद के नाबालिग होने की जानकारी दी थी, लेकिन उसकी बात को अनदेखा कर दिया गया। आरोप है कि पुलिस ने बिना आधार कार्ड या अन्य दस्तावेज जांचे उसे बालिग मान लिया।
आधार कार्ड से खुला पूरा मामला
यह नाबालिग हिरासत मामला तब सामने आया जब शनिवार शाम पुलिस आरोपी को लेकर गिर्वा तहसीलदार जब्बरसिंह चारण की कोर्ट पहुंची। जमानती कार्रवाई के दौरान वकील ने आरोपी का आधार कार्ड मांगा। दस्तावेज देखने पर पता चला कि आरोपी की उम्र केवल 16 साल 6 महीने है।
आधार कार्ड सामने आते ही तहसीलदार ने जमानती कार्रवाई से इनकार कर दिया। उन्होंने साफ कहा कि नाबालिग से जुड़े मामलों की सुनवाई किशोर न्याय बोर्ड यानी जेजे कोर्ट में होती है, तहसीलदार कोर्ट में नहीं।
वकीलों ने लगाए गंभीर आरोप
मामला सामने आने के बाद कोर्ट परिसर में हंगामे जैसी स्थिति बन गई। वकील वीरेन्द्रसिंह राठौड़ ने आरोप लगाया कि पुलिस ने किशोर को 24 घंटे तक थाने में रखा, उसके साथ मारपीट की और उससे टॉयलेट तक साफ करवाए।
उन्होंने कहा कि किशोर न्याय अधिनियम के तहत नाबालिग को गिरफ्तार नहीं किया जाता, बल्कि डिटेन किया जाता है। इसके बाद उसे सीधे जेजे कोर्ट में पेश करना जरूरी होता है। वकीलों का कहना है कि इस नाबालिग हिरासत मामला में कानून की प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया।
पुलिस के जवाब पर उठे सवाल
मामले में जब भूपालपुरा थानाधिकारी आदर्श कुमार परिहार से सवाल किया गया तो उन्होंने कहा कि उम्र माता-पिता से पूछकर दर्ज की गई थी। हालांकि जब उनसे दस्तावेज जांचने को लेकर सवाल किया गया तो वे स्पष्ट जवाब नहीं दे पाए।
यहीं से पुलिस कार्रवाई पर सवाल और गहरे हो गए हैं। कानूनी जानकारों का कहना है कि किसी भी गिरफ्तारी में उम्र सत्यापन जरूरी प्रक्रिया होती है, खासकर तब जब मामला किशोर से जुड़ा हो।
जांच की मांग हुई तेज
फिलहाल यह नाबालिग हिरासत मामला पूरे उदयपुर में चर्चा का विषय बना हुआ है। किशोर को अब सोमवार को जेजे कोर्ट में पेश किया जाएगा। वहीं पुलिस विभाग की कार्रवाई को लेकर जांच की मांग भी तेज हो गई है।
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