बांसवाड़ा। राजस्थान के बांसवाड़ा जिले के घाटोल क्षेत्र के बड़लिया गांव के किसान अशोक भोई ने आधुनिक टमाटर की खेती के जरिए अपनी अलग पहचान बनाई है। कभी पारंपरिक खेती करने वाला यह किसान आज मल्चिंग और ड्रिप इरिगेशन तकनीक से लाखों रुपए की कमाई कर रहा है। शुरुआत सिर्फ एक बीघा जमीन और 50 हजार रुपए के कर्ज से हुई थी, लेकिन अब उनकी खेती 9 बीघा तक पहुंच चुकी है।
अशोक भोई ने बताया कि जब उन्होंने आधुनिक टमाटर की खेती शुरू करने की योजना बनाई थी, तब परिवार में भी इसे लेकर चिंता थी। उनके पिता लक्ष्मण भोई ने कहा था कि अगर फसल खराब हो गई तो आर्थिक स्थिति बिगड़ जाएगी। हालांकि अशोक ने जोखिम उठाया और नई तकनीक के साथ खेती में प्रयोग शुरू किए।
कोरोना काल में मिली नई सोच

किसान अशोक भोई के मुताबिक कोरोना काल के दौरान उन्होंने गांव के पास एक फार्महाउस में आधुनिक तरीके से खेती होते देखी थी। वहां मल्चिंग और ड्रिप सिस्टम का इस्तेमाल किया जा रहा था। इसी दौरान उन्हें आधुनिक टमाटर की खेती का विचार आया।
उन्होंने पहले खेती के तरीके को समझा और फिर करीब 50 हजार रुपए का लोन लेकर खेत में ड्रिप इरिगेशन और मल्चिंग सिस्टम तैयार कराया। शुरुआत में सिर्फ एक बीघा जमीन पर टमाटर लगाए गए। पहले ही सीजन में करीब 1 लाख रुपए का मुनाफा हुआ, जिसके बाद उनका आत्मविश्वास बढ़ गया।
मल्चिंग और ड्रिप तकनीक से बढ़ा उत्पादन
अशोक भोई ने बताया कि आधुनिक टमाटर की खेती में पानी और लागत दोनों की बचत होती है। फसल लगाने से पहले प्रति बीघा करीब दो ट्रॉली गोबर खाद खेत में डाली जाती है। इसके बाद खेत में बेड तैयार कर मल्चिंग शीट बिछाई जाती है और ड्रिप पाइपलाइन लगाई जाती है।
उन्होंने बताया कि खेत में रासायनिक खाद का उपयोग नहीं किया जाता। पौधों की जरूरत के हिसाब से ड्रिप सिस्टम के जरिए एनपीके, बोरोन और कैल्शियम जैसे पोषक तत्व दिए जाते हैं। इससे पौधों की ग्रोथ बेहतर होती है और उत्पादन में भी बढ़ोतरी होती है।
आधुनिक टमाटर की खेती में पानी सीधे पौधों की जड़ों तक पहुंचता है। इससे पानी की बर्बादी कम होती है और खरपतवार भी कम उगते हैं।
एक बीघा में 4000 पौधे लगाए
किसान ने बताया कि उन्होंने गुजरात के हिम्मतनगर से ‘वीरांग’ वैरायटी के टमाटर पौधे खरीदे थे। प्रति पौधा करीब 1.30 रुपए की लागत आई। एक बीघा जमीन में लगभग 4000 पौधों की रोपाई की जाती है।
हर साल फरवरी की शुरुआत में पौधों की रोपाई की जाती है। करीब 80 दिन बाद फसल तैयार हो जाती है। पहली तुड़ाई अप्रैल के तीसरे सप्ताह से शुरू होती है और लगभग दो महीने तक लगातार तुड़ाई चलती रहती है।
हर तुड़ाई में निकल रहा 6 टन उत्पादन
अशोक भोई के अनुसार अब तक चार बार टमाटर की तुड़ाई हो चुकी है और दो तुड़ाई अभी बाकी हैं। एक तुड़ाई में प्रति बीघा करीब 300 थैले टमाटर निकलते हैं। हर थैले का वजन लगभग 20 किलो होता है।
इस तरह प्रति बीघा एक बार में करीब 6 टन टमाटर का उत्पादन मिल रहा है। बांसवाड़ा मंडी में टमाटर 18 से 25 रुपए प्रति किलो तक बिक रहा है। किसान के मुताबिक अब तक चार तुड़ाई से करीब 15 लाख रुपए की कमाई हो चुकी है, जबकि आने वाली दो तुड़ाई से लगभग 5 लाख रुपए और मिलने की उम्मीद है।
सालभर चलता है खेती का चक्र
अशोक भोई सिर्फ टमाटर की खेती तक सीमित नहीं हैं। उन्होंने खेती में रोटेशन सिस्टम अपनाया है। आधुनिक टमाटर की खेती के बाद दूसरी सब्जियों की खेती भी की जाती है। उन्होंने बताया कि इससे पहले उन्होंने 5 बीघा जमीन में गोभी की खेती की थी, जिससे करीब 9 लाख रुपए का मुनाफा हुआ। अब टमाटर की फसल के बाद जुलाई महीने में लौकी की खेती करने की तैयारी की जा रही है।
युवाओं के लिए प्रेरणा बने अशोक भोई
बड़लिया गांव के किसान अशोक भोई अब आसपास के किसानों और युवाओं के लिए प्रेरणा बन चुके हैं। सीमित संसाधनों और कम पढ़ाई के बावजूद उन्होंने आधुनिक तकनीक के जरिए खेती को लाभ का व्यवसाय बना दिया।
कृषि विशेषज्ञों के अनुसार ड्रिप इरिगेशन और मल्चिंग जैसी तकनीक अपनाने से पानी की बचत होती है और उत्पादन क्षमता बढ़ती है। यही वजह है कि अब कई किसान आधुनिक टमाटर की खेती की ओर आकर्षित हो रहे हैं।
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